
Maffucci Syndrome क्या होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Maffucci Syndrome Symptoms: क्या आपने कभी किसी ऐसी बीमारी के बारे में सुना है, जो एक साथ इंसान की हड्डियों और त्वचा दोनों को प्रभावित करती है? स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं में कई ऐसी दुर्लभ स्थितियां होती हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है। इन्हीं में से एक गंभीर और रेयर मेडिकल कंडीशन है माफुची सिंड्रोम (Maffucci Syndrome)। यह एक ऐसी दुर्लभ स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के शरीर की हड्डियों के अंदर बिना कैंसर वाली ट्यूमर (गांठें) बनने लगती हैं और साथ ही त्वचा पर रक्त वाहिकाओं से जुड़े निशान उभर आते हैं। हालांकि यह बीमारी बहुत ही कम लोगों में देखी जाती है, लेकिन इसके बारे में सही और समय पर जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए समझते हैं कि माफुची सिंड्रोम क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और यह क्यों होता है।
नेशनल आर्गेनाईजेशन फॉर रेयर डिसॉर्डर के मुताबिक, माफुची सिंड्रोम एक जेनेटिक यानी आनुवंशिक विकार है, जो मुख्य रूप से दो प्रमुख समस्याओं का एक संयोजन (Combination) है, एंकोन्ड्रोमा (Enchondroma) में हड्डियों के अंदर कार्टिलेज (नरम हड्डी) से बनी गैर-कैंसरयुक्त गांठें बढ़ने लगती हैं। ये गांठें ज्यादातर हाथों और पैरों की लंबी हड्डियों में बनती हैं। हेमेंजियोमा (Hemangioma) में त्वचा के ठीक नीचे खून की नसें (रक्त वाहिकाएं) बढ़कर लाल, नीले या बैंगनी रंग की गांठों या गुच्छों के रूप में दिखाई देने लगती हैं। जन्म के समय बच्चा अक्सर बिल्कुल सामान्य दिखता है। इसके लक्षण आमतौर पर बचपन में, लगभग 1 से 5 साल की उम्र के बीच दिखाई देने शुरू होते हैं। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, ये गांठें और त्वचा के निशान अधिक स्पष्ट होने लगते हैं।
क्लीवलैंड क्लिनिक के मुताबिक, इस बीमारी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कुछ मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं;
माफुची सिंड्रोम होने के पीछे का मुख्य कारण जीन में आने वाला बदलाव या म्यूटेशन (Gene Mutation) है। यह बीमारी मुख्य रूप से IDH1 या IDH2 नाम के जीन में उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) के कारण होती है। यह जीन शरीर में कोशिकाओं के सही विकास को नियंत्रित करने का काम करता है। यह बात जानना बेहद जरूरी है कि माफुची सिंड्रोम माता-पिता से बच्चों में स्थानांतरित नहीं होता है। यानी यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में फैलने वाली बीमारी नहीं है। भ्रूण के विकास के शुरुआती दौर में कोशिका विभाजन के दौरान यह जेनेटिक म्यूटेशन अचानक अपने आप हो जाता है। इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता और न ही यह किसी की गलती से होता है।
माफुची सिंड्रोम में बनने वाली ज्यादातर गांठें सौम्य (Non-cancerous) होती हैं, लेकिन इसमें समय के साथ कुछ जोखिम बने रहते हैं,माफुची सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में हड्डियों की गांठों के भविष्य में कैंसरयुक्त (Malignant) ट्यूमर में बदलने का जोखिम सामान्य लोगों से अधिक होता है। दुर्लभ मामलों में, शरीर के अंदरूनी अंगों जैसे मस्तिष्क या पेट में भी गांठें या नसों के गुच्छे बन सकते हैं। इसी वजह से इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को समय-समय पर नियमित मेडिकल चेकअप कराने की सलाह दी जाती है।
यह एक जेनेटिक स्थिति है, इसलिए इसका कोई एक स्थायी इलाज या क्योर नहीं है। हालांकि, सही देखभाल से मरीज को एक बेहतर और सामान्य जीवन जीने में मदद की जा सकती है। डॉक्टर शारीरिक परीक्षण के अलावा एक्स-रे (X-ray), एमआरआई (MRI) और सीटी स्कैन की मदद से हड्डियों की स्थिति और नसों के गुच्छों की जांच करते हैं। कमजोर हड्डियों को सहारा देने के लिए ब्रेसिज़ का इस्तेमाल किया जाता है ताकि फ्रैक्चर से बचा जा सके। यदि कोई गांठ बहुत ज्यादा दर्द दे रही हो, हड्डियों के आकार को बहुत खराब कर रही हो या फ्रैक्चर बार-बार हो रहा हो, तो उसे सर्जरी के जरिए ठीक किया जाता है, नियमित अंतराल पर एक्स-रे और स्कैन किए जाते हैं ताकि किसी भी गांठ में कैंसर के शुरुआती लक्षणों को तुरंत पहचाना जा सके।
Updated on:
22 Sept 2026 09:39 am
Published on:
22 Sept 2026 09:39 am
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