
बेनजीर भुट्टो (Benazir Bhutto)। फोटो-IANS
Benazir Bhutto Arrest News on Radio India: भारत में रेडियो पर प्रसारित एक खबर ने पूरे पाकिस्तान में खलबली मचा दी। कई शहरों में विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए और ल्यारी में दंगे भड़क गए। भारी संख्या में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। कराची के 70 क्लिफ्टन के बाहर पत्रकारों की भीड़ जमा हो गई। ये बेनजीर भुट्टो का निवास था। हर कोई जानना चाहता था कि रेडियो पर आई खबर में कितनी सच्चाई है। उन दिनों पाकिस्तान में तानाशाह मोहम्मद जिया-उल-हक का शासन था और कोई भी खबर आसानी से बाहर नहीं आती थी। इसलिए भारतीय रेडियो की खबर को नजरंदाज नहीं किया जा सकता था। हर गुजरते पल के साथ बेचैनी बढ़ रही थी, फिर जैसे ही बेनजीर सामने आईं समर्थकों ने राहत की सांस ली।
जनरल जिया-उल-हक ने 1977 में तख्तापलट कर बेनजीर के पिता और उस समय के प्रधानमंत्रीजुल्फिकार अली भुट्टोकी सरकार को गिरा दिया और उन्हें जेल में डाल दिया। फिर 1979 में अचानक एक दिन उन्हें फांसी पर लटका दिया गया। इसके बाद बेनजीर ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) की कमान संभाली। बेनजीर जिया-उल-हक को सत्ता से उखाड़कर पाकिस्तान में संविधान से चलने वाली सरकार की स्थापना चाहती थीं। उन्होंने जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने का काम शुरू किया। पूरे मुल्क में घूम-घूमकर रेलियां कीं, जनता का विश्वास जीता। सैन्य शासन में महिलाओं पर तमाम पाबंदियां लगाई हुई थीं। बेनजीर ने महिलाओं को ‘आजादी’ का वादा किया। बेनजीर को मिल रही लोकप्रियता से जिया-उल-हक घबरा गया। उसने बेनजीर पर दबाव बनाने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपनाना शुरू कर दिया।
बेनजीर भुट्टोकी आत्मकथा डॉटर ऑफ डेस्टनी (Daughter Of Destiny) में लिखा है, 13 अगस्त, 1986 को मुझे फैसलाबाद में PPP की मीटिंग में शामिल होने जाना था। जैसे ही मैं कराची हवाईअड्डे पहुंची, पुलिस ने मुझे रोक लिया। मुझसे कहा गया, ‘हमें आपको पंजाब से दूर रखने का आदेश मिला है। लेकिन अगर आप जाना चाहें, तो जा सकती हैं’। मुझे समझते देर नहीं लगी कि ये सरकार की चाल है। पुलिसकर्मी मुझे आदेश के बावजूद पंजाब जाने के लिए उकसा रहे हैं ताकि बाद में वे कह सकें कि मैंने गड़बड़ की, जबकि वे इसे रोकने की कोशिश कर रहे थे। मैंने उनके इस खेल में शामिल होने से इनकार कर दिया। मैंने एयरपोर्ट पर अपने साथ मौजूद PPP सदस्यों से जल्दी-जल्दी सलाह-मशविरा किया। मुझे यकीन था कि मुझे 70 क्लिफ्टन वापस पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मैंने PPP के साथियों से कहा कि अगर मैं गिरफ्तार हो जाऊं, तो वे देश के अलग-अलग हिस्सों में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बनाए रखें।
हालांकि, जब बेनजीर अपने घर यानी 70 क्लिफ्टन पहुंचीं, तो वहां पुलिस नहीं थी और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया। बल्कि इसके बजाए सरकार उनकी पार्टी के नेताओं को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया गया। जिया-उल-हक बेनजीर भुट्टो को हाथ लगाए बिना उन्हें कमजोर करना चाहते थे और पार्टी नेताओं पर एक्शन उसी योजना का हिस्सा था। लेकिन इस बीच, रेडियो इंडिया पर प्रसारित एक खबर ने पूरे पाकिस्तान में भूचाल ला दिया। रेडियो पर खबर आई कि पुलिस ने बेनजीर भुट्टो को गिरफ्तार कर लिया है।
ये खबर जंगल में आग की तरह फैली, बेनजीर के फोन की घंटी लगातार बज रही थी। उनकी गिरफ्तारी के विरोध में ल्यारी में दंगे शुरू हो गए। फैसलाबाद एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए जमा भीड़ पर पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और लाठियां भी चलाईं। अपनी किताब में बेनजीर ने लिखा है, मैं पुलिस का इंतज़ार करती रही, लेकिन कोई नहीं आया। इस बीच, PPP के बाकी सभी नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा। पहली बार, वे सब अंदर थे और मैं बाहर। सरकार मुझे छुए बिना पार्टी को कमज़ोर करना चाहती है ताकि दुनिया, खासकर अमेरिका में बदनामी से बच सके, जहां नए मदद पैकेज पर वोटिंग होनी है।
14 अगस्त, 1986 को क्लिफ्टन इलाके में हजारों की तादाद में PPP समर्थक पहुंचते हैं, नारेबाजी होती है। जिया उल हक इस समय मुल्क से बाहर सऊदी अरब थे। उन्हें स्थिति से अवगत कराया जाता है और पूछा जाता है कि बेनजीर का क्या करना है, जवाब मिलता है–गिरफ्तार कर लो। हालांकि, पीपीपी समर्थकों की भीड़ देखकर पुलिस बेनजीर को गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाती। क्लिफ्टन इलाके में कई राजनयिक भी रहते थे और पुलिस नहीं चाहती थी कि नाराज भीड़ अपना गुस्सा दूतावासों को जलाकर निकाले।
इसलिए वह खामोश बनी रहती है। लेकिन जब बेनजीर समर्थकों के साथ ल्यारी के लिए निकलती हैं, तो पुलिस उन्हें रोकने की कोशिश करती है, आंसू गैस के गोले दागती है। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है। पीपीपी उनकी गिरफ़्तारी को हाई कोर्ट में चुनौती देती है। 10 सितंबर को अदालत में होने वाले सुनवाई से पहले बेनजीर को रिहा कर दिया जाता है। इसके बाद जिया सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होते हैं। 1988 में बेनजीर भुट्टो की पार्टी चुनाव में जीत हासिल करती है और वह पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनती हैं।
इस तरह, रेडियो इंडिया पर प्रसारित एक खबर ने एक तरह से बेनजीर भुट्टो के समर्थकों को एकजुट करने का काम किया। जिया उल हक को भी यह समझ आ गया कि अगर बेनजीर को कुछ होता है, तो हालात कितने खराब हो सकते हैं।
Updated on:
22 Sept 2026 02:43 pm
Published on:
22 Sept 2026 02:36 pm
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