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खुद को बताया रजिस्ट्रार जनरल का गनमैन, बिलासपुर हाईकोर्ट में नौकरी का झांसा देकर लिए 16 लाख रुपए

High Court Job Scam: बिलासपुर में हाई कोर्ट में नौकरी दिलाने के नाम पर 16 लाख रुपए की ठगी के आरोपित आरक्षक डोमन कुमार पाटिल की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी।
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High Court Job Fraud

नौकरी के नाम पर 16 लाख की धोखाधड़ी का आरोप (Photo Source- Patrika File Photo)

High Court Job Fraud: बिलासपुर में हाई कोर्ट में नौकरी लगवाने के नाम पर 16 लाख रुपए की धोखाधड़ी के आरोप से जुड़े मामले में अदालत ने आरक्षक डोमन कुमार पाटिल की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अपर सत्र न्यायाधीश एवं प्रथम फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय, बिलासपुर की न्यायाधीश पूजा जायसवाल ने मामले की सुनवाई के बाद जमानत आवेदन निरस्त किया।

आरोपित आरक्षक सकरी बटालियन में पदस्थ था। उस पर आरोप है कि उसने हाई कोर्ट के अधिकारियों से अपनी पहचान बताकर लोगों को नौकरी दिलाने का भरोसा दिया और इसके बदले रकम ली। अदालत ने मामले की गंभीरता और साक्षियों के बयान अभी दर्ज नहीं होने समेत अन्य परिस्थितियों को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया।

Constable Fraud Case: खुद को रजिस्ट्रार जनरल का गनमैन बताने का आरोप

मामले के अनुसार शिकायतकर्ता मोहम्मद शाबाज खान ने वर्ष 2023-24 में हाई कोर्ट में सहायक ग्रेड-3 पद के लिए आवेदन किया था। इसी दौरान सकरी बटालियन में आने-जाने के दौरान उसकी पहचान आरक्षक डोमन कुमार पाटिल से हुई। शिकायत के मुताबिक डोमन ने हाई कोर्ट के बड़े अधिकारियों से अपनी पहचान होने की बात कही। उसने खुद को रजिस्ट्रार जनरल का गनमैन बताते हुए शाबाज को हाई कोर्ट में नौकरी लगवाने का भरोसा दिया।

नौकरी के लिए मांगे आठ लाख रुपए

आरोप है कि डोमन ने नौकरी लगवाने के बदले आठ लाख रुपए की मांग की और चार लाख रुपए एडवांस देने को कहा। शिकायतकर्ता ने अपनी भाभी साजिया नाज के बैंक खाते से 2 अप्रैल 2024 को चार लाख रुपए और 9 अप्रैल को दो लाख रुपए डोमन के एक्सिस बैंक खाते में ट्रांसफर किए। इसके बाद परीक्षा में नौकरी नहीं लगने पर शिकायतकर्ता ने अपनी रकम वापस मांगी। आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय डोमन लगातार टालमटोल करता रहा।

अन्य दो लोगों से भी रकम लेने का आरोप

मामले की जांच के दौरान अन्य लोगों के नाम भी सामने आए। मनीष कौशिक और विकास कुमार कौशिक ने भी आरोप लगाया कि उनसे हाई कोर्ट में नौकरी लगवाने के नाम पर पांच-पांच लाख रुपए लिए गए थे। इस तरह तीन लोगों से कुल 16 लाख रुपए लेने का आरोप आरक्षक डोमन कुमार पाटिल पर लगाया गया है।पुलिस ने मामले में पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत अपराध दर्ज किया था। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने डोमन को 7 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया और अदालत में चालान पेश किया।

जमानत के विरोध में अभियोजन ने रखे तर्क

जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से आरोपित को राहत देने की मांग की गई। बचाव पक्ष ने मामले को उधार की रकम से जुड़ा विवाद बताया और यह तर्क रखा कि आरोपित का कोई आपराधिक पूर्व इतिहास नहीं है। वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध किया। अभियोजन की ओर से मामले की गंभीरता, बैंक खातों में हुए लेन-देन और साक्षियों के बयान अभी दर्ज नहीं होने की स्थिति को अदालत के सामने रखा गया।

Bilaspur Court News: साक्षियों को प्रभावित किए जाने की आशंका

अदालत ने मामले के रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। कोर्ट ने माना कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। पुलिस की ओर से आरोपपत्र पेश किया जा चुका है, लेकिन अभी मामले के किसी भी साक्षी का बयान दर्ज नहीं हुआ है। अदालत ने कहा कि इस स्थिति में जमानत दिए जाने पर साक्षियों को प्रभावित किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रिकॉर्ड में बैंक खाते के जरिए रकम के लेन-देन और आरोपित की प्रथम दृष्टया संलिप्तता को देखते हुए कोर्ट ने जमानत आवेदन स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने धारा 483 के तहत जमानत आवेदन किया निरस्त

अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के तहत प्रस्तुत जमानत आवेदन को निरस्त कर दिया। इस फैसले के बाद नौकरी के नाम पर कथित 16 लाख रुपए की धोखाधड़ी से जुड़े मामले में आरोपी आरक्षक को फिलहाल जमानत नहीं मिली है। अब मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया में साक्षियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण की सुनवाई आगे बढ़ेगी। अदालत के समक्ष पेश किए गए आरोप और दस्तावेजों के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय होगी।

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