
जनमत संग्रह की मांग करते लोग (फोटो- X post/ @JSFMOfficialOrg)
Pakistan News: जेनेवा में सुयुक्त राष्ट्र (United Nations) के मुख्यालय के बाहर जीय सिंध फ्रीडम मूवमेंट (Jeay Sindh Freedom Movement) द्वारा एक प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान पर आरोप लगाए कि सिंध, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, सराइकी वसेब और गिलगित-बल्टिस्तान के लोगों को राजनीतिक, आर्थिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए संगठन ने सिंध और पाकिस्तान के कई अन्य क्षेत्रों में आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में जनमत संग्रह कराने की मांग की। इस प्रदर्शन को जीय सिंध फ्रीडम मूवमेंट के चेयरमैन सोहेल अब्रो और 'वॉइस फॉर मिसिंग पर्सन्स ऑफ सिंध' के यूरोप चैप्टर के समन्यवक सारंग हैदर ने लीड किया।
संगठन के चैयरमैन अब्रो ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि हम राजनीतिक, आर्थिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से पंजाबी साम्राज्यवाद के गुलाम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एनएफसी अवॉर्ड के तहत इन क्षेत्रों के लोगों से उनके संसाधनों के हिस्से से वंचित किया जा रहा है। साथ ही दावा किया कि ऐतिहासिक भूमि को नई प्रशासनिक इकाइयों में बांटने की योजनाएं बनाई जा रही हैं।
अब्रो ने जल संसाधनों को लेकर भी चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि सिंधु नदी के पानी पर नियंत्रण के लिए छह नहरों के निर्माण की योजना बनाई जा रही है। इसमें उन्होंने दावा किया कि जलालपुर नहर का निर्माण अवैध रूप से किया गया है। अब्रो ने राष्ट्रीय आत्मनिर्णय के अधिकार की मांग करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपनी देखरेख में सिंध, बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, सराइकी वसेब और गिलगित-बल्टिस्तान में जनमत संग्रह कराए। साथ ही कहा कि जनमत संग्रह के नतीजे से इन क्षेत्रों की राजनीतिक स्थिति तय होनी चाहिए और उन्हें संयुक्त राष्ट्र का स्वतंत्र सदस्य बनने की अनुमति मिलनी चाहिए।
इस बीच, सारंग हैदर ने सिंध में मानवाधिकारों के उल्लंघन और जबरन गुमशुदगी के मामलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान 3,500 से अधिक सिंधी राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं का अपहरण कर उन्हें जबरन गायब कर दिया गया है। हैदर ने आगे दावा किया कि 100 से अधिक राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई, जिनके शव बाद में बरामद हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि एयरपोर्ट, सड़कों, घरों और शैक्षणिक संस्थानों से लोगों के गायब होने के लिए राज्य की एजेंसियां जिम्मेदार हैं।
Updated on:
24 Sept 2026 03:05 pm
Published on:
24 Sept 2026 03:05 pm
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