5 अक्टूबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

पत्रिका एक्सक्लूसिव: छत्तीसगढ़ का हर तीसरा युवा हाई कोलेस्ट्रॉल की चपेट में, 80% को पता ही नहीं, किशोरों में भी बढ़ रहा खतरा

High Cholesterol in Youth: छत्तीसगढ़ में युवाओं और किशोरों में बढ़ता हाई कोलेस्ट्रॉल चिंता का कारण बन रहा है। एनसीडी पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में लाखों लोगों की स्क्रीनिंग में बीपी, डायबिटीज और लिपिड प्रोफाइल से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं।
2 min read
Google source verification

रायपुर

•

image

Khyati Parihar

•

image

पीलूराम साहू

•

Oct 05, 2026

Chhattisgarh News

हाई कोलेस्ट्रॉल (फोटो सोर्स- iStock)

रायपुर@पीलूराम साहू। Chhattisgarh News: प्रदेश का हर तीसरा युवा हाई कोलेस्ट्राल की चपेट में है। यही नहीं युवाओं के साथ किशाेरों में भी गुड कोलेस्ट्राल की कमी है। नॉन कंम्यूनिकेबेल डिसीज (एनसीडी) पोर्टल के अनुसार प्रदेश में 75 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें 18 लाख से ज्यादा लोग हाई बीपी, डायबिटीज व लिपिड प्रोफाइल की गड़बड़ी वाले मिले हैं। यह स्क्रीनिंंग अप्रैल से अक्टूबर 2025 तक हुई। अक्टूबर में कोलेस्ट्राल मंथ चल रहा है। इस मौके पर पत्रिका ने कार्डियोलॉजिस्ट व विभिन्न आंकड़ोें की पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

एक अन्य आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 10 से 19 साल के 46.6 प्रतिशत किशोरों में गुड कोलेस्ट्रॉल एचडीएल खतरनाक स्तर तक कम है और 5 से 9 साल के 25.3 प्रतिशत बच्चों में ट्राइग्लिसराइड हाई है। डॉक्टरों का कहना है कि लक्षण न दिखने से ही यह साइलेंट किलर बन रहा है और सीधे हार्ट अटैक का कारण बन रहा है। पिछले साल स्वास्थ्य विभाग ने भी 38.6 लाख की डायबिटीज जांच की थी, जिनमें 6.88 लाख मरीज मिले थे। यही नहीं 37.7 लाख की बीपी जांच में 11.82 लाख हाइपरटेंशन के केस मिले हैं। यानी जांच कराने वाले हर 5 में से 1 व्यक्ति को लाइफस्टाइल बीमारी है, जिसका सीधा कनेक्शन कोलेस्ट्रॉल से है।

आदिवासी भी लाइफ स्टाइल से प्रभावित

लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारियों में आदिवासी भी अब अछूता नहीं रहा। आदिवासियों में प्री-हाइपरटेंशन दर 42.7 प्रतिशत और हाइपरटेंशन 26 प्रतिशत है, जो सामान्य आबादी के बराबर है। पहले माना जाता था कि आदिवासी प्रकृति के करीब रहते हैं इसलिए उन्हें लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारी नहीं होती, लेकिन ऐसा नहीं है। अब शहरी खानपान गांव तक पहुंच गया है।

हैल्थ सर्वे में मोटापे का भी जिक्र

कोलेस्ट्राल बढ़ाने में मोटापा भी एक बड़ा कारण है। नेशनल फेमिली हैल्थ सर्वे-5 में दुर्ग में बीएमआई 25 से अधिक वाले वयस्क 18.6 प्रतिशत से बढ़कर 23.9 प्रतिशत हो गए, जो प्रदेश में सबसे अधिक है। बिलासपुर में यह 10 से बढ़कर 17.1 और रायपुर में 15.7 प्रतिशत है। रायपुर-बिलासपुर-दुर्ग का शहरी कॉरिडोर हॉट स्पॉट बन रहा है।

कोलेस्ट्राल बढ़ने के लक्षण

  • सुबह पैरों में भारीपन0 गर्दन व आंखों के पास पीले दाने
  • थोड़ा चलने पर सांस फूलना
  • तलवों में जलन
  • सिर के पीछे भारीपन।

बचने के ये उपाय

  • तेल- दिन में 3 चम्मच से ज्यादा नहीं, सरसों-मूंगफली तेल, डालडा बंद।
  • थाली- आधा हिस्सा भाजी-फल, एक चौथाई दाल, एक चौथाई ही चावल। कोदो-रागी हफ्ते में 3 दिन।
  • चलना- रोज 30 मिनट तेज पैदल, हफ्ते में 150 मिनट।
  • नशा बंद- बीड़ी-गुटखा एचडीएल खत्म करता है, महुआ शराब ट्राइग्लिसराइड बढ़ाती है।
  • जांच- 30 साल की उम्र कराएं लिपिड प्रोफाइल की जांच।

टॉपिक एक्सपर्ट

डॉ. कृष्णकांत साहू, प्रोफेसर व एचओडी कार्डियक सर्जरी, पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मुताबिक, इसमें कोई संदेह नहीं कि लाइफ स्टाइल व जंक फूड से किशोरों व युवाओं में बैड कोलेस्ट्राल बढ़ रहा है। ये अच्छा संकेत नहीं है। मोबाइल फोन में ज्यादा समय बिताना मोटापा का कारण बन रहा है। शराब व स्मोकिंग भी इसके सबसे बड़े दुश्मन है। रोज एक घंटे वॉक व योग करने से बैड कोलेस्ट्राल घटेंगे। ये डायबिटीज को भी काफी हद तक कंट्रोल करेगा।