
महिला प्रत्याशियों ने होटल में करवा चौथ की कथा सुनी और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला (पत्रिका फोटो)
Rajasthan Alwar Zila Pramukh Election 2026: अलवर जिला परिषद सदस्य के लिए हुए चुनाव के बाद अब जिला प्रमुख की कुर्सी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी की तैयारी शुरू कर दी है। बीजेपी ने बहरोड़ मार्ग स्थित एक होटल में जिला परिषद सदस्य के संभावित विजेता प्रत्याशियों को एकत्रित किया, जहां करीब 15 से 20 सदस्य पहुंचे। सभी को बाड़ाबंदी के लिए तैयार रहने और पार्टी के निर्देशों का पालन करने को कहा गया।
बीजेपी ने कुछ प्रत्याशियों को बाड़ाबंदी के लिए बाहर भी भेज दिया है। इनमें से कुछ को हवाई जहाज से गुवाहाटी भेजा गया है। वहीं, दूसरे चरण में चुनाव प्रक्रिया से शुक्रवार को फ्री होने वाले प्रत्याशियों को भी बाड़ाबंदी में शामिल किया जाएगा। कांग्रेस के नेताओं ने भी जिला पार्षद प्रत्याशियों के साथ बैठक कर रणनीति पर चर्चा की। प्रत्याशियों को अगले दो से तीन दिन में बाड़ाबंदी के लिए तैयार रहने का संदेश दिया गया है।
कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा कि पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को पार्टी के प्रति निष्ठा बनाए रखनी होगी और किसी के बहकावे में नहीं आना है। नेताओं ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति अनावश्यक दबाव बनाने की कोशिश करता है, तो इसकी सूचना तुरंत पार्टी नेतृत्व को दें। अलवर जिले में जिला परिषद सदस्य पद के संभावित विजेता प्रत्याशियों की बीजेपी ने असम के गुवाहाटी स्थित एक होटल में बाड़ाबंदी की है। महिला प्रत्याशियों ने गुरुवार को होटल में करवा चौथ की कथा सुनी और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला।
बानसूर में जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य पद के लिए मतदान हो चुका है। कांग्रेस के नेताओं ने संभावित विजेता प्रत्याशियों की कोटपूतली-जयपुर हाईवे स्थित एक होटल में बाड़ाबंदी की है। इनमें कई महिला प्रत्याशी भी हैं। इन महिला प्रत्याशियों ने गुरुवार को इसी होटल में करवा चौथ का व्रत रखा। पूर्व मंत्री शकुंतला रावत के साथ इन महिलाओं ने कथा सुनी और चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला।
करवा चौथ का त्योहार हो और पति-पत्नी साथ न हों, तो इस पर्व की रौनक कुछ फीकी पड़ जाती है, लेकिन जब जिम्मेदारी सरकारी ड्यूटी की हो, तो त्योहार से पहले कर्तव्य निभाना जरूरी हो जाता है। ऐसा ही नजारा इस बार जिले में देखने को मिला, जहां पंचायती राज चुनाव में ड्यूटी लगाए जाने के कारण करीब आठ हजार से अधिक कर्मचारी अपने घरों से दूर रहे और उनकी पत्नियों को करवा चौथ का त्योहार पतियों के बिना ही मनाना पड़ा। गुरुवार को महिलाओं ने अपने पतियों की लंबी उम्र की कामना करते हुए पूरे विधि-विधान से व्रत रखा। महिलाओं ने वीडियो कॉल के माध्यम से अपने पतियों का चेहरा देखकर व्रत खोला।
अलवर जिले में पंचायती राज चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के लिए 27 अक्टूबर को आठ हजार से अधिक सरकारी कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर रवाना किया गया था। इन कर्मचारियों की ड्यूटी अलग-अलग पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों के मतदान केंद्रों पर लगाई गई है। मतदान दलों को पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सरपंच, पंच और उपसरपंच के चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दूसरे चरण का चुनाव बुधवार को हो गया। 30 अक्टूबर को पंच-सरपंच का चुनाव होना बाकी है। इसी के चलते कर्मचारी मतदान केंद्रों पर ही हैं। उन्हें कई दिनों तक अपने घरों से दूर रहना पड़ रहा है। चुनाव ड्यूटी के कारण इन कर्मचारियों के लिए करवा चौथ के दिन भी घर लौट पाना संभव नहीं हुआ।
पंचायत चुनाव जब भी हुए, उसके लिए चुनाव आयोग ने जनवरी-फरवरी माह तय किए, लेकिन इस बार अक्टूबर में चुनाव होने के कारण त्योहार आ गए। चुनाव आयोग ने धनतेरस के दिन भी मतदान रखा था। चारों ओर से दबाव पड़ा, तो तिथि बदलनी पड़ी, लेकिन करवा चौथ के लिए तिथियों में बदलाव नहीं हुआ। पंच-सरपंच का चुनाव आसान नहीं है। बैलेट पेपर से चुनाव होगा और फिर रात तक मतगणना चलेगी। ऐसे में कर्मचारियों को खासी मेहनत करनी पड़ेगी। 31 अक्टूबर को ये कार्मिक घर लौटेंगे।
Updated on:
30 Oct 2026, 10:34 AM IST
Published on:
30 Oct 2026, 10:34 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.