
हेमंत कपूर. परिणामों के लिहाज से जिले में वर्ष 2013 का विधानसभा चुनाव बेहद चौंकाने वाला था। तब जिले में बदलाव की बयार ऐसी रही कि चुनाव में भाग्य आजमाने पांच विधायक उतरे, लेकिन सभी पराजित हो गए। स्थिति यह रही कि चुनाव में जहां प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान लगाया जा रहा था, वहां भी विधायकों को रिकॉर्ड मतों से पराजय का सामना करना पड़ा। लिहाजा नए परिषद में पुराने विधानसभा का जिले का कोई भी प्रतिनिधि नहीं पहुंच पाया और सभी नए चेहरों ने जिले का प्रतिनिधित्व किया।
दुर्ग शहर
दुर्ग ग्रामीण की तरह ही दुर्ग शहर विधानसभा क्षेत्र का भी हाल रहा। मंत्री हेमचंद यादव तब प्रदेश की राजनीति में बेहद प्रभावी थे। उन्होंने प्रदेशभर में विकास के कार्य करवाए। चुनाव से पहले ही दुर्ग को संभाग का दर्जा भी दिलाया। वहीं विधायक अरुण वोरा उनके सामने लगातार तीन बार पराजित हो चुके थे। चौथी बार उतारे जाने पर उन्हें मंत्री हेमचंद यादव के सामने बेहद कमजोर माना जा रहा था, और चुनाव को उनके राजनीतिक कॅरियर का अंत माना जा रहा था। इसके साथ ही उनके ऊपर परिवारवाद का तमगा भी लगा था। इसके बाद भी जनता ने यादव को विधायकी की गद्दी से उतार दिया।
दुर्ग ग्रामीण
तब जिले में सर्वाधिक आश्चर्यजनक परिणाम दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का रहा। यहां टिकटों की घोषणा के साथ कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिमा चंद्राकर के लिए लगभग वाक ओवर माना जा रहा था। स्थिति यह थी कि भाजपा प्रत्याशी रमशीला साहू को तीसरे क्रम में गिना जा रहा था। दरअसल उन्हें स्थानीय दावेदारों को दरकिनार कर क्षेत्र में उतारा गया था। इससे जनता में उनकी स्वीकार्यता को लेकर प्रश्नचिन्ह लगाया जा रहा था। वहीं निवर्तमान विधायक प्रतिमा चंद्राकर पूरे कार्यकाल में निर्विवाद रहीं। इसके बाद भी उनकों पराजय का सामना करना पड़ा।
भिलाई नगर
भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला आमने-सामने का रहा। यहां दोनों दल के अपने-अपने वोट बैंक हैं। इसके बाद भी यहां सबसे ज्यादा चौंकाने वाली स्थिति पुराने विधायक बदरूद्दीन कुरैशी के खिलाफ निर्वाचित विधायक प्रेमप्रकाश पांडेय के जीत का अंतर रहा। चुनाव में विधायक बदरूद्दीन के खिलाफ आक्रोश की स्थिति तो दिख रही थी। प्रेमप्रकाश पांडेय की स्थिति को कमजोर आंका जा रहा था, लेकिन बाद भी उन्होंने 17 हजार 106 मतों से जीत दर्ज की। यह तब तक इस सीट पर जीत का रिकॉर्ड रहा।
वैशाली नगर
वैशाली नगर की स्थिति भी भिलाई नगर की ही तरह रहा। यहां तत्कालीन निवर्तमान विधायक भजनसिंह निरंकारी ने भाजपा के शासनकाल में उपचुनाव में जीत दर्ज की थी। इसे देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें मुख्य चुनाव में भी उतारा था, लेकिन मतदाताओं ने उन्हें भी खारिज कर दिया। दूसरी ओर तब निर्वाचित विधायक विद्यारतन भसीन की कार्यशैली भी भिलाई की जनता महापौर के रूप में देख चुकी थी। उनके महापौर कार्यकाल में ही भाजपा ने भिलाई निगम क्षेत्र में आने वाले तीनों विस क्षेत्रों भिलाईनगर, वैशालीनगर व दुर्ग ग्रामीण गंवाई थी। ऐसे में उनका राह कठिन माना जा रहा था, लेकिन बदलाव की बयार ने उन्हें फिर से ताज दिला दिया।
पाटन
पाटन की स्थिति इस मामले में थोड़ी अलग रही। यहां तत्कालीन विधायक विजय बघेल के खिलाफ प्रारंभ से ही विरोध की स्थिति परिलक्षित हो रहा था। इसके अलावा उनके अपने पार्टी के लोगों ने साथ नहीं दिया। इसके बाद भी जीत हार का मौजूदा अंतर की उम्मीद किसी को नहीं थी। उनके खिलाफ भूपेश बघेल को पिछली बार पराजय का सामना करना पड़ा था। ऐसे में इस चुनाव में भी विजय बघेल का पलड़ा भारी माना जा रहा था, लेकिन उन्हें तमाम प्रयासों के बाद भी 9 हजार 343 मतों के विशाल अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा। यह पाटन विधानसभा क्षेत्र के तब तक के इतिहास में जीत हार का सबसे बड़ा अंतर था।
भिलाई नगर
मतदाता - 1,65,950
मतदान - 1,06,402 (64.12 प्रतिशत)
विजयी - प्रेम प्रकाश पांडेय (भाजपा) - 55,654
पराजित - बदरूद्दीन कुरैशी (विधायक, कांग्रेस) - 38,548
अंतर - 17,106 (16.62 प्रतिशत)
वैशाली नगर
मतदाता - 2,33,543
मतदान - 1,70,604
दुर्ग शहर
विधायक मतदाता 2,03,476
मतदान- 1,38,687 (68.16 प्रतिशत)
विजयी- अरुण वोरा (कांग्रेस) - 58,645
पराजित- हेमचंद यादव (विधायक, भाजपा) - 53,024
अंतर - 5,621 (4.12 प्रतिशत)
दुर्ग ग्रामीण
मतदाता- 1,79,387
मतदान- 1,31,034 (73.05 प्रतिशत)
विजयी- रमशीला साहू (भाजपा) - 50,327
पराजित- प्रतिमा चंद्राकर (विधायक, कांग्रेस) - 47,348
अंतर- 2,979 (2.34 प्रतिशत)
Published on:
29 Oct 2023 05:28 pm
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