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पितरों की मुक्ति का खास दिन, इंदिरा एकादशी पर ऐसे करें श्रीहरि की पूजा, जानें व्रत से पारण तक पूरी विधि

Indira Ekadashi 2026: पितृ पक्ष की इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी। पितरों की सद्गति और शांति के लिए यह दिन खास माना जाता है। विष्णु मंदिरों में विशेष पूजा-अनुष्ठान होंगे।
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भारत

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Akash Dewani

•

Oct 05, 2026

indira ekadashi 2026 date puja vidhi pitru paksha vrat paran time

Indira Ekadashi 2026: ज्योतिषाचार्य से जाने इंदिरा एकादशी पर ऐसे करें श्रीहरि की पूजा (फोटो सोर्स- Magnific)

Indira Ekadashi vrat:पितृ पक्ष में आने वाली एकादशी को सनातन परंपरा में विशेष फलदायी माना गया है। आश्विन कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी मंगलवार 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और पितरों का स्मरण करने से पूर्वजों को सद्गति मिलती है और व्रती को भी पुण्य फल की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि पितृ पक्ष के दौरान आने वाली इस एकादशी का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।

ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन के अनुसार, वर्षभर में 24 एकादशी आती हैं और प्रत्येक एकादशी का अपना अलग धार्मिक महत्व है। इनमें इंदिरा एकादशी पितरों की शांति और सद्गति के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों का स्मरण कर उनके निमित्त प्रार्थना, तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। शहर के विष्णु मंदिरों में विष्णु सहस्रनाम पाठ के साथ खाटू श्याम मंदिरों में भी विशेष कार्यक्रम किए जाएंगे।

इस एकादशी का पितृ पक्ष में होना सबसे खास

इंदिरा एकादशी की सबसे खास बात इसका पितृ पक्ष में होना है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करने से उन्हें सद्गति प्राप्त होती है। इसलिए जिन परिवारों में पितृ पक्ष के श्राद्ध चल रहे हैं, वहां इस एकादशी को विशेष श्रद्धा और विधि-विधान से मनाया जाता है। डॉ. जैन के अनुसार, यदि इस दिन किसी पितृ का श्रद्ध हो तो श्रद्ध-विधि और एकादशी व्रत के नियमों का समन्वय करते हुए धार्मिक परंपरा का पालन करना चाहिए।

पितरों के नाम समर्पित भक्ति

इंदिरा एकादशी पर व्रती को दशमी तिथि से ही सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए। रात में हल्का भोजन करना उचित माना जाता है। एकादशी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान विष्णु अथवा श्रीहरि का पूजन कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। सामर्थ्य के अनुसार निर्जल व्रत रखा जा सकता है। ऐसा संभव न हो तो जल, फल या दूध का सेवन कर व्रत रखा जाता है। इस दिन चावल, गेहूं, दाल, अनाज और सामान्य नमक आदि के सेवन से बचने की धार्मिक परंपरा है। भगवान विष्णु के मंत्र, विष्णु सहस्रनाम अथवा 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप विशेष पुण्यदायी माना गया है।

7 अक्टूबर को होगा व्रत का पारण

इंदिरा एकादशी व्रत का पारण अगले दिन 7 अक्टूबर को द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद किया जाएगा। पारण प्रातः 6.18 बजे से 8.38 बजे तक किया जा सकेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पारण से पहले भगवान विष्णु को भोग लगाकर जल, फल आदि ग्रहण करना शुभ माना जाता है। इंदिरा एकादशी का संदेश यही है-श्रीहरि की भक्ति के साथ पितरों का स्मरण श्रद्धा से किया गया ऐसा संकल्प है, जिसमें परिवार की आस्था, पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता और सद्गति की कामना एक साथ जुड़ जाती है।