यही नहीं, गांव के घरों की दीवारों पर भी संस्कृत में ही श्लोक लिखे गए हैं। कुल मिलाकर यहां के लोगों ने संस्कृत भाषा को पूरी तरह अपनाया हुआ है। यहां रहने वाले किसी शख्स से अगर आप सुब सुबह मुलाकात करते हैं तो वो आपसे 'गुड मॉर्निंग' नहीं बल्कि 'नमो-नम:' कहेगा। हैरानी की बात तो ये है कि, इस गांव के आसपास का हर गांव हिंदी में अपनी लोकल टोन का मिश्रण करके बातचीत करते हैं, जिनसे रोजाना इस गांव के लोगों का मिलना जुलना होता रहता है, बावजूद इसके गांव के लोग बाहरी शख्स से ही अन्य भाषाओं में बातचीत करते हैं पर अपने गांव के लोगों से नहीं। फिर भले ही वो कई छोटा बच्चा ही क्यों न हो।