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#CoronaWarriors : मिलिए इन 5 कोरोना वॉरियर्स से जो हर मोड़ पर खड़े हैं आपके साथ

वैसे तो शहर में ऐसे कई कर्मवीर हैं, लेकिन पत्रिका कुछ खास लोगों के बारे में आपको बता रहा है, ये वो वॉरियर्स हैं, जो हर विपदा पर आपके साथ खड़े हैं।

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#CoronaWarriors : मिलिए इन 5 कोरोना वॉरियर्स से जो हर मोड़ पर खड़े हैं आपके साथ

भोपाल/ मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस लगातार अपने पांव पसार रहा है। इंदौर के बाद सबसे ज्यादा खराब हालात राजधानी भोपाल के हैं। शहर को सूबे का हॉटस्पॉट घोषित किया जा चुका है। शहर के हालात को देखते हुए सीएम शिवराज ने संकेत दिये हैं कि, लगता नहीं है कि 3 मई के बाद भी भोपाल समेत अन्य तीन जिलों में लॉकडाउन खुलेगा। कुल मिलाकर शहर प्रदेश के अन्य इलाकों के मुकाबले ज्यादा मुश्किल के दौर से गुजर रहा है। इस मुश्किल की घड़ी में जब लोग अपने घरों में कैद हैं। ऐसे हालात में शहर में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो अपनी जान हथेली पर लेकर लोगों की सेवा करने में जुटे हुए हैं। वैसे तो शहर में ऐसे कई कर्मवीर हैं, लेकिन पत्रिका कुछ खास लोगों के बारे में आपको बता रहा है, ये वो वॉरियर्स हैं, जो हर विपदा पर आपके साथ खड़े हैं।

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घर से दे रहे हैं राशन तो पुलिस के साथ भी देते हैं सेवा

ये बात तो हम सभी जानते हैं कि, इस समय संक्रमण से बचाव का सबसे बेहतर तरीका सोशल डिस्टेंसिंग को कायम रखना है, जिसके चलते देशभर में लॉकडाउन किया गया है। लेकिन, लॉकडाउन का बड़ा नुकसान रोजाना मज़दूरी करने वाले गरीबों को हो रहा है। ऐसे में समाज सेवा का शोख रखने वाले राजीव साहू (डब्बू) इस मुश्किल की घड़ी में बीते कई दिनों से किसी तरह राशन की व्यवस्था करके उन गरीब परिवारों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं, जिनके सामने ये लॉकडाउन आजीविका का संकट लेकर आया है। राजीव का कहना है कि, गरीबों के भोजन की व्यवस्था करके दो फायदे हैं। एक तो ये कि, वो अपना पेट भर पा रहे हैं, वहीं खाने की तलाश में घरों से बाहर निकलकर लॉकडाउन का उल्लंघन करने से भी बच रहे हैं। जिसकी वजह से वो कोरोना का शिकार भी नहीं होंगे।


समाज सेवा के शोख के ही चलते राजीव डिविजनल वार्डन सिविल डिफेंस के सदस्य भी बन गए। इसका काम होता है कि, इलाके से लेकर जिले भर में कहीं कोई विपदा आन पड़े तो ये उस विपदा के बीच लोगों की सेवा कर सकें। इसी के चलते इन दिनों वो पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर अपने थाना क्षेत्र में गश्त भी करते हैं, ताकि इलाके में लॉकडाउन की व्यवस्था बनी रहे। इस दौरान वो लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के फायदे बताकर घरों में रहने की अपील भी करते हैं। यही नहीं डिविजनल वार्डन सिविल डिफेंस के सदस्य होने के नाते वो जांच करने आने वाली डॉक्टरों की टीम के साथ मिलकर टीम को घर घर ले जाकर लोगों की जांच कराने में भी सहयोग करते हैं।

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7 माह की बच्ची को नानी के हवाले कर कोरोना संक्रमितों की सेवा में जुटे हैं डॉक्टर दंपत्ति

