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अधिकारी का फिर तबादला, मकान मालिक-किराएदार विवाद के 800 केस नहीं निपटे

Raipur News: 75 साल के रमेश वर्मा (परिवर्तित नाम) रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी थे। अपनी जीवन भर की जमा पूंजी से उन्होंने 15 साल पहले 1000 वर्गफीट भूमि पर दो माले का मकान बनाया था।
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800 cases of landlord-tenant dispute were not resolved

मकान मालिक-किराएदार विवाद के 800 केस नहीं निपटे

Chhattisgarh News: रायपुर। 75 साल के रमेश वर्मा (परिवर्तित नाम) रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी थे। अपनी जीवन भर की जमा पूंजी से उन्होंने 15 साल पहले 1000 वर्गफीट भूमि पर दो माले का मकान बनाया था। कोई औलाद नहीं होने से एक परिवार उन्होंने अपने मकान का एक फ्लोर किराए में दे दिया। अब पंद्रह साल से वह परिवार ना तो मकान छोड़ रहा है ना ही किराया दे रहा है। 75 साल के बुजुर्ग ने दो साल पहले भाड़ा नियंत्रण में प्रकरण प्रस्तुत किया, लेकिन वह सुनवाई नहीं होने के कारण लंबित है।

बार-बार अधिकारियों के तबादले से लंबित मामलों का नहीं हो रहा निराकरण

कारण यह है कि कलेक्ट्रेट स्थित भाड़ा नियंत्रण शाखा में अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। कलेक्टर ने इस संबंध में सरकार को पत्र भी भेज दिया है, लेकिन अभी तक (CG Hindi News) किसी भी डिप्टी कलेक्टर को प्रभार देने के संबंध में आदेश नहीं आया है। इस दौरान सैकड़ों प्रकरण पर सुनवाई अटकी हुई है।

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800 मामले लंबित

बता दें कि भाड़ा नियंत्रण शाखा के अधिकारी जगन्नाथ वर्मा को दो माह पहले अभनपुर एसडीएम का प्रभार दिया गया है। तब भाड़ा नियंत्रण में सुनवाई बंद है। कई लोगों अपनी निर्धारित पेशी की तारीख में आते हैं और बिना किसी निर्णय के लौट जाते हैं। खुद के मकानों पर किराएदार का कब्जा हटाने के लिए जिले के 800 से ज्यादा लोग वर्षों से केस लड़ रहे हैं। बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है।

इस तरह की शिकायतेें

- मकान मालिक द्वारा करार का उल्लंघन
- किराएदार द्वारा करार का उल्लंघन
- किराएदार द्वारा मकान खाली नहीं करना
- मकान मालिक द्वारा बिजली काट देने की शिकायत
- मकान मालिक द्वारा बिजली का एक्टेंशन नहीं देना
- मकान मालिक द्वारा पानी की सप्लाई रोक देना
- किराएदार का किराया नहीं देना
- 20 साल पहले तय किराया ही देना

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ऐसे विवादों की सुनवाई

- मकान मालिक और किराएदार के बीच करारनामा नहीं है, तो पहले 6 महीने का नोटिस मकान खाली कराने के लिए दिया जाता है, फिर किराएदार का बेजा कब्जा माना जाता है।

- किरायानामा है तो भाड़ा नियंत्रक अधिकारी देखते हैं कि दोनों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन तो नहीं हो रहा है। रेंट एग्रीमेंट नहीं होने पर किराएदार लंबे समय से कब्जे का दावा करता है, तो फिर मामला सिविल में चला जाता है।

- मकान मालिक और किराएदार के विवाद की स्थिति में 3 स्तर पर सुनवाई होती है। इसके बीच और कोई कोर्ट नहीं है।

डिप्टी कलेक्टर को भाड़ा नियंत्रण का दिया प्रभार

अधिकारी की नियुक्ति के संबंध में शासन से पत्राचार किया जा रहा है। जल्द ही डिप्टी कलेक्टर को भाड़ा नियंत्रण का प्रभार दिया जाएगा। - डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे, कलेक्टर, रायपुर

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