
विधानसभा के पिछले चुनाव में जिन 39 सीटों पर भाजपा ने कांग्रेस से मात खाई थी, उन्ही सीटों से वह चौथी जीत का रास्ता बनाने में जुट गई है।
राहुल जैन@रायपुर. विधानसभा के पिछले चुनाव में जिन 39 सीटों पर भाजपा ने कांग्रेस से मात खाई थी, उन्ही सीटों से वह चौथी जीत का रास्ता बनाने में जुट गई है। इसके लिए पार्टी ने एक उलटबांसी दांव लगाया है। कांग्रेस के कब्जे वाली इन सीटों को हासिल करने के लिए नए सिरे से रणनीति तैयार कर नेताओं और कार्यकर्ताओ की एक प्रशिक्षित टुकड़ी को उतार दिया गया है।
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इन सीटों पर वरिष्ठ नेताओं को अभिभावक बनाकर उलटफेर की जिम्मेदारी दी गई है। उदाहरण के तौर पर भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद रामविचार नेताम सुकमा के कोंटा विधानसभा क्षेत्र के अभिभावक है। उनको कांग्रेस की इस पारंपरिक सीट पर विपक्ष के उपनेता कवासी लखमा को मात देने का काम सौंपा गया है। एेसा विधायकों के खिलाफ लोगों की नाराजगी को देखने को किया गया है। जिन बूथों पर भाजपा हारी है, उसके लिए पार्टी पहले ही जहां कम-वहां हम अभियान चला रही है। इसके तहत उन बूथों पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। भाजपा को उम्मीद है कि इन 39 सीट पर उलटफेर करके ही वे मिशन-65 के लक्ष्य को हासिल कर पाने में कामयाब होंगे। हालाकिं भाजपा के प्रदेश महामंत्री संतोष पाण्डेय का कहना है, हम सभी सीटों को बराबर तवज्जों दे रहे हैं। जहां हमारे विधायक नही हैं, वहां एक अलग टीम काम कर रही है। भाजपा इस रणनीति में कितना कामयाब होती है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इसने कांग्रेस की जमीनीं मुश्किलें तो बढ़ा दी है।
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भाजपा की बैठकों और आंतरिक सर्वेक्षणों में एंटी इनकम्बेंसी की बात सामने आई है। पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है, अधिकतर लोगों की नाराजगी विधायकों को लेकर है। एेसा भाजपा के साथ है तो कांग्रेस विधायकों के खिलाफ भी यही लहर काम कर रही है। ऐसे में थोड़ा अधिक प्रयास कर इन सीटों पर कब्जा किया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ और भाजपा अपनी कुछ मजबूत सीटे बचा ले गई तो सरकार बनने से कोई रोक नहीं पाएगा।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि लोगों की अपेक्षाएं तो बनी रहती हैं, इसको लेकर नाराजगी भी रहती है। 2003 में 7000 करोड़ रुपए के वार्षिक बजट वाले राज्य का बजट अभी 80000 करोड़ रुपए है। गरीबों-किसानों के लिए इतना कुछ हुआ, हर सेक्टर में 8 से 10 गुना विकास हुआ है, उसके बाद भी लोगों की नाराजगी बनी रहती है। इसको दूर करने की कोशिशें हो रही हैं। निगरानी तंत्र मजबूत किया जा रहा है।
Published on:
3 Jun 2018, 10:54 AM IST
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