इस तेजी से फेल रहे संक्रमण को रोकने में डॉक्टरों का अहम योगदान है। देखा जाए तो आज कोरोना और आजजन के बीच ये चिकित्सक एक दीवार की तरह खड़े हुए हैं। अपनी जान जोखिम में डालकर अपने कर्तव्यों को बखूबी निभा रहे हैं। इसमें ये खुद भी संक्रमण का शिकार हो रहे हैं, तो कहीं इन्हें अपने परिवार को छोड़ना पड़ रहा है। बावजूद इसके ये पूरी मुस्तैदी से अपने कर्तव्य के प्रति डटे हुए हैं। भोपाल में भी ऐसी ही एक डॉक्टर दंपति है, जो कोरोना के मरीजों का उपचार करने की खातिर अपनी सात महीने की दूध पीती बच्ची को छोड़कर अपने दायित्वों को निभा रहे हैं।


बेटी की याद आती है तो वीडियो कॉल करके देख लेते हैं चेहरा

दरअसल, यह कोरोना वॉरियर्स दंपति पत्नी डॉ. अंशुली मिश्रा और उनके पति डॉ. संतोष मिश्रा हैं, जिनकी सिर्फ 7 माह की दूध पीती मासूम बच्ची है। लेकिन, शहर के बिगड़ते हालात को संभालने का दायित्व बेटी के पास रहकर उसे प्यार देने से कई ज्यादा जरूरी मानकर दोनो पति पत्नी मासूम को नानी के पास छोड़कर अपने काम में जुटे हुए हैं। बता दें कि, वैसे तो ये दोने ही चिकित्सक शहर के हमीदिया अस्पताल में कार्यरत हैं, लेकिन कोरोना रोकथाम के मरीजों के लिए इनकी ड्यूटी शहर के जेपी अस्पताल में लगाई गई है।जहां ये पति-पत्नी 24 घंटे कोरोना संक्रमितों के इलाज में जुटे हुए हैं।

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लॉकडाउन के चलते परिवार नहीं आ सका तो तहसीलदार ने किया कोरोना संक्रमित का अंतिम संस्कार

भोपाल के बैरागढ़ सर्किल में पदस्त तहसीलदार गुलाब सिंह बघेल इन दिनों कोरोना संट से बचाने के कार्य में दिन रात ड्यूटी पर तैनात हैं। व्यवस्थाओं को चाकचौबंद रखने और लोगों से लॉकडाउन का पालन करा सकें। इसी बीच शहर के एक निजी अस्पताल से उन्हें सूचना मिली कि, शुजालपुर निवासी एक शख्स की कोरोना के कारण अस्पताल में मृत्यु हो गई है। जिनका शव बीते दो दिनों से अस्पताल में रखा है। उनका परिवार लॉकडाउन के कारण भोपाल आने में असमर्थ है। कुछ व्यवस्था कीजिए।


शव को खुद ही दी मुखाग्नि

हसीलदार ने तुरंत मृतक के परिवार से संपर्क किया और आकर पिता का अंतिम संस्कार करने की अपील की। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो मृतक के परिवार ने संक्रमण के डर के चलते पिता का अंतिम संसकार करने भोपाल आने से इंकार कर दिया। ऐसे में मंगलवार को तहसीलदार गुलाब सिंह बघेल ने ख़ुद पूरे विधि-विधान के साथ शव का अंतिम संस्कार किया। साथ ही, अस्पताल के कर्मचारियों के साथ मिलकर शव को मुखाग्नि भी दी। तहसीलदार ने बताया कि, ये काम मेने किसी वाहवाही के लिए नहीं किया। इस काम को करने का उद्देश्य ये है कि, हम इतनी मुश्किल घड़ी में भी मृतक के सम्मान का आदर करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।


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देश सेवा करने के लिए छोड़ा परिवार

जैसा कि, मेने पहले बताया कि, चिकित्सक संक्रमण को आमजन के बीच एक दीवार की तरह है, ठीक वैसे ही देश की पुलिस भी संक्रमण और लोगों के बीच एक दीवार के समान खड़ी है। बाहर रहकर लोगों को संक्रमण से बचाने के कारण कई बार खुद पुलिसकर्मी भी इसका शिकार हो रहे हैं। प्रदेश में अब तक 31 पुलिसकर्मी कोरोना का शिकार हो चुके हैं। इनमें से 2 अपनी जान भी गंवा चुके हैं। ऐसी परिस्थियों में भी अपनी जान की परवाह किये बिना ये पुलिस के जवान बड़ी मुस्तैदी के साथ अपनी जिम्मदारी निभाने में जुटे हुए हैं। इन्ही कोरोना वॉरियर्स में से एक भोपाल पुलिस के सीएसपी लोकेश सिन्हा भी हैं, जो दिन-रात अपनी ड्यूटी तो कर ही रहे हैं, घर आने के बावजूद सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए अपने परिवार से भी दूर बीते 25 दिनों से घर के गैराज में रह रहे हैं।


