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बंदूक लेकर दो शिकारी फरार, कारतूस-चाकू के साथ दो गिरफ्तार

- आधी रात वन विकास निगम के जंगल में शिकारियों की आमद

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हिरासत में शिकार के दो आरोपी व बाइक सहित हथियार।

हिरासत में शिकार के दो आरोपी व बाइक सहित हथियार।

सिवनी. राज्य वन विकास निगम लिमिटेड बरघाट परियोजना मण्डल सिवनी के परिक्षेत्र पांडिया छपारा अंतर्गत घने जंगल में आधी रात शिकार करने पहुंचे दो आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि दो अंधेरे का फायदा उठाकर बाइक से फरार हो गए। अहम बात है कि दो मोटरसाइकिल पर सवार चार आरोपी वन्यप्राणी का शिकार करने के लिए बंदूक, चाकू, कुल्हाड़ी जैसे हथियार लेकर जंगल में पहुंचे थे। तभी इनका सामना अचानक गश्ती कर रहे वनकर्मियों के दल से हो गया।


पांडिया छपारा परिक्षेत्र का गश्ती दल 14-15 मई की रात करीब 2.30 बजे गश्ती पर था। तभी सुआ बीट के ग्राम टकटुआ के पास पंडरापानी की ओर से दो मोटर साइकिल सवार आते हुए दिखाई दिए। गश्ती दल ने आगे चल रही बाइक सवार दो लोगों को रोककर पूछताछ किया, तो पीछे चल रहे दूसरे मोटरसाइकिल सवार वहां से फरार हो गए। मोटरसाइकिल सवार दोनों लोग कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, तब उनकी तलाशी ली गई। उनके पस से एक जिंदा कारतूस, तीन धारदार चाकू, एक कुल्हाड़ी, दो खाली बोरियां, दो खाली थैला, एक टार्च एवं एक मोटर साइकिल बरामद की गई है। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम सलीम पिता नब्बू खान निवासी जनमखारी एवं नंदकिशोर पिता बाबूलाल निवासी जनमखारी तहसील बरघाट का होना बताया।


पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि दूसरी मोटरसाइकिल में जो दो लोग फरार हुए हैं, उनके पास बंदूक और दूसरी सामग्री है। जिससे वे जंगल में वन्यप्राणी का शिकार करने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही उन्हें पकड़ लिया गया। अब वन अमला फरार हुए दोनों आरोपियों की तलाश में जुटा है। संभागीय उप प्रबंधक अनिल कुमार क्षत्रिय के निर्देशन पर परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी एचएल दाहिया ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों के विरूद्ध वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण कायम कर न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई में परिक्षेत्र पांडिया छपारा के वनपाल बीएल आर्मो, वनरक्षक बीआर सिरसाम, बाबूलाल, तामसिंह, गिरधर, तेजसिंह, सियालाल, नेतराम, संतकुमार व सुरक्षा श्रमिकों का अहम सहयोग रहा।


रही है तस्करों-शिकारियों की नजर
परिक्षेत्र पांडिया छपारा पिछले कुछ वर्षों से सागौन तस्करों, शिकारियों के लिए काफी आसान टारगेट रहा है। यहां से पूर्व में कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जो बताते हैं कि यहां बड़ी मात्रा में सागौन तस्कर सक्रिय हैं। हालात यहां तक बनते रहे हैं कि जब कभी सागौन तस्कर पकड़े गए, तो उनको छुड़ाने के लिए दूसरे ग्रामीणों के साथ तस्करों ने वन अमले पर दवाब बनाया। विभाग के काटकर रखे गए कूप तक से सागौन की चोरी होना और बड़ी मात्रा में क्षेत्र के मकानों से बरामदगी होने पर भी वन अपराध नहीं रूक रहे हैं। पूर्व में वन अपराधियों से सांठ-गांठ के आरोप में वन रक्षक को भी हटाया जा चुका है।

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