
आदिवासी की 9 एकड़ जमीन दूसरे के नाम (Photo Source- Patrika Create)
Govt Land Fraud: सरगुजा में जमीन के पुराने रिकॉर्ड यानी अधिकार अभिलेख और मिसल दस्तावेजों में कथित छेड़छाड़ कर सरकारी और निजी जमीनों को दूसरे लोगों के नाम कराने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि भूमाफियाओं ने सरकारी तंत्र के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर पुराने दस्तावेजों में ओवरराइटिंग और नामों में बदलाव कराया। इसके बाद इन जमीनों की रजिस्ट्री तक करा दी गई। इस पूरे मामले को भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे ने दस्तावेजों के साथ उठाया है। उन्होंने कलेक्टर समेत वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत कर पूरे मामले की जांच कराने और कथित सिंडिकेट में शामिल लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत और सामने आए दस्तावेजों के आधार पर मैनपाट के केसरा गांव का मामला भी जांच के घेरे में है। यहां खसरा नंबर 1378 की करीब 3.46 हेक्टेयर सरकारी जमीन के पुराने रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ की बात सामने आई है। बताया गया है कि 1954-55 के मूल अधिकार अभिलेख में इस खसरा नंबर को विजय सिंह के नाम दर्ज किया गया, जबकि आरोप है कि उस समय इस खसरा नंबर का अस्तित्व ही नहीं था। बाद में पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर जमीन का नामांतरण कराने की कोशिश किए जाने की बात सामने आई है।
इस मामले में उम्र को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। 2024 के रजिस्ट्री दस्तावेज में विजय सिंह की उम्र 79 वर्ष दर्ज है। इस हिसाब से 1954 में उनकी उम्र करीब 9 वर्ष रही होगी। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब संबंधित व्यक्ति नाबालिग था, तब उसके नाम जमीन का अधिकार अभिलेख में दर्ज कैसे हुआ। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि मूल दस्तावेज में लिखावट ऊपर और नीचे अलग-अलग दिखाई देती है। इसी आधार पर दस्तावेजों की हैंडराइटिंग जांच कराने की मांग की गई है।
जमीन के पुराने रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए सरगुजा में रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर पहले भी सख्ती की गई थी। जनवरी 2024 से जिले में पदस्थ रहे तत्कालीन कलेक्टर संदीपन भोस्कर ने मूल अधिकार अभिलेख के रिकॉर्ड रूम को सील रखने की व्यवस्था की थी। बताया गया कि रिकॉर्ड रूम की चाबी कलेक्टर अपने पास रखते थे और कार्यालय पहुंचने के बाद ही कर्मचारियों को चाबी दी जाती थी। इस व्यवस्था के बाद 2024 से 2026 के बीच अधिकार अभिलेख में छेड़छाड़ का कोई मामला सामने नहीं आने का दावा किया गया है।
लुंड्रा क्षेत्र के दर्रीडीह में भी जमीन के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर का मामला सामने आया है। शिकायत के मुताबिक वर्ष 2018 में अंबिकापुर-सीतापुर मुख्य मार्ग पर चेंद्रा के पास अनुसूचित जनजाति वर्ग के भूलन उरांव की करीब 9 एकड़ जमीन के अधिकार अभिलेख में छेड़छाड़ की गई। आरोप है कि मिलते-जुलते नाम का फायदा उठाकर अब्दुल सत्तर पिता भूलन मियां के नाम जमीन दर्ज करा दी गई। मामले में अनुसूचित जनजाति की जमीन के हस्तांतरण से जुड़े नियमों को लेकर भी सवाल उठे हैं। वर्ष 2024 में शिकायत के बाद हुई जांच में कथित गड़बड़ी सामने आने की बात कही गई। इसके बाद जमीन को शासकीय मद में दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ग्राम पंचायत दरिमा में खसरा नंबर 1322/2 की करीब 2.20 हेक्टेयर जमीन के पुराने रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ का मामला भी शिकायत में शामिल है। आरोप है कि हल्का पटवारी नंबर 14 के 1954-55 के अधिकार अभिलेख में बदलाव कर आजाद इराकी ने गिल्ली पिता धनसाय चिकवा की करीब 5.50 एकड़ जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। बताया गया है कि यह जमीन सिंहदेव योजना के तहत वर्ष 1968 में गिल्ली को शासकीय पट्टे के रूप में मिली थी। शिकायत के मुताबिक जमीन को पुराने अधिकार अभिलेख में दर्ज कराने के बाद आगे रमाशंकर सिंह के नाम रजिस्ट्री कराई गई।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जमीन के हस्तांतरण के लिए जरूरी अनुमति की प्रक्रिया से बचने के उद्देश्य से पुराने अधिकार अभिलेख में ही जमीन का रिकॉर्ड बदलने की कोशिश की गई। इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री कराने का रास्ता तैयार किया गया। अगर पुराने रिकॉर्ड में जानबूझकर बदलाव की पुष्टि होती है तो मामला सिर्फ जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी दस्तावेजों में कूटरचना और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की जांच का विषय बन सकता है।
भाजपा नेता और पार्षद आलोक दुबे का दावा है कि जमीन के मूल दस्तावेजों में छेड़छाड़ का सिलसिला वर्ष 2016 से चल रहा है। उनके मुताबिक 2022-23 तक ऐसे सैकड़ों दस्तावेजों में गड़बड़ी की गई हो सकती है।उन्होंने पूरे रिकॉर्ड की जांच हैंडराइटिंग एक्सपर्ट से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुराने मूल दस्तावेजों और बाद में किए गए बदलावों की विशेषज्ञ जांच से कथित सिंडिकेट की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है।
सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने कहा है कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों का डिजिटलीकरण किया जाना है। गणना का काम पूरा होने के बाद पुराने दस्तावेजों को डिजिटल रिकॉर्ड में कन्वर्ट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि पुराने दस्तावेजों में कूटरचना या छेड़छाड़ की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सरगुजा में सामने आए इन मामलों ने पुराने राजस्व रिकॉर्ड की सुरक्षा और जमीनों के दस्तावेजी सत्यापन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल कई मामलों में आरोपों की जांच होना बाकी है। लेकिन यदि दस्तावेजों की विशेषज्ञ जांच में ओवरराइटिंग और रिकॉर्ड में जानबूझकर बदलाव की पुष्टि होती है, तो सरकारी और आदिवासी जमीनों से जुड़े बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
Updated on:
07 Oct 2026 05:24 pm
Published on:
07 Oct 2026 05:24 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