घर के बाहर गैराज में रह रहे हैं CSP

लोकेश सिन्हा ने बताया कि, 'जब देश में कोरोनोवायरस के मामले सामने आने लगे थे, तब मध्य प्रदेश में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम चल रहा थास जिसके चलते उनकी तैनाती भोपाल हवाई अड्डे पर थी। मुझे इस बात की जानकारी भी थी कि, उस समय ज्यादातर मामले हवाई अड्डों से आ रहे थे। ऐसी स्थिति में मैंने सोचा कि, ड्यूटी करते हुए अगर मैं संक्रमित हो भी गया तो, कोई गम नहीं देश सेवा ज्यादा जरूरी है। लेकिन मेरे घर में पत्नी और बच्चों को मेरी वजह से संक्रमण न लग जाए, इसलिए लॉकडाउन की घोषणा होने से पहले ही मैं अपनी जरूरत की चीजों के साथ गैरेज में शिफ्ट हो गया था।' यानी साफ है कि इस योद्धा को अपने परिवार, अपनी जान की परवाह नहीं थी, परवाह थी तो आमजन की, जिनकी सेवा करने के लिए आज भी वो अपने तय इलाके पर तैनात हैं और परिवार से भी दूर हैं।

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शहर रोशन रहे इसलिए 6 माह की बेटी को गोद में लेकर ड्यूटी कर रही मां

कोरोना काल के बीच जहां एक तरफ लोग अपने घरों में रह रहे हैं, ताकि वो खुद को और उनके परिवार को सुरक्षित रख सकें। ऐसे में कई लोग वो भी हैं, जो जरूरी सेवाओं से जुड़े होने के कारण अपना काम करने के लिए घरों से बाहर हैं। इन जरूरी सेवाओं में लोगों के घर तक पहुंचने वाली बिजली भी आती है। बिजली की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहे, इसके लिए वहां के कर्मचारी चौबीसों घंटे कार्यरत हैं। इन्ही में से भोपाल के बिजली घर में एक कर्मचारी ऐसी भी हैं, जो अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए रोजाना ड्यूटी पर अपनी छह माह की बेटी को गोद में लेकर ड्यूटी पर आ रही हैं।


विभाग में कोरोना वॉरियर के नाम से चर्चित

भोपाल के कोलार सब-स्टेशन में बेटी को गोद में लेकर ड्यूटी करने वाली महिला कर्मचारी का नाम प्रगति तायड़े है। प्रगति सब स्टेशन में टेस्टिंग ऑपरेटर के रूप में पदस्थ है। इन्हें विभाग का सबसे बड़ा कोरोना वॉरियर कहते हैं। सुबह आठ बजे से लेकर शाम चार बजे तक प्रगति ड्यूटी पर डटी रहती है। इस दौरान मां-बेटी के चेहरे पर मास्क होता है और मां अपनी बेटी को साथ लेकर अपने पूरे काम निपटाती हैं।

कर्तव्य को निभा रही हूं

प्रगति ने बताया कि, जिस तरह देश के डॉक्टर, पुलिसकर्मी और अन्य कई समाज सेवक कोरोना काल के दौरान अपनी जान की परवाह किये बिना कई कुर्बानियां देकर भी अपने दायित्वों से पीछे नहीं हट रहे हैं, तो मैं क्यों पीछे रहूं। मेरा काम भी तो काफी जिम्मेदारी का है। ऐसे में मैं कैसे घर बैठ सकती हूं। इस गर्मी के मौसम में लॉक डाउन के दौरान घर रुके लोगों की किसी प्रकार की कोई दिक्कत ना हो। इसलिए मैं ड्यूटी पर जाती हूं।