
निमोनिक प्लेग vs ब्यूबोनिक प्लेग समझें पूरी बीमारी- प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो सोर्स-@opinion_kings)
Plague Cause: अचानक तेज बुखार आना, सिर में तेज दर्द होना और पूरे शरीर में टूट जैसी थकान महसूस होना ये ऐसे लक्षण हैं जिन्हें हम अक्सर मौसम बदलने या सामान्य फ्लू (सर्दी-जुकाम) की वजह मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इतिहास में करोड़ों लोगों की जान लेने वाली बीमारी 'प्लेग' (Plague) के शुरुआती लक्षण भी बिल्कुल ऐसे ही होते हैं? प्लेग का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में इतिहास की किताबें और पुरानी महामारियों की यादें ताजा हो जाती हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस की तरक्की और एंटीबायोटिक दवाइयों की वजह से आज यह बीमारी उतनी आम नहीं रही, फिर भी दुनिया के कुछ हिस्सों में इसके मामले आज भी सामने आते हैं। अगर प्लेग की पहचान शुरुआती चरण में ही हो जाए, तो इसका पूरी तरह से इलाज संभव है। आइए समझते हैं कि प्लेग क्या है, यह कैसे फैलता है और इसके मुख्य लक्षण क्या हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, प्लेग एक बहुत ही गंभीर और संक्रामक बीमारी है, जो 'यर्सिनिया पेस्टिस' (Yersinia pestis) नाम के बैक्टीरिया से फैलती है। यह बैक्टीरिया मुख्य रूप से चूहों, गिलहरियों और अन्य छोटे जंगली जानवरों में पाया जाता है। WHO और CDC के मुताबिक, यह बीमारी इंसानों में मुख्य रूप से तीन तरीकों से फैलती है;
अमेरिका की स्वास्थ्य एजेंसी 'सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' (CDC) के अनुसार, प्लेग मुख्य रूप से तीन रूपों में होता है और हर रूप के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं;
यह प्लेग का सबसे आम रूप है। जब पिसू काटता है, तो बैक्टीरिया शरीर की लिम्फ नोड्स (गिल्टियों) में चला जाता है। अचानक बहुत तेज बुखार आना, ठंड लगना, सिरदर्द, कमजोरी और मांसपेशियों में तेज दर्द होना। गर्दन, कांख (Underarms) या जांघों (Groin) की गिल्टियों में सूजन आ जाना और उनमें असहनीय दर्द होना। इन सूजी हुई गिल्टियों को 'ब्यूबोस' (Buboes) कहा जाता है।
जब प्लेग का बैक्टीरिया इंसान के खून में सीधे फैल जाता है और तेजी से बढ़ने लगता है, तो इसे सेप्टिसेमिक प्लेग कहते हैं। अत्यधिक बुखार, बहुत ज्यादा कमजोरी, पेट में तेज दर्द, दस्त और उल्टी इसके लक्षण हैं। शरीर के अंदरूनी हिस्सों से या नाक-मुंह से खून बहना शुरू हो सकता है। खून का दौरा रुकने के कारण हाथ और पैर की उंगलियां व नाक काली पड़ सकती हैं (जिसे गैंग्रीन कहते हैं)।
यह प्लेग का सबसे खतरनाक और जानलेवा रूप है, क्योंकि यह सीधे फेफड़ों (Lungs) पर हमला करता है। सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ, छाती में तेज दर्द, खांसी के साथ खून या झागदार बलगम निकलना। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में खांसने या छींकने से बहुत तेजी से फैल सकता है।
राहत की बात यह है कि प्राचीन समय की तुलना में आज प्लेग से डरने की जरूरत नहीं है। अगर मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाए और समय रहते बीमारी की पहचान हो जाए, तो आधुनिक एंटीबायोटिक (Antibiotic) दवाइयों से इसका पूरी तरह इलाज किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि यदि इलाज में देरी हो जाए, विशेष रूप से न्युमोनिक प्लेग के मामले में, तो यह स्थिति 24 से 48 घंटे के भीतर मरीज के लिए बेहद खतरनाक या जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को पहचानना सबसे जरूरी है।
WHO और CDC बीमारियों से बचाव के लिए कुछ बुनियादी बातें ध्यान में रखने की सलाह देते हैं;
रूस में हाल ही में साइबेरियाई क्षेत्र में लैब कर्मचारी की संदिग्ध मौत के बाद न्युमोनिक प्लेग (Pneumonic Plague) के संभावित प्रकोप का मामला सुर्खियों में आया है, जिसको लेकर अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां और डब्ल्यूएचओ (WHO) सतर्क हैं।
Updated on:
07 Oct 2026 02:33 pm
Published on:
07 Oct 2026 02:30 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
