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रियल लाइफ ही नहीं, रील लाइफ में भी अधूरी रही अमिताभ-रेखा की लव स्टोरी, फिल्मों में भी मिला जुदाई का दर्द

Amitabh Bachchan Rekha Love Story: अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर जानिए रेखा के साथ उनकी कुछ ऐसी फिल्मों की कहानियां, जिनमें प्यार, एकतरफा मोहब्बत और जुदाई के अलग-अलग रंग देखने को मिले।
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मुंबई

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Rashi Sharma

•

Oct 11, 2026

Amitabh Bachchan Rekha Love Story

अमिताभ बच्चन और रेखा की फिल्मों की फोटोज। (फोटो सोर्स: IMDb)

Amitabh Bachchan Rekha Love Story: रील लाइफ हो या रियल लाइफ कुछ लव स्टोरीज ऐसी होती हैं जो हमेशा याद रहती हैं। बॉलीवुड की ऐसी ही एक लव स्टोरी है रेखा और अमिताभ बच्चन की जो हमेशा से चर्चा में रही है। दोनों ने पर्दे पर कभी प्यार किया, कभी अपने जज्बात छिपाए, तो कभी ऐसे रिश्तों को जिया जिनमें मोहब्बत होने के बावजूद सब कुछ मिल पाना आसान नहीं था। लेकिन असल जिंदगी में भी जहां रेखा अक्सर अमिताभ बच्चन के लिए अपने प्यार का खुलकर इजहार करते हुए नजर आयीं, वहीं बिग बी ने इसको सार्वजानिक रूप से कभी स्वीकार नहीं किया।

अपने सुनहरे दौर में, अमिताभ बच्चन और रेखा ने साथ में 9 फिल्में कीं। इन फिल्मों को कमर्शियल सफलता अलग-अलग स्तर पर मिली, लेकिन उतार-चढ़ाव के बावजूद, उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री और उससे जुड़ी ऑफ-स्क्रीन कहानियों ने हमेशा दर्शकों का का ध्यान आकर्षित किया है। आज अमिताभ बच्चन के 84वें जन्मदिन पर बिग बी और रेखा की उन फिल्मों पर नजर डालते हैं, जिनमें उनकी जोड़ी ने प्यार और रिश्तों के अलग-अलग पहलुओं को पर्दे पर उतारा।

शादी और रिश्ते में दरार

दुलल गुहा की 'दो अंजाने' (1976) फिल्म निहार रंजन गुप्ता के उपन्यास पर आधारित थी। इसमें ड्रामा और सस्पेंस का मसाला था। फिल्म में अमिताभ बच्चन, रेखा और प्रेम चोपड़ा मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म की कहानी अमित रॉय (अमिताभ बच्चन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो रेलवे ट्रैक पर घायल अवस्था में मिलता है, और अपनी याददाश्त खो देता है। इस एक्सीडेंट के बाद वो नरेश दत्त के रूप में नई जिंदगी शुरू करता है। एक फिल्म की अचानक स्क्रीनिंग से उसकी पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं और दर्शकों को एक साधारण शादीशुदा आदमी के रूप में उसकी जिंदगी दिखाई जाती है, जिसमें रेखा रॉय (रेखा) शामिल हैं, जो एक महत्वाकांक्षी और नैतिक रूप से अच्छी-बुरी दोनों तरह की महिला है और शादी के बाद अपना डांस छोड़ देती है, साथ ही उसका चालाक दोस्त रंजीत मलिक (प्रेम चोपड़ा) भी है। हालांकि, फिल्म के अंत दोनों दोबारा करीब आ जाते हैं। देखा जाए तो फिल्म की इस कहानी में उनकी लवस्टोरी अधूरी नहीं रहती है, बल्कि आपसी मतभेद और शक के कारण दूरियां बढ़ जाती हैं।

जब रेखा को मिला एकतरफा प्यार

'मुकद्दर का सिकंदर' (1978) की कहानी सिकंदर (अमिताभ बच्चन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक अनाथ है और गरीबी से उठकर कामयाबी हासिल करता है, लेकिन कामना (राखी गुलजार) के लिए अपने अधूरे प्यार की वजह से परेशान रहता है।

