
पिता के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचीं बेटियां ( फोटो सोर्स- Twitter@khesariLY)
Daughters Skip Father Funeral: हरियाणा के सोनीपत से सामने आई एक घटना ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। वृद्धाश्रम में रह रहे एक बुजुर्ग पिता की मौत के बाद उनकी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल होने नहीं पहुंचीं। बताया गया कि बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए पिता की अंतिम विदाई देखी। इस मामले पर अब भोजपुरी अभिनेता खेसारी लाल यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने घटना से जुड़ी पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, 'वंश से निर्वंश भला लेकिन कुवंश ना।' खेसारी के इस कमेंट के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले की चर्चा और तेज हो गई है।
दरअसल, हरियाणा के सोनीपत में एक वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग कपड़ा कारोबारी शिवचरण रामरतन गुप्ता का निधन हो गया। बताया गया कि वह अपनी पत्नी मीना गुप्ता के साथ करीब डेढ़ से दो साल पहले वृद्धाश्रम में रहने आए थे। पत्नी के निधन के बाद शिवचरण अकेले ही वहां रह रहे थे।
शिवचरण ने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ाया-लिखाया और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया था। जानकारी के मुताबिक, उनकी दो बेटियां अध्यापिका हैं। पिता की तबीयत काफी समय से खराब चल रही थी और वृद्धाश्रम प्रबंधन ने बेटियों को उनकी बिगड़ती सेहत की जानकारी पहले ही दे दी थी।
वृद्धाश्रम संचालक के मुताबिक, करीब 20 दिन पहले तीनों बेटियों को बताया गया था कि उनके पिता की तबीयत ठीक नहीं है। इसके बावजूद वे उनसे मिलने नहीं पहुंचीं। बताया गया कि शिवचरण के पास मोबाइल फोन था और वह पहले अपनी बेटियों से बातचीत किया करते थे, लेकिन बीमारी बढ़ने के साथ बेटियों से फोन पर संपर्क भी कम हो गया।
4 अगस्त की सुबह लंबी बीमारी के बाद शिवचरण का निधन हो गया। इसके बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने तीनों बेटियों को पिता की मौत की सूचना दी। उन्हें यह भी कहा गया कि अगर वे आना चाहती हैं तो अंतिम संस्कार कुछ समय के लिए रोका जा सकता है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने समय की कमी का हवाला देते हुए आने में असमर्थता जताई।
जानकारी के मुताबिक, तीनों बेटियां अलग-अलग जगहों पर रहती हैं। बड़ी बेटी नेपाल में अध्यापिका है, दूसरी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में और तीसरी मुंबई में रहती है। तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में खुद मौजूद नहीं हुईं और वीडियो कॉल के जरिए पिता की अंतिम विदाई देखी।
रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी बेटी ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए 5,100 रुपये ऑनलाइन भेजे। बेटियों की ओर से अंतिम संस्कार की रिकॉर्डिंग भेजने का अनुरोध भी किया गया। बाद में अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने की जिम्मेदारी भी वृद्धाश्रम प्रबंधन को देने की बात सामने आई।
मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद कवि कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया भी सामने आई। उन्होंने इस घटना के बहाने बदलते पारिवारिक रिश्तों और नई पीढ़ी के व्यवहार पर सवाल उठाया।
हालांकि, बेटियों ने अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का फैसला क्यों लिया, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। इसलिए उनकी निजी परिस्थितियों को जाने बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। लेकिन इस घटना ने माता-पिता और बच्चों के रिश्ते, बुजुर्गों की देखभाल और बदलते पारिवारिक मूल्यों पर एक बड़ी बहस जरूर छेड़ दी है।
Updated on:
07 Aug 2026 03:03 pm
Published on:
07 Aug 2026 03:03 pm
