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नेपाल की संसद में पहले दिन ही बवाल, पूर्व PM ओली की गिरफ्तारी पर भिड़े नेता

नेपाल में हाल ही में हुए चुनाव के बाद नई सरकार बनने पर आज संसद का पहला सत्र शुरू हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी के मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा हुआ।

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भारत

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Mukul Kumar

Apr 02, 2026

नेपाल की संसद। (फोटो- IANS)

नेपाल में कुछ ही दिनों पहले चुनाव हुए। इसके बाद नई सरकार बनी। आज पहली बार संसद में चुने गए नए प्रतिनिधियों का जुटान हुआ। इस दौरान सदन में जमकरहंगामा हुआ।

पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी का मुद्दा संसद के पहले ही सत्र में छा गया। एक तरफ विपक्ष चिल्लाया कि यह साजिश है, दूसरी तरफ सत्ता पक्ष ने कहा कि शहीदों की माओं को इंसाफ मिलना ही चाहिए।

ओली को क्यों गिरफ्तार किया गया?

पिछले साल सितंबर में नेपाल में Gen-Z आंदोलन हुआ था। यह आंदोलन उसी तरह का था जैसा बांग्लादेश में हुआ था। इस आंदोलन को दबाने के दौरान 77 लोगों की जान गई और 84 अरब नेपाली रुपये से ज्यादा की सरकारी और निजी संपत्ति बर्बाद हुई।

संसद की इमारत जलाई गई, सिंहदरबार जो नेपाल सरकार का मुख्य प्रशासनिक केंद्र है, उसमें भी आग लगाई गई। 28 मार्च को पूर्व प्रधानमंत्री ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को इसी मामले में गैर इरादतन हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

संसद में विपक्ष ने क्या कहा

CPN-UML के संसदीय दल के नेता राम बहादुर थापा बादल ने कहा कि ओली की गिरफ्तारी गैरकानूनी है और यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। उन्होंने नेपाल की सेना, नौकरशाही और पिछली सरकार पर भी निशाना साधा।

साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि RSP की बड़ी जीत के पीछे AI, एल्गोरिदम और गोएबल्स शैली के प्रचार का हाथ था। नेपाली कांग्रेस के सांसद विश्मा राज अम्डेन्गे ने सवाल उठाया कि 9 सितंबर को जो हिंसा हुई उसकी जांच क्यों नहीं हो रही। संसद भवन किसने जलाया, सिंहदरबार में आग किसने लगाई, इन सवालों का जवाब कौन देगा।

सत्ता पक्ष का जवाब, यह बदला नहीं इंसाफ है

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानी RSP के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने साफ कहा कि शहीदों की माओं को इंसाफ मिलना उनका पहला अधिकार है और इसे बदले की कार्रवाई नहीं माना जाना चाहिए।

लामिछाने ने यह भी कहा कि पहले कानून इस तरह बदले जाते थे कि सत्ता में बैठे लोग बचें और विपक्ष फंसे। यह गलत परंपरा अब बदली जाएगी। उन्होंने वादा किया कि विपक्ष के खिलाफ कोई बदले की भावना नहीं रखी जाएगी।

गौरतलब है कि 5 मार्च के चुनाव में RSP ने 275 में से 182 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने का कारनामा किया जबकि पुरानी पार्टियां बुरी तरह पिट गईं।

दलित समुदाय से सार्वजनिक माफी, पहली बार हुआ ऐसा

संसद के इस पहले सत्र में एक और ऐतिहासिक पल आया। लामिछाने ने सदन में खड़े होकर दलित समुदाय से सदियों के भेदभाव के लिए सार्वजनिक माफी मांगी।

उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब कोई सरकार इस सदन से खड़े होकर दलितों के साथ हुए अन्याय के लिए माफी मांग रही है। और यह माफी सिर्फ शब्दों तक नहीं रहेगी बल्कि इसकी कीमत इंसाफ देकर चुकाई जाएगी।

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