
Kennedy Terminal Ulcer क्या होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Kennedy Terminal Ulcer: जब इंसान का शरीर अपनी अंतिम सांसों के करीब होता है, तब अंगों का काम करना धीमा होने लगता है। इस दौर में त्वचा पर कुछ ऐसे लक्षण उभरते हैं, जिन्हें आम तौर पर बेडसोर या चोट समझ लिया जाता है। लेकिन कई बार यह एक विशेष स्थिति होती है, जिसे मेडिकल साइंस में केनेडी टर्मिनल अल्सर (Kennedy Terminal Ulcer) या '3:30 सिंड्रोम' कहा जाता है। यह कोई साधारण घाव नहीं है, बल्कि इस बात का संकेत है कि शरीर का सबसे बड़ा अंग यानी त्वचा अब अपना काम बंद कर रही है।
वेबएमडी के मुताबिक, केनेडी टर्मिनल अल्सर एक ऐसा घाव या छलांगा है जो किसी गंभीर बीमारी के अंतिम चरण या जीवन के अंतिम दिनों में उभरता है। जब शरीर के अंदरूनी अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं, तो हृदय का ब्लड सर्कुलेशन भी कमजोर पड़ जाता है। ऐसे में त्वचा तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता और त्वचा का वो हिस्सा धीरे-धीरे बेजान होने लगता है। यह घाव अक्सर रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से (टेलबोन या सेक्रम) पर देखने को मिलता है। हालांकि, यह शरीर के अन्य हिस्सों जैसे कि एड़ी, कंधे, कोहनी या पैरों पर भी उभर सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, इस बीमारी को '3:30 सिंड्रोम' कहने के पीछे एक बेहद चौंकाने वाली वजह है। सामान्य बेडसोर या घाव को उभरने में कुछ दिनों का समय लगता है, लेकिन केनेडी अल्सर महज कुछ घंटों के भीतर ही विकराल रूप ले लेता है। डॉक्टरों और देखभाल करने वाले मेडिकल स्टाफ ने देखा कि सुबह के वक्त मरीज की त्वचा पर एक छोटा सा लाल या गंदा धब्बा दिखता है, जो बिल्कुल आम चोट जैसा लगता है। लेकिन दोपहर करीब 3:30 बजे तक वही छोटा सा निशान एक बड़े काले छाले में बदल जाता है। त्वचा का रंग लाल से बदलकर बैंगनी, पीला और फिर अचानक गहरा काला हो जाता है। रंग का काला पड़ना इस बात को दर्शाता है कि वहां के टिश्यूज यानी ऊतक पूरी तरह से बेजान (टिश्यू डेथ) हो चुके हैं। इस तेजी से बदलने की रफ्तार के कारण ही इसे यह नाम मिला है।
इस अल्सर को पहचानना काफी आसान है क्योंकि इसकी बनावट आम घावों से अलग होती है;
ज्यादातर लोग इसे सामान्य बेडसोर (Pressure Sore) समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है। बेडसोर एक ही स्थिति में लंबे समय तक लेटे रहने के दबाव से होता है। अगर मरीज की करवट बदलते रहें, अच्छी साफ-सफाई रखें और सही गद्दे का इस्तेमाल करें, तो बेडसोर से बचा जा सकता है और इसे ठीक भी किया जा सकता है। इसके विपरीत, केनेडी टर्मिनल अल्सर को रोका नहीं जा सकता। बेहतरीन से बेहतरीन देखभाल और बार-बार करवट बदलने के बावजूद भी यह उभर आता है। इसका कारण बाहर का दबाव नहीं, बल्कि शरीर के अंदर से ऑर्गन फेलियर (Skin Failure) होना है।
यह घाव जीवन के अंतिम पड़ाव का संकेत होता है, इसलिए इसका कोई ऐसा इलाज नहीं है जिससे इसे पूरी तरह ठीक किया जा सके। इस दौरान चिकित्सा टीम का मुख्य उद्देश्य मरीज को दर्द और तकलीफ से राहत देना होता है, घाव के कारण मरीज को होने वाली तकलीफ को कम करने के लिए डॉक्टरों की सलाह से दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं। घाव पर दबाव न पड़े, इसके लिए खास फोम या जेल वाली ड्रेसिंग का उपयोग किया जाता है। घाव से आने वाली दुर्गंध को नियंत्रित करने के लिए चारकोल युक्त ड्रेसिंग लगाई जाती है। मरीज को इस तरह लेटाया जाता है ताकि उस हिस्से पर ज्यादा रगड़ या खिंचाव न पड़े।
Updated on:
09 Oct 2026 07:55 am
Published on:
09 Oct 2026 07:55 am
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