
महिलाओं के हक पर पुरुषों का कब्जा (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Chhattisgarh Private Bus Service: प्रदेश में बंद पड़ी सरकारी बस सेवा को दोबारा शुरू कराने के लिए ‘पत्रिका’ द्वारा चलाए जा रहे राज्यव्यापी जनअभियान की कड़ी में गुरुवार को राज्य के अलग-अलग जिलों में 'पत्रिका' के रिपोर्टरों ने खुद आम यात्री बनकर निजी बसों में सफर किया। इस जमीनी पड़ताल में बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। निजी बस संचालकों की मनमानी चरम पर है, किराया पूरा वसूला जा रहा है, लेकिन सुविधाएं आधी-अधूरी हैं और यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दी गई है।
कुम्हारी से भिलाई पावर हाउस तक किराया 30 रुपए लिया गया, जहां बस की सीटें फटी थीं और चालक के कैबिन में 10 से अधिक सवारियां बैठी थीं। कवर्धा से पोंडी के मात्र 8 किमी सफर में बस चालक ने 7 जगह गाड़ी रोकी। कम दूरी के यात्रियों से आने-जाने का 40 रुपए तक किराया वसूला जा रहा है और छुट्टे पैसों के बहाने खुलेआम ओवरचार्जिंग की जा रही है।
राजनांदगांव से डोंगरगांव के 25 किमी सफर में 40 सीटर बस में 50 से अधिक यात्री ठूंसे मिले, जिनमें 15-20 लोग खड़े थे। महिला व दिव्यांग आरक्षित सीटें नदारद थीं और वापसी में बिना टिकट पूरा किराया वसूला गया।
बेमेतरा में अनिश्चित टाइमिंग के कारण 25 किमी का सफर तय करने में 1.5 घंटे और 60 किमी में 2.5 घंटे बर्बाद हो रहे हैं। बसों में किराया सूची, आरक्षित सीटें, प्राथमिक उपचार किट, शिकायत पेटी और हेल्पलाइन नंबर गायब मिले। बालोद से उमरादाह होकर गुरुर जाने वाली ग्रामीण बस में खिड़कियों के कांच टूटे थे, अग्निशमन यंत्र गायब था और दरवाजे ठीक से बंद नहीं हो रहे थे।
दुर्ग से छुईखदान मार्ग की बसों में फर्श पर अतिरिक्त स्टूल व बेंच लगाकर ओवरलोडिंग की गई, फिर भी 10-12 लोग खड़े थे। जांजगीर से चांपा (10 किमी) के सफर में खटारा राजधानी बस हर 500 मीटर पर रुकती रही। बस की सीटें फटी थीं, खिड़कियों के कांच फूटे थे और कलपुर्जे हिल रहे थे।
सीपत चौक से रतनपुर के सफर में बिना टिकट सीधे नकद वसूली की गई। तिफरा हाईटेक बस स्टैंड पर गंदगी, सीटिंग व्यवस्था और शौचालय का घोर अभाव मिला। कोरबा के लोकल रूटों पर खटारा बसें चल रही हैं, जहां महिला व दिव्यांग आरक्षित सीटों पर सामान्य सवारियां बिठाई जा रही थीं।
भाटागांव बस टर्मिनल और प्रमुख चौराहों पर बीच सड़क बसें खड़ी करने से यातायात बाधित हो रहा है। लोकल रूटों पर न तो किराए की रेट लिस्ट है और न टिकट दिया जा रहा है। धमतरी से नगरी-सिहावा जाने वाली बसों में इमरजेंसी एग्जिट के सामने सामान ठूंसा था और अग्निशमन यंत्र नदारद थे।
महासमुंद. बस में पैर रखने की जगह नहीं है, गलियारे में लोग खड़े हैं, फिर भी जगह-जगह सवारियां चढ़ाई जा रही हैं। दूसरी ओर किराया बढ़ाने की तैयारी है। महासमुंद से बेलसोंडा पड़ताल में यात्री अतुल ध्रुव ने बताया कि बीके बाहरा से महासमुंद (25 किमी) का किराया 25 रु. से बढ़कर 50 रु. हो गया है। बसों में पैनिक बटन और आरक्षित सीट होनी चाहिए। जिला परिवहन अधिकारी प्रतीक शुक्ला ने बताया कि समय-समय पर बसों की जांच कर नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाती है।
Updated on:
04 Oct 2026 08:31 am
Published on:
04 Oct 2026 08:31 am
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