
बरेली में मांगों को लेकर सीएमओ कार्यालय पर धरने पर बैठीं आशा और एएनएम कर्मचारी।
बरेली। समान कार्य-समान वेतन, नियमितीकरण, मानदेय बढ़ाने और स्थानांतरण नीति समेत विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को धरने पर बैठीं आशा और एएनएम कर्मचारियों का विरोध गुरुवार को भी जारी रहा। बुधवार के प्रदर्शन के बाद समस्या के समाधान की उम्मीद कर रहे कर्मचारियों को सीएमओ की ओर से चेतावनी मिलने पर नाराजगी और बढ़ गई। गुरुवार सुबह कर्मचारी जिला अस्पताल स्थित सीएमओ कार्यालय के बाहर फिर धरने पर बैठ गए और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।
एएनएम कर्मचारियों ने कहा कि कई कर्मचारी करीब 11 साल से स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि महज 10 हजार रुपये के मानदेय में कई महिला कर्मचारियों की तैनाती घर से 500 से 700 किलोमीटर दूर कर दी गई है। ऐसे में कमरे का किराया, खाना और आने-जाने का खर्च उठाने के बाद मानदेय का बड़ा हिस्सा खत्म हो जाता है।
कर्मचारियों का कहना है कि संविदा एएनएम टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य समेत कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों के मुकाबले बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है। उन्होंने समान कार्य-समान वेतन लागू करने और वर्तमान मानदेय में तत्काल बढ़ोतरी की मांग की।
एनएचएम संविदा कर्मचारियों के संगठन ने मुख्यमंत्री को भेजे मांगपत्र में कहा है कि प्रदेश में एक लाख से अधिक संविदा कर्मचारी 16 से 18 साल से स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान दे रहे हैं। संगठन ने सभी एनएचएम संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और समान कार्य-समान वेतन की मांग प्रमुखता से उठाई है। इसके साथ ही रिक्त पदों पर गैर जनपद स्थानांतरण की नीति बहाल करने की मांग भी की गई है।
कर्मचारियों ने अपने और आश्रित परिवार के लिए कम से कम 10 लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा सुविधा, महंगाई भत्ता, ईपीएफ, एचआरए और ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग की है। सेवाकाल में कर्मचारी की मौत होने पर परिवार के पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने की नीति बनाने की भी मांग की गई है।
संगठन के आंदोलन कार्यक्रम के अनुसार 8, 9 और 10 अक्टूबर को जनपद मुख्यालयों पर एनएचएम संविदा कर्मचारी कार्य बहिष्कार और कार्यविराम कर विरोध दर्ज करेंगे। इसके बाद भी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर 12 अक्टूबर से प्रदेशभर के संविदा कर्मचारी लखनऊ पहुंचकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दे चुके हैं।
वहीं आशा वर्कर्स यूनियन ने लंबित मानदेय, प्रोत्साहन राशि, बीमा और अन्य मांगों को लेकर 23 अक्टूबर को लखनऊ में महापड़ाव का ऐलान किया है। यूनियन का कहना है कि फरवरी 2026 में स्वास्थ्य मंत्री और संगठन के बीच हुई वार्ता में कई मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन अब तक उन्हें लागू नहीं किया गया। आशा कर्मियों ने आयुष्मान कार्ड, आभा आईडी, पोलियो, टीबी, फाइलेरिया और अन्य अभियानों की लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने की मांग भी उठाई है।
Updated on:
08 Oct 2026 03:29 pm
Published on:
08 Oct 2026 03:29 pm
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