
बस्तर के किसानों पर बाढ़ की मार (Photo Source- Patrika)
Paddy Crop Damage: इंद्रावती की बाढ़ ने खेतों में खड़ी धान की फसल को बर्बाद कर दिया, लेकिन अब किसानों को मुआवजा मिलेगा या नहीं, इसका फैसला खेतों में हुए नुकसान के बजाय फसल कटाई प्रयोग से सामने आने वाले उत्पादन के आंकड़े करेंगे। यानी जिन किसानों की सालभर की मेहनत पानी में समा गई, उन्हें राहत के लिए अभी सरकारी आंकड़ों का इंतजार करना होगा।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत धान की फसल में जलप्लावन और बाढ़ से होने वाले नुकसान को शामिल नहीं किए जाने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उत्पादन में कमी पाए जाने पर ही संबंधित गांव के बीमित किसानों को नियमानुसार दावा भुगतान किया जाएगा। ऐसे में बाढ़ से बर्बाद खेतों के बीच किसान अब इस उलझन में हैं कि उनकी वास्तविक क्षति का आकलन कब और किस आधार पर होगा।
ग्राम गुनपुर के किसानों ने फसल क्षति के दावे के भुगतान के लिए कृषि विभाग में आवेदन के जवाब में 28 अक्टूबर को जारी पत्र में बताया कि शासन के अनुसार धान की फसल में जलप्लावन और बाढ़ से होने वाले नुकसान को पीएम फसल बीमा योजना में शामिल नहीं किया गया है। फसल कटाई के बाद प्राप्त उत्पादन में कमी सामने आने पर ही गांव के सभी बीमित किसानों को नियमानुसार बीमा दावा भुगतान किया जाएगा।
इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष पूरन सिंह कश्यप ने कहा कि बाढ़ के कारण कई किसानों की खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। खेतों में कई दिनों तक पानी भरा रहा और किसानों की सालभर की मेहनत बर्बाद हो गई। इसके बावजूद राहत के लिए फसल कटाई प्रयोग के आंकड़ों का इंतजार करने की बात कही जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन खेतों में फसल ही नहीं बची, उन किसानों को राहत के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा। उनका कहना है कि बीमा योजना में बाढ़ से नुकसान शामिल नहीं होने का मतलब यह नहीं कि सरकार की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है। प्राकृतिक आपदा राहत के तहत भी प्रभावित और पात्र किसानों को सहायता मिलनी चाहिए।
बाढ़ में फसल बर्बाद होने के बाद किसानों के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर बैंक से लिया कृषि ऋण चुकाने का दबाव है, वहीं दूसरी ओर अगली फसल की तैयारी और परिवार की आजीविका चलाने का संकट खड़ा हो गया है। समिति ने प्रभावित किसानों को 65,100 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा देने, राष्ट्रीयकृत, सहकारी और ग्रामीण बैंकों सहित अन्य वित्तीय संस्थाओं से लिए गए कृषि ऋण को पूरी तरह माफ करने और खेतवार वास्तविक नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है।
किसानों को राहत दिलाने की मांग को लेकर इंद्रावती नदी बचाओ संघर्ष समिति 6 नवंबर को जगदलपुर कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी। पूरन सिंह कश्यप ने किसानों, आदिवासी समाज के पदाधिकारियों और युवाओं से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। समिति का कहना है कि बस्तर के किसानों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि बर्बाद फसल का उचित मुआवजा और कर्ज से राहत चाहिए।
Updated on:
4 Nov 2026, 8:47 AM IST
Published on:
4 Nov 2026, 8:47 AM IST
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