
ड्रोन से होगी खेतों की जियो मैपिंग (फोटो सोर्स- AI)
रायपुर@संतराम साहू। Chhattisgarh News: खरीफ की वास्तविक स्थिति और खेतों में बोई गई फसलों का सही रिकॉर्ड तैयार करने के लिए इस वर्ष गिरदावरी का काम अक्टूबर में ही पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व अमले को खेत-खेत जाकर फसल की स्थिति दर्ज करने के साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।
खास तौर पर गांजा और अफीम जैसी मादक फसलों की अवैध खेती की संभावना वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर सख्ती से निगरानी की जा रही है। जानकारी के अनुसार 22 सितंबर तक 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है। इसमें प्रमुख फसलें धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल आदि शामिल हैं।
प्रशासन इस बार गिरदावरी की प्रक्रिया में तकनीक का भी व्यापक इस्तेमाल कर रहा है। कई क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से जियो मैपिंग कराई जा रही है। इसके जरिए खेतों की लोकेशन, फसल का क्षेत्रफल और फसल की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। ड्रोन से प्राप्त जानकारी और मैदानी अमले की रिपोर्ट का मिलान कर वास्तविक स्थिति की जांच की जा रही है।
गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद संबंधित राजस्व अधिकारी इसकी लगातार समीक्षा कर रहे हैं। खेतों में दर्ज फसल और वास्तविक स्थिति में अंतर पाए जाने पर संबंधित अमले से जानकारी मांगी जा रही है। अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि फसल का रकबा और किस्म सही तरीके से दर्ज हो, ताकि आगे चलकर सरकारी योजनाओं, फसल बीमा, मुआवजा और अन्य कृषि संबंधी लाभ में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी गांजा और अफीम की अवैध खेती की आशंका वाले क्षेत्रों को विशेष निगरानी में रखा गया है। राजस्व, पुलिस और संबंधित विभागों के स्तर पर ऐसे इलाकों की जानकारी जुटाई जा रही है। ड्रोन सर्वे और जियो मैपिंग से संदिग्ध क्षेत्रों की पहचान होने पर मैदानी स्तर पर सत्यापन कराया जा सकता है।
प्रशासन का मानना है कि ड्रोन आधारित जियो मैपिंग से गिरदावरी में पारदर्शिता बढ़ेगी और खेतों के रिकॉर्ड को अधिक सटीक बनाया जा सकेगा। अक्टूबर में प्रक्रिया पूरी होने के बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर फसलवार और क्षेत्रवार आंकड़े सामने आएंगे। इससे प्रशासन को खरीफ फसल की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में भी मदद मिलेगी। इस वर्ष छत्तीसगढ़ में कुल 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया था।
Updated on:
05 Oct 2026 10:18 am
Published on:
05 Oct 2026 10:18 am
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