31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

OMG! आयकर विभाग ने खंगाला तो इन कारोबारियों की तिजोरी ने उगला 50 करोड़ का…

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के स्टील और पॉवर सेक्टर से जुड़े दो कारोबारियों के ठिकानों पर छापे के दौरान आयकर विभाग को कई चौंकाने वाले दस्तावेज मिले हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Ashish Gupta

•

Updated: 26 Oct 2017, 2:18 PM IST

income tax raid

OMG! आयकर विभाग ने खंगाला तो इन कारोबारियों की तिजोरी ने उगला 50 करोड़ का

रायपुर . आयकर विभाग ने रायगढ़ के स्टील और पॉवर सेक्टर से जुड़े दोनों कारोबारियों के ठिकानों पर बुधवार को दूसरे दिन भी जांच जारी रखी। उनके ठिकानों से 50 लाख रुपए नकदी सहित 4 लॉकर और 50 करोड़ रुपए से अधिक की बोगस एंट्री के दस्तावेज मिले हैं। यह एंट्री कोलकाता की बेनामी कंपनियों से करवाई गई है। इसकी छानबीन करने के लिए आयकर विभाग कोलकाता को जानकारी भेजी गई है। फाइल में फर्म को नुकसान में दिखाया गया है। दूसरी तरफ ब्लैकमनी को खपाने के लिए करोड़ों रुपए का निवेश भी किया गया है।

Read More : Video : रमन के मंत्री का अजीबो-गरीब बयान, सीएम समेत BJP को बताया कुंवारों वाली पार्टी

विभागीय अधिकारी इनके दस्तावेजों के साथ ही कम्प्यूटर और लैपटॉप को खंगालने में जुटे हुए हैं। बताया जाता है कि उनके स्टॉक से लेकर लेनदेन और भुगतान रजिस्टर में बड़ी गड़बडी़ मिली है। कारोबारियों द्वारा कुछ नए प्रोजेक्ट शुरू करने संबंधी पेपर भी मिले हैं। इसे जांच के दायरे में लिया गया है।

Read More : केन्द्रीय मंत्री बोले - नक्सलवाद को खत्म करने बोली, गोली और विकास को हथियार बनाएगी सरकार

आयकर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लगातार मिल रही गड़बड़ी को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। दफ्तर में कार्यरत कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है। अन्वेषण के दौरान लगातार चौंकाने वाले दस्तावेज मिल रहे हैं। इन्हें जांच पूरी होने के बाद जब्त किया जाएगा।

Read More : भारतमाला प्रोजेक्ट से छत्तीसगढ़ को होगा गजब का फायदा, बदल जाएगी प्रदेश की सूरत

दस्तावेजों की जांच
आयकर विभाग की टीम कारोबारियों की बिक्री और खरीदी की जांच करने में जुटी है। फैक्ट्रियों का संचालन करने के लिए करोड़ों रुपए का कोयला, आयरन और अन्य सामग्री खरीदी गई है। लेकिन, उत्पादन 50 फीसदी ही दिखाया गया है। उल्टे फैक्ट्री के संचालन, मजदूरी और मेटेंनेंस में बेहिसाब राशि खर्च की गई है। फैक्ट्रियों के क्षमता को बढ़ाने के लिए लगातार नई मशीनों की खरीदी करना भी बताया जाता है।