
AI डेटा और सोशल मीडिया कंटेंट को लेकर अभिजीत दीपके ने उठाए सवाल, डिजिटल प्राइवेसी पर छिड़ी बहस। (फोटो सोर्स-ANI)
Abhijeet Dipke statement: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके ने एक बार फिर केंद्र सरकार और Meta को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि एक अमरीकी AI और साइबर सिक्योरिटी कंपनी ने उनकी जानकारी का इस्तेमाल अपने AI टूल का डेमो दिखाने के लिए किया। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत में उनके इंस्टाग्राम पोस्ट की पहुंच भी कम कर दी गई है।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कहा कि अमरीकी कंपनी RESecurity ने भारत मंडपम में आयोजित FutureCrime Summit 2026 के दौरान अपने AI टूल का प्रदर्शन किया। उनका दावा है कि इस डेमो में उनकी जानकारी भी स्क्रीन पर दिखाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम में कई सरकारी अधिकारी मौजूद थे।
इसी को लेकर दीपके ने सवाल उठाया कि क्या भारत सरकार विदेशी कंपनियों की मदद से लोगों की निगरानी कर रही है? उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हो रहा है, तो यह लोगों की निजता और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
दीपके ने एक और दावा करते हुए कहा कि भारत में उनके इंस्टाग्राम पोस्ट की पहुंच भी सीमित कर दी गई है। उनके मुताबिक, विरोध प्रदर्शन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े उनके पोस्ट पहले की तरह लोगों तक नहीं पहुंच रहे हैं। उन्होंने इसे 'ब्लैंकेट बैन' जैसा बताया।
उन्होंने Meta से अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को किसी भी तरह के दबाव में आकर लोगों की आवाज नहीं दबानी चाहिए। उनका कहना है कि सोशल मीडिया के एल्गोरिदम का इस्तेमाल सिर्फ गैरकानूनी और आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने के लिए होना चाहिए, न कि किसी की राय या विरोध को सीमित करने के लिए।
अभिजीत दीपके के दावों के बाद सोशल मीडिया और ऑनलाइन आजादी को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। CJP से जुड़े सौरव दास ने भी इंटरनेट पर लोगों की आवाज और सोशल मीडिया कंटेंट की निगरानी को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इंटरनेट आज लोगों के अपनी बात रखने का बड़ा जरिया बन चुका है, इसलिए किसी भी तरह की रोक लगाने से पहले साफ और पारदर्शी नियम होने चाहिए।
दीपके ने कहा कि इंटरनेट का सबसे बड़ा मकसद लोगों को खुलकर अपनी बात रखने का मौका देना है। अगर किसी राजनीतिक या विरोध से जुड़े कंटेंट की पहुंच जानबूझकर कम की जाती है, तो यह अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ माना जाएगा।
हालांकि, अभिजीत दीपके के इन दावों पर अभी तक केंद्र सरकार, RESecurity या Meta की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह भी साफ नहीं है कि AI डेमो में उनकी जानकारी किस संदर्भ में दिखाई गई थी और इंस्टाग्राम पर उनके कंटेंट की पहुंच कम होने की वजह क्या है।
फिलहाल, दीपके के इन आरोपों के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग उनके दावों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई यूजर्स का कहना है कि इस मामले में संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।
Updated on:
07 Aug 2026 09:14 am
Published on:
07 Aug 2026 09:14 am