ये अमिताभ बच्चन के करियर की वो फिल्म थी, जिसने उनको एक अलग पहचान दिलाई थी। फिल्म में उन्होंने सिकंदर और रेखा ने जोहरा बाई का किरदार निभाया था। यह फिल्म उन कहानियों में से है, जहां प्यार करने वाला इंसान अपने जज्बात तो जाहिर करता है, लेकिन बदले में उसे वही प्यार नहीं मिलता। सिकंदर बचपन से ही मुश्किलों का सामना करता है। बड़ा होकर वह कामयाब हो जाता है, लेकिन उसके दिल में कामना के लिए प्यार बना रहता है। दूसरी तरफ, जोहरा बाई सिकंदर को चाहने लगती है। वह उसके करीब रहना चाहती है, लेकिन सिकंदर का दिल किसी और के लिए धड़कता है। जोहरा के लिए सिकंदर सिर्फ एक पसंद नहीं, बल्कि उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन जाता है। इसके बावजूद वह उसके प्यार को हासिल नहीं कर पाती। रेखा का यह किरदार फिल्म में एकतरफा मोहब्बत और त्याग की सबसे भावुक तस्वीरों में से एक है।

मुश्किलों के बीच पनपता प्यार

'मसाला फिल्मों के उस्ताद' मनमोहन देसाई की डायरेक्ट की हुई 'सुहाग' (1979) एक जबरदस्त मसाला एंटरटेनर थी, जिसमें ड्रामा, कॉमेडी, एक्शन, रोमांस और ब्रोमांस (दोस्ती) का भरपूर तड़का था।

फिल्म की कहानी दो बिछड़े हुए भाइयों, अमित (अमिताभ बच्चन) और किशन (शशि कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है। जन्म के समय अलग होने के बाद, वे बड़े होकर एक चालाक आवारा और एक पुलिस ऑफिसर बनते हैं। फिल्म के आखिर में जब वे मिलते हैं, तो कई बड़े खुलासे होते हैं और उनकी बहुत दुख झेलने वाली मां (निरूपा रॉय) और स्मगलर पिता (अमजद खान) के साथ टकराव होता है। 'सुहाग' (1979) में अमिताभ बच्चन ने अमित और रेखा ने बसंती का किरदार निभाया था। फिल्म में बसंती एक नाचने वाली लड़की है, जिससे अमित प्यार करता है और शादी करना चाहता है। अमित और बसंती का रिश्ता कहानी की अन्य घटनाओं के बीच अपनी जगह बनाता है। यह फिल्म उन कहानियों में शामिल है, जहां प्यार को केवल जुदाई के रूप में नहीं दिखाया गया। दोनों के बीच रोमांस है और रिश्ते को आगे बढ़ाने की चाह भी। इसलिए सुहाग में अमिताभ-रेखा की जोड़ी को अधूरी मोहब्बत से ज्यादा मुश्किल परिस्थितियों के बीच पनपते प्यार के रूप में देखना बेहतर होगा। 'सुहाग' 1979 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक बनी और इसने अमिताभ-रेखा की जोड़ी को हिंदी फिल्मों की सबसे यादगार जोड़ियों में से एक के तौर पर पक्का कर दिया।

प्यार के साथ शरारत और रोमांस

'मिस्टर नटवरलाल' (1979) में अमिताभ बच्चन ने नटवरलाल का और रेखा ने शन्नो का किरदार निभाया था। पिछली फिल्मों के गंभीर रिश्तों से अलग, इस फिल्म में दोनों की जोड़ी का हल्का-फुल्का और रोमांटिक अंदाज देखने को मिला। फिल्म की कहानी नटवरलाल के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने भाई के साथ हुए अन्याय का बदला लेने के लिए चालाकी से काम करता है। इसी सफर में शन्नो के साथ उसका रिश्ता भी कहानी का हिस्सा बनता है। फिल्म में रोमांस के साथ हास्य, रोमांच और बदले की कहानी आगे बढ़ती है। यहां अमिताभ और रेखा की जोड़ी को सिर्फ दुख और जुदाई के नजरिए से देखना सही नहीं होगा। इस फिल्म ने दिखाया कि दोनों साथ में हल्के-फुल्के रोमांस और मनोरंजन के रंग भी बखूबी पेश कर सकते थे।

