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‘पराली का धुआं पटाखों से 100 गुना ज्यादा खतरनाक’, बढ़ते प्रदूषण पर बृजभूषण शरण सिंह ने सरकारों पर उठाए सवाल

Brijbhushan Sharan Singh: पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने पराली जलाने को सबसे बड़ा कारण बताते हुए सरकारों पर तीखा हमला बोला है। बृजभूषण ने दावा किया कि इसका धुआं दिवाली के पटाखों और औद्योगिक प्रदूषण से 100 गुना ज्यादा होता है।
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गोंडा

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Mohsina Bano

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Updated: 7 Nov 2026, 1:06 PM IST

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बढ़ते प्रदूषण पर बृजभूषण शरण सिंह का सरकारों पर हमला (PC: IANS)

Brijbhushan Sharan Singh Statement: भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने देश और प्रदेश में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। उन्होंने प्रदूषण के लिए पराली जलाने को सबसे बड़ा कारण बताते हुए सरकारों की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। बृजभूषण का कहना है कि स्थिति को संभालने के लिए जिम्मेदार लोगों ने राज्य और देश को पूरी तरह से अपने हाल पर छोड़ दिया है।

'पटाखों और गाड़ियों के धुएं से भी ज्यादा खतरनाक है पराली'

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि, "एक बीघा खेत में जलाई गई पराली से जितना धुआं निकलता है वह एक गाड़ी द्वारा पूरे साल में छोड़े गए धुएं से कहीं ज्यादा होता है। पराली जलाने से बहुत नुकसान होता है, यह उपजाऊ मिट्टी को खत्म कर देता है। उन्होंने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि इन दिनों हर तरफ गांव जल रहे हैं। अगर आप शाम के समय बाहर निकलें तो ऐसा लगता है जैसे आपके चारों ओर सब कुछ आग की चपेट में है। उन्होंने दावा किया कि प्रशासन चाहे तो 15 से 20 दिन बाद भी आसानी से यह पता लगा सकता है कि किस खेत में पराली जलाई गई थी और किसमें नहीं।"

सरकारों पर उठाए सवाल

सरकारों पर निशाना साधते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि, फैक्ट्रियों, गाड़ियों और ईंट भट्ठों से निकलने वाले धुएं पर एक्शन लेने का यह बिल्कुल सही समय है लेकिन कोई भी सरकार पराली के अहम मुद्दे पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण दिवाली के पटाखों ईंट भट्ठों या औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण से 100 गुना ज्यादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सबका ध्यान कहीं और ही लगा हुआ है जबकि, प्रदूषण के मुद्दे को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है।

क्या है पराली जलाने की समस्या

दरअसल, धान की कटाई के बाद खेतों में फसल के जो अवशेष बच जाते हैं उसे पराली कहा जाता है। अगली फसल की बुवाई के लिए खेत को जल्दी खाली करने के चक्कर में कुछ किसान इसे जला देते हैं। इससे निकलने वाला धुआं हवा में प्रदूषक कणों को काफी बढ़ा देता है। खासकर सर्दियों की शुरुआत में हवा की गति कम होने और मौसम की अन्य परिस्थितियों के कारण प्रदूषण लंबे समय तक वातावरण में बना रह सकता है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि पराली जलाने से हवा प्रदूषित होने के साथ ही मिट्टी में मौजूद जैविक पदार्थ भी नष्ट हो जाते हैं इसलिए इसे जलाने के बजाय मशीनों की मदद से खाद के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।