
धनिये की खेती (फोटो सोर्स: Kheti Vyapar)
लक्ष्मीनारायण यादव की रिपोर्ट
Rajgarh News :मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में उद्यानिकी को बढ़ावा देने के लिए हर साल योजनाओं का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। लाखों पौधे बांटने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर सरकारी योजनाओं की हवा निकलती नजर आ रही है। विभाग के ही आंकड़े ये पोल खोल रहे हैं कि, भारी-भरकम बजट और प्रचार-प्रसार के बावजूद बीते दो साल में जिले का उद्यानिकी रकबा कछुआ चाल से भी धीमा बढ़ा है।
दरअसल, उद्यानिकी खेती से जुड़ने वाले किसानों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन खेती का रकबा उसी अनुपात में नहीं बढ़ रहा। साल 2024-25 से 2025-26 के बीच पंजीकृत उद्यानिकी किसानों की संख्या 8727 से बढ़कर 10,723 हो गई। यानी दो साल में 1996 नए किसान जुड़े। इसके बावजूद उद्यानिकी का कुल क्षेत्रफल 1,349 हेक्टेयर ही बढ़ा। कुल बढ़े रकबे और नए पंजीकृत किसानों का अनुपात देखें तो प्रति नए किसान औसतन करीब 0.68 हेक्टेयर विस्तार बैठता है। जिले में वर्ष 2024-25 में उद्यानिकी फसलों का कुल रकबा 1,23,602 हेक्टेयर था, जो 2025-26 में बढ़कर 1,24,951 हेक्टेयर हो गया। विभाग की ओर से योजनाओं के तहत एक लाख से ज्यादा फलदार और अन्य प्रजातियों के पौधे किसानों को दिए गए। पौधरोपण भी हुआ, लेकिन इसका असर प्रमुख उद्यानिकी फसलों के रकबे में अपेक्षाकृत धीमा दिखाई दे रहा है।
आंकड़ों के अनुसार फलदार फसलों का क्षेत्रफल करीब 300 हेक्टेयर बढ़ा है। औषधीय फसलों का क्षेत्रफल 21 हेक्टेयर बढ़ा है। मसाला फसलों में जरूर 723 हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। यानी उद्यानिकी क्षेत्र के विस्तार में मसाला फसलों की हिस्सेदारी अधिक रही, जबकि फल, फूल और औषधीय फसलों का विस्तार अपेक्षाकृत सीमित रहा।
पंजीकृत किसानों की संख्या में 22 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इसके मुकाबले कुल उद्यानिकी रकबा करीब एक प्रतिशत की दर से बढ़ा। इससे यह सवाल उठता है कि नए किसान उद्यानिकी से किस स्तर पर जुड़ रहे हैं और योजनाओं का वास्तविक विस्तार खेतों में कितना हो रहा है। केवल पौधे वितरण और पंजीयन बढ़ने से उद्यानिकी का क्षेत्रफल तेजी से बढ़ना जरूरी नहीं है। पौधों के जीवित रहने, उत्पादन शुरू होने और किसान द्वारा फसल बदलने में समय भी लगता है।
विभाग अपनी उपलब्धि गिनाने के लिए जिस 1.24 लाख हेक्टेयर के बड़े आंकड़े का ढोल पीटता है, उसकी असली कहानी कुछ और ही है। जिले में मसालों का रकबा सबसे ज्यादा (72,368 हेक्टेयर) है, लेकिन इसमें से बड़ा हिस्सा पारंपरिक धनिया की खेती का है, जिसे किसान अपने स्तर पर करते हैं। यदि आंकड़े से धनिये को हटा दिया जाए, तो जिले में वास्तविक उद्यानिकी खेती महज 50 हजार हेक्टेयर पर सिमट कर रह जाती है। फूलों की खेती की स्थिति तो और भी दयनीय है। पिछले दो सालों में जिले में फूलों का रकबा महज 6 हेक्टेयर बढ़ा है, जो यह साबित करता है कि विभाग किसानों को नई और मुनाफे वाली फसलों की ओर मोड़ने में पूरी तरह नाकाम रहा है।
फसल---------2024-25------2025-26---------------वृद्धि
-फल------------27031---------------27331----------300
-फूल-------------505----------------511-------------6
-मसाले-----------71645------------72368---------723
-औषधीय---------1298--------------1319-----------21
-कुल रकबा--------123602------124951--------1349
-कुल पंजीकृत किसान---8727----10723------1996
-कुल लाभांवित किसान---3478 (वर्ष-2024-25 में)
राजगढ़ उद्यानिकी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वीएस मीणा का कहना है कि, जिले में उद्यानिकी का रकबा लगातार बढ़ रहा है। योजनाओं का लाभ भी किसानों को मिलता है। अभी औषधीय फसलों में भी किसान रुचि ले रहे हैं। स्टार्टअप भी शुरू किए हैं। किसानों की संख्या भी इस बार बढ़ी है।
Updated on:
21 Sept 2026 09:05 pm
Published on:
21 Sept 2026 09:05 pm
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