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Glaucoma का खतरा जानने के लिए क्यों जरूरी है आंखों का Pachymetry Test? मेयो क्लिनिक से जानें जरुरी बात

ग्लौकोमा (काला मोतिया) की जांच में Pachymetry Test क्यों जरूरी है? जानिए मेयो क्लिनिक और क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार कॉर्निया की मोटाई और आंखों के प्रेशर का सही कनेक्शन।
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भारत

•

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Nidhi Yadav

•

Oct 05, 2026

Eye specialist performing corneal pachymetry test on a patient for glaucoma diagnosis

Pachymetry Test क्या होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Pachymetry Test: हमारी आंखें शरीर के सबसे संवेदनशील अंगों में से एक हैं। उम्र बढ़ने के साथ या जीवनशैली में बदलाव के कारण आंखों से जुड़ी कई समस्याएं सामने आने लगती हैं। इनमें से एक गंभीर बीमारी है 'ग्लौकोमा' (Glaucoma), जिसे आम भाषा में काला मोतिया या मोतियाबिंद भी कहा जाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे आंखों की रोशनी छीन लेती है और सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती चरणों में इसके कोई खास लक्षण महसूस नहीं होते। ग्लौकोमा की सही समय पर पहचान करने और आंखों के दबाव (Eye Pressure) की सटीक जांच के लिए डॉक्टर केवल प्रेशर नापना ही काफी नहीं मानते। इसके लिए एक बेहद महत्वपूर्ण जांच की जाती है, जिसे पेकीमीट्री टेस्ट (Pachymetry Test) कहते हैं। ग्लौकोमा के सटीक निदान और इलाज में यह टेस्ट बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। आइए समझते हैं कि पैकीमीट्री टेस्ट क्या है, यह कैसे होता है और ग्लौकोमा के मरीजों के लिए यह क्यों इतना जरूरी माना जाता है।

क्या होता है पैकीमीट्री टेस्ट? (Pachymetry Test)

मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार, हमारी आंख के सामने वाले पारदर्शी हिस्से को कॉर्निया (Cornea) कहा जाता है। कॉर्निया की मोटाई (Corneal Thickness) को मापने की जांच को ही पैकीमीट्री टेस्ट कहते हैं। कॉर्निया हमारी आंख की पुतली को सुरक्षा देता है और रोशनी को सही तरीके से आंख के भीतर भेजने में मदद करता है। हर व्यक्ति के कॉर्निया की मोटाई अलग-अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर कॉर्निया की मोटाई लगभग 540 से 550 माइक्रोमीटर के बीच होती है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति का कॉर्निया इससे ज्यादा पतला या मोटा है, तो इसका सीधा असर आंखों के प्रेशर (Intraocular Pressure - IOP) की जांच पर पड़ता है।

ग्लौकोमा की जांच में कॉर्निया की मोटाई क्यों मायने रखती है?

क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, ग्लौकोमा की मुख्य वजह आंख के अंदर दबाव (आई प्रेशर) का बढ़ना होता है। जब आंख का प्रेशर बढ़ता है, तो यह देखने वाली नस (Optic Nerve) को नुकसान पहुंचाता है। डॉक्टर अक्सर टोनोमीट्री (Tonometry) नाम के टेस्ट से आंख का प्रेशर मापते हैं। लेकिन यहाँ कॉर्निया की मोटाई खेल बदल देती है;

1.पतला कॉर्निया (Thin Cornea)- अगर किसी मरीज का कॉर्निया सामान्य से पतला है, तो टोनोमीट्री टेस्ट में आंख का प्रेशर वास्तव में जितना है, उससे कम दिखाई दे सकता है। इससे डॉक्टर को लग सकता है कि आंख का प्रेशर सामान्य है, जबकि असल में प्रेशर बढ़ा हुआ हो सकता है। पतला कॉर्निया ग्लौकोमा के खतरे को बढ़ा देता है।

2. मोटा कॉर्निया (Thick Cornea)- अगर कॉर्निया सामान्य से मोटा है, तो टेस्ट में प्रेशर असलियत से ज्यादा आ सकता है। ऐसे में मरीज को बेवजह ग्लौकोमा का मरीज मान लिया जा सकता है, जबकि उसकी आंखें स्वस्थ हो सकती हैं।

इसीलिए मेयो क्लिनिक के अनुसार, केवल आई प्रेशर नापना ग्लौकोमा की पुष्टि करने के लिए काफी नहीं है। प्रेशर के रीडिंग की सही सच्चाई जानने के लिए पैकीमीट्री टेस्ट से कॉर्निया की मोटाई मापना बेहद जरूरी होता है।

कैसे किया जाता है यह टेस्ट? क्या इसमें दर्द होता है?

मेयो क्लिनिक और क्लीवलैंड क्लिनिक के विशेषज्ञों के अनुसार, पैकीमीट्री टेस्ट बहुत ही आसान, सुरक्षित और कुछ ही सेकंड में पूरा होने वाला टेस्ट है। इसमें मरीज को किसी तरह का कोई दर्द महसूस नहीं होता। यह टेस्ट मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जाता है;

  • अल्ट्रासोनिक पैकीमीट्री (Ultrasonic Pachymetry)- इस तरीके में डॉक्टर मरीज की आंख में सुन्न करने वाली ड्रॉप्स (Numbing Drops) डालते हैं ताकि कोई तकलीफ न हो। इसके बाद एक छोटी सी पेन जैसी मशीन (Pachymeter) को आंख के कॉर्निया से हल्के से छुआया जाता है। साउंड वेव्स की मदद से सेकंडों में कॉर्निया की मोटाई की सटीक जानकारी मिल जाती है।
  • ऑप्टिकल पैकीमीट्री (Optical Pachymetry)- इस प्रक्रिया में आंख को छूने की भी जरूरत नहीं पड़ती। मरीज को एक मशीन के सामने बैठना होता है, जहाँ इमेजिंग सिस्टम (जैसे OCT) के जरिए बिना संपर्क किए कॉर्निया की मोटाई नाप ली जाती है।

किन लोगों को पैकीमीट्री टेस्ट जरूर करवाना चाहिए?

अगर आप नीचे बताई गई स्थितियों में से किसी में आते हैं, तो अपने आई स्पेशलिस्ट से पैकीमीट्री टेस्ट के बारे में सलाह जरूर लें;

  • यदि आपके परिवार में किसी को पहले से ग्लौकोमा या काले मोतिया की शिकायत रही हो।
  • यदि रूटीन आई चेकअप में आपका आई प्रेशर (Intraocular Pressure) बढ़ा हुआ या संदिग्ध आया हो।
  • यदि आपकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है और आप नियमित आंखों की जांच करवा रहे हैं।
  • यदि आप लेसिक (LASIK) या आंखों की कोई अन्य सर्जरी कराने की सोच रहे हैं।
  • यदि आपको आंखों में धुंधलापन या रोशनी के आसपास रंगीन घेरे (Halos) दिखाई देते हैं।
डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।