
मेडिकल कॉलेज में MBBS दाखिला (फोटो सोर्स- पत्रिका)
रायपुर@पीलूराम साहू। NEET Counselling 2026: 455 नीट स्कोर में भी ऑल इंडिया कोटे से प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट नहीं मिली। जबकि इसी स्कोर पर स्टेट कोटे से प्रदेश के टॉप यानी रायपुर स्थित पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिल गया। ये सारा खेल आरक्षण नियमों के कारण हुआ। दरअसल ऑल इंडिया में एसटी कैटेगरी के लिए केवल 12 फीसदी आरक्षण है। जबकि प्रदेश में इस कैटेगरी के छात्रों के लिए 32 फीसदी आरक्षण है।
अच्छे स्कोर के बाद भी कई छात्र एमबीबीएस में एडमिशन से वंचित हो गए। दरअसल छात्रों के पैरेंट्स रायपुर समेत दूसरे शहरों में रहते हैं, लेकिन उनके पास छत्तीसगढ़ का मूल निवासी नहीं है। ऐसे में वे यहां स्टेट कोटे से एडमिशन नहीं ले सकते थे। प्रदेश में एमबीबीएस की 3025 सीटें हैं। 15 सरकारी मेडिकल कॉलेज है, जहां की 15 फीसदी सीटें ऑल इंडिया कोटे के लिए आरक्षित रहती हैं। इसमें छत्तीसगढ़ समेत दूसरे राज्यों के छात्रों को अच्छे नीट स्कोर व मेरिट सूची के अनुसार एडमिशन मिलता है। मेरिट सूची व आवंटन में पूरी पारदर्शिता बरतने का दावा चिकित्सा शिक्षा विभाग कर रहा है, लेकिन इसके बाद भी कई शिकायतें आ रही हैं।
प्रदेश के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में दूसरे राज्यों के छात्रों को स्टेट कोटे से एमबीबीएस की सीटें देने की शिकायत 21 सितंबर को कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन से की गई है। मामले की जांच जारी है। दरअसल 10 छात्रों ने कमिश्नर को सौंपे पत्र में कहा है कि दस्तावेज सत्यापन में गंभीरता नहीं बरतने के कारण दूसरे राज्यों के छात्रों को प्रदेश में सीट दी गई है। इनके कारण प्रदेश के छात्रों का बड़ा नुकसान हुआ है। शिकायत के अनुसार ओडिशा व महाराष्ट्र की छात्राओं का एडमिशन जांजगीर-चांपा, झारखंड की छात्रा का एडमिशन अंबिकापुर में हुआ है। वहीं दो निजी कॉलेजों में तीन व एक अन्य छात्रा का प्रवेश एक निजी डेंटल कॉलेज में हुआ है।
छात्रों ने कमिश्नर से सभी छात्रों का एडमिशन रद्द करने की मांग की है। ताकि उनके प्रवेश रद्द होने पर स्थानीय निवासी को मौका मिल सके। गौरतलब है कि जिन छात्रों ने डीएमई कार्यालय में शिकायत की है, उन्होंने हाईकोर्ट में भी याचिका लगाई थी। यहां स्टेट कोटे के लिए अलग से सूची जारी नहीं करने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पुख्ता दस्तावेज है तो फिर से याचिका दायर की जा सकती है। दरअसल प्रदेश में स्टेट कोटे के लिए अलग से सूची जारी नहीं की जाती। हालांकि कुछ छात्र फर्जी डोमिसाइल बनवाकर कर प्रदेश के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश ले लेते हैं।
प्रदेश में एनआरआई कोटे का बुरा हाल है। वास्तविक एनआरआई को प्रवेश देने के कारण दो राउंड तक केवल 65 छात्रों ने प्रवेश लिया है। जबकि 6 निजी कॉलेजों में सीटों की कुल संख्या 192 है। सीनियर मेडिकल एक्सपर्ट डॉ. मानिक चटर्जी व हिमेटोलॉजिस्ट डॉ. विकास गाेयल के अनुसार दो राउंड की काउंसिलिंग के ट्रेंड को देखते हुए इस बार निश्चित है कि एनआरआई कोटे को मैनेजमेंट में कन्वर्ट कर दिया जाएगा। इसका फायदा दूसरे राज्यों के छात्रों को होगा।
पिछल पांच सालों में
कुल पंजीयन इस तरह
वर्ष - पंजीयन
Updated on:
07 Oct 2026 10:30 am
Published on:
07 Oct 2026 10:30 am
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