
मानसून में मच्छर के काटने से डेंगू और चिकनगुनिया (photo- freepik)
Dengue vs Chikungunya: बरसात या गर्मी के मौसम में मच्छर काटते ही हमारे दिमाग में सबसे पहला डर डेंगू या चिकनगुनिया का आता है। ये दोनों बीमारियाँ देखने और सुनने में एक जैसी लगती हैं दोनों में तेज बुखार होता है, शरीर टूटता है और मच्छर के काटने से ही ये फैलती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मच्छर की प्रजाति बदलते ही या वायरस में थोड़ा सा बदलाव आते ही इन बीमारियों के फैलने की रफ्तार और तरीका पूरी तरह बदल जाता है? नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के एक शोध से यह बात साफ होती है कि ये दोनों बीमारियां दिखने में भले एक जैसी लगें, लेकिन इनके लक्षण, शरीर पर असर और फैलने की क्षमता में काफी फर्क होता है। आइए इसे समझते हैं।
अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की रिपोर्ट के मुताबिक, डेंगू और चिकनगुनिया दोनों मुख्य रूप से 'एडीज' (Aedes) नाम के मच्छर के काटने से फैलते हैं