प्यार, शादी और अधूरे जज्बात की असल जिंदगी से जुड़ी सबसे चर्चित कहानी

1980 के दशक की शुरुआत तक, रेखा एक स्टार-एक्ट्रेस के तौर पर अपने करियर के शिखर पर पहुंच रही थीं और अमिताभ बच्चन दशक की शुरुआत में कुछ उतार-चढ़ाव भरे दौर के बावजूद नंबर 1 बने हुए थे। उनके ऑफ-स्क्रीन रिश्ते को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहती थीं, जबकि ऑन-स्क्रीन उनकी जोड़ी प्रोड्यूसर्स के लिए कमाई का जरिया साबित हो चुकी थी। इसी वजह से यश चोपड़ा की फिल्म 'सिलसिला' की कास्टिंग ने काफी चर्चा बटोरी।

फिल्म की कहानी में अमित और चांदनी एक-दूसरे से प्यार करते हैं और साथ जिंदगी बिताने के सपने देखते हैं। लेकिन अमित के भाई जैसे दोस्त शेखर की मौत के बाद परिस्थितियां बदल जाती हैं। शेखर की मंगेतर शोभा गर्भवती होती है और अमित सामाजिक दबाव और जिम्मेदारी के चलते उससे शादी कर लेता है। अमित चांदनी से रिश्ता तोड़ देता है, लेकिन दोनों के दिलों में एक-दूसरे के लिए भावनाएं खत्म नहीं होतीं। समय बीतने के बाद दोनों फिर मिलते हैं। अब दोनों शादीशुदा हैं, लेकिन पुराना प्यार उनके वर्तमान रिश्तों को उलझा देता है। फिल्म का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुराने प्यार के लिए मौजूदा रिश्तों को पीछे छोड़ा जा सकता है? आखिर में किरदार अपने फैसले लेते हैं, लेकिन इससे पहले उनकी जिंदगी में प्यार, अपराधबोध और त्याग का लंबा संघर्ष चलता है। सिलसिला को अमिताभ और रेखा की पर्दे पर दिखाई गई प्रेम कहानियों में सबसे चर्चित इसलिए माना जाता है, क्योंकि इसमें प्यार के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों और रिश्तों की उलझन को भी जगह मिली।

अमिताभ-रेखा की जोड़ी क्यों याद की जाती है?

हिंदी सिनेमा में अक्सर सफल "स्टार जोड़ियों" का दौर देखा गया है, हालांकि, उनमें से बहुत कम ही अमिताभ-रेखा की जोड़ी जैसी सनसनी, स्कैंडल और स्टार क्वालिटी का मुकाबला कर पाई हैं। अमिताभ बच्चन और रेखा ने पर्दे पर सिर्फ प्रेमी-प्रेमिका के किरदार नहीं निभाए, बल्कि रिश्तों में आने वाली गलतफहमियों, एकतरफा प्यार, महत्वाकांक्षा और त्याग जैसे पहलुओं को भी दिखाया। हालांकि, इन फिल्मों में हर प्रेम कहानी अधूरी नहीं थी। कुछ में रिश्ते टूटते हैं, कुछ में प्यार एकतरफा रहता है, तो कुछ में रोमांस को सुखद मोड़ भी मिलता है। असल जिंदगी में अमिताभ बच्चन और रेखा ने अपने रिश्ते को लेकर भले ही सुर्खियां बटोरीं हों, लेकिन पर्दे पर उनकी जोड़ी ने प्यार की ऐसी यादगार कहानियां दीं, जो कभी पुरानी नहीं होंगी।

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