
रिटायर्ड आइएएस राकेश अग्रवाल केस ने भोपाल के अधिकारियों की नींद उड़ाई (फोटो सोर्स - Patrika)
Retired IAS Rakesh Agrawal : राजधानी भोपाल में रिटायर्ड आइएएस अफसर राकेश अग्रवाल की हत्या ने हर किसी को झकझोर दिया है। इस हाईप्रोफाइल मामले ने पुलिस की प्रतिष्ठा पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। आरोपी केयर टेकर वरुण 3 दिन बाद भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका है। सीएम मोहन यादव भी मामले में शोक जता चुके हैं। पुलिस के लिए चुनौती बढ़ गई है। ऐसे में भोपाल पुलिस के 18 अफसरों को जांच में जुटाया गया है। ये सभी अधिकारी दिन रात पड़ताल करने में लगे हुए हैं।
रातीबड़ स्थित सूरजनगर में रिटायर्ड आइएएस अफसर राकेश अग्रवाल अपने निवास पर ही मृत पाए गए थे। पुलिस का शक पंजाब के केयर टेकर वरुण कुमार पर है जोकि लाखों के रुपए जेवर, नकदी के साथ ही मोबाइल लेकर भागा है।
रिटायर्ड आइएएस राकेश अग्रवाल के साथ मंगलवार रात को यह वारदात हुई थी। जांच अधिकारियों के सामने यह सवाल है कि आरोपी का लूट का इरादा था तो फिर हत्या किन कारणों में हुई? नौकरी के दूसरे ही दिन केयरटेकर ने बेरहमी से हत्या क्यों की? जेवर-नकदी के साथ अफसर का मोबाइल लेकर क्यों भागा? केयरटेकर का चरित्र प्रमाण-पत्र 5 माह पहले से एक्सपायर था, फिर भी एजेंसी ने नौकरी पर कैसे भेजा?
पुलिस का कहना है कि हत्या के खुलासे के बाद केयरटेकर के रूप में वरुण कुमार को नौकरी पर रखवाने वाली एजेंसी वर्मा होम हेल्थ केयर सेंटर की भूमिका भी संदिग्ध है। बाग सेवनिया थाना के विश्वकर्मा नगर में चल रही यह एजेंसी के कर्ताधर्ता भी फरार हैं। दो कमरों में चल रही एजेंसी बंद कर दी गई है।
आरोपी वरुण का चरित्र प्रमाण-पत्र पहले ही एक्सपायर हो चुका था। उसने वर्मा होम हेल्थ केयर एजेंसी को नौकरी के लिए जो पंजाब पुलिस का चरित्र प्रमाण पत्र दिया, वह 2025 में जारी हुआ था। इसकी वैधता एक साल होती है। यह 5 माह पहले ही एक्सपायर हो गया था। इसके बाद भी एजेंसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
एजेंसी को वरुण के प्रमाण- पत्र का दोबारा सत्यापन कराना था। एजेंसी ने न तो पुलिस को इसकी जानकारी दी और न ही सत्यापन कराया।
राजधानी में एक वरिष्ठ पूर्व अधिकारी के साथ हुई वारदात से पुलिस की चुनौती बढ़ गई है। केयरटेकर वरुण को अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। एडीसीपी शैलेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि उसकी तलाश में पांच टीमें लगी हैं। टीमें पंजाब, यूपी, दिल्ली भेजी हैं। जांच में डीसीपी, दो एडीसीपी, 3 एसीपी, 12 टीआइ और 100 पुलिसकर्मियों को लगाया है। रिटायर्ड आइएएस के कई लोगों से लेन-देन की जानकारी मिली है, इस एंगल से भी जांच की जा रही है।
Updated on:
02 Oct 2026 07:41 am
Published on:
02 Oct 2026 07:41 am
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