
चपरासियों के भरोसे छात्रावास (Photo Source- Patrika)
Student Harassment: सुकमा जिले के गादीरास स्थित प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास में व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालने वाले अधीक्षक की कथित लापरवाही के चलते संचालन चपरासियों के भरोसे चल रहा है। अधीक्षक की नियमित अनुपस्थिति और विद्यार्थियों से कराए जा रहे कार्यों ने छात्रावास की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि अधीक्षक रोजाना सुबह और शाम करीब एक-एक घंटे ही छात्रावास पहुंचते हैं, जबकि शेष समय विद्यार्थियों की देखरेख की जिम्मेदारी चपरासियों के भरोसे रहती है।
नियमानुसार छात्रावास अधीक्षक को विद्यार्थियों की देखरेख, भोजन, स्वास्थ्य और अन्य व्यवस्थाओं के लिए निर्धारित समय तक उपस्थित रहना चाहिए। लेकिन यहां अधीक्षक जिला मुख्यालय सुकमा से रोजाना आना-जाना कर रहे हैं। गादीरास जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर है। ऐसे में उनकी अनुपस्थिति में बच्चों की पढ़ाई और दैनिक समस्याओं की निगरानी कौन कर रहा है, यह सवाल उठ रहा है।
विद्यार्थियों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि माता-पिता उन्हें पढ़ाई के लिए छात्रावास भेजते हैं, लेकिन यहां भी कामकाज में लगा दिया जाता है। जंगल से लकड़ी लाने और अन्य जिम्मेदारियां सौंपने के कारण उनकी पढ़ाई छूट रही है। छात्रों ने मांग की है कि छात्रावास में अधीक्षक की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और विद्यार्थियों से इस तरह के काम कराने पर रोक लगाई जाए।
छात्रावास की सबसे चिंताजनक स्थिति विद्यार्थियों से लकड़ी मंगवाने के मामले में सामने आई है। वेको जोगा सहित अन्य छात्रों ने बताया कि सोमवार को कक्षा दसवीं में पढऩे वाले करीब 8 से 10 विद्यार्थियों को स्कूल भेजने के बजाय लकड़ी लेने जंगल रवाना किया गया। विद्यार्थी ट्रैक्टर के साथ जंगल पहुंचे और वहां से लकडिय़ां भरकर छात्रावास लाए। लकड़ी लाने के कारण विद्यार्थियों को स्कूल से भी अनुपस्थित रहना पड़ा, जिससे उनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
छात्रों का कहना है कि उनके माता-पिता ने घर के कामकाज से दूर रखकर उन्हें छात्रावास में इसलिए भेजा है, ताकि वे बेहतर तरीके से पढ़ाई कर अपना भविष्य बना सकें। लेकिन यहां पढ़ाई के बजाय उनसे लकड़ी लाने सहित अन्य काम करवाए जा रहे हैं। आरोप है कि ऐसे कामों से मना करने पर उन्हें डांट सुननी पड़ती है। लगातार ऐसी स्थिति बनने से कई विद्यार्थी अपनी परेशानी बताने से भी कतराने लगे हैं।
गौरतलब है कि जिले के छात्रावासों में अव्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर पिछले दिनों छात्र संघ ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर नाराजगी जाहिर की थी। इस दौरान सहायक आयुक्त के खिलाफ भी विद्यार्थियों में आक्रोश देखने को मिला था। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जिले के आश्रम-छात्रावासों का अधिकारियों से निरीक्षण भी कराया था। इसके बावजूद गादीरास छात्रावास की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।
छात्रावास में भोजन तैयार करने के लिए आवश्यक लकड़ी तक विद्यार्थियों को जंगल से लानी पड़ रही है। सवाल यह है कि छात्रावास संचालन के लिए जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करना विभाग और प्रबंधन की जिम्मेदारी है या फिर बच्चों को जंगल भेजकर यह काम कराया जाएगा? ट्रैक्टर के साथ जंगल जाने के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? यदि लकड़ी लाने के दौरान कोई दुर्घटना होती है तो जवाबदेही कौन तय करेगा?
अब जरूरत केवल निरीक्षण की औपचारिकता पूरी करने की नहीं, बल्कि छात्रावास में अधीक्षक की उपस्थिति, विद्यार्थियों से कराए जा रहे कार्यों और स्कूल में उनकी नियमित उपस्थिति की निष्पक्ष जांच की है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि छात्रावास के लिए लकड़ी और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था विभागीय स्तर पर क्यों नहीं की जा रही है।
हेमंत सिन्हा, सहायक आयुक्त के अनुसार मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
4 Nov 2026, 11:57 AM IST
Published on:
4 Nov 2026, 11:57 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.