
इंफाल के खुमन लम्पाक स्टेडियम में COCOMI के कार्यक्रम में शामिल लोग (सोर्स-IANS)
Manipur Ethnic Violence: मणिपुर में 3 मई 2023 को भड़की जातीय हिंसा को तीन साल पूरे हो गए, लेकिन इसके घाव आज भी ताजा हैं। आपको बता दें कि इस हिंसा में 260 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और करीब 60,000 लोग अपने घरों से बेघर हो गए। हालात इतने बिगड़ गए थे कि एक साल तक राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा। रविवार को मणिपुर हिंसा की तीसरी बरसी पर मैतेई और कुकी-जो समुदायों ने अलग-अलग तरीके से इस दिन को याद किया।
मैतेई समुदाय के लोगों ने इंफाल घाटी के कई इलाकों में रैलियां निकालकर अपनी मांगें रखीं। रैलियों में शामिल लोगों ने मांग रखी कि जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) लागू किया जाए। साथ ही मणिपुर में एकता बनाई रखी जाए। रैली में इंफाल पूर्व, इंफाल पश्चिम, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर में बड़ी संख्या में लोग नजर आए।
दूसरी ओर कुकी-जो समुदाय ने कांगपोकपी जिले में पूरा बंद रखा और चुराचांदपुर में पीड़ितों की याद में सभाएं कीं। सुबह 6 बजे से 12 घंटे तक बाजार, गाड़ियां और बाकी सेवाएं पूरी तरह बंद रहीं।
चुराचांदपुर में इस दिन को मैतेई से अलगाव दिवस के रूप में मनाया गया। जोमी समुदाय ने शहीद पार्क में कार्यक्रम किया। इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम के प्रवक्ता ने बताया कि हिंसा में 250 से ज्यादा लोग मारे गए और 40 हजार से अधिक लोग बेघर हुए थे। साथ ही हजारों घर जल गए थे और सैकड़ों चर्च टूट गए थे। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता।
इंफाल पूर्व में कोकोमी के नेतृत्व में एक बड़ा जन सम्मेलन हुआ, जिसमें मणिपुर संकट के तीन साल पूरे होने पर बात की गई। इस दौरान केंद्र सरकार से शांति बहाल करने के लिए छह जरूरी मांगें रखी गईं। इनमें 3 मई को एंटी-नार्को आतंकवाद दिवस घोषित करने की मांग भी शामिल थी। संगठन का कहना है कि राज्य में स्थायी शांति के लिए अब सख्त और ठोस कदम उठाना जरूरी है।
मणिपुर में यह हिंसा साल 2023 में तब शुरू हुई थी, जब पहाड़ी इलाकों में एक जनजातीय एकता मार्च निकाला गया था। यह मार्च हाई कोर्ट की उस सिफारिश के खिलाफ था, जिसमें मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की बात कही गई थी। इसके बाद पूरे राज्य में हिंसा फैल गई और हालात बहुत खराब हो गए, जिससे समाज पर गहरा असर पड़ा। अब तीन साल बाद भी दोनों समुदाय अलग-अलग तरीके से यह दिन मना रहे हैं, जिससे साफ दिखता है कि लोगों के बीच भरोसा अभी भी कम है और तनाव बना हुआ है।
Published on:
04 May 2026 09:55 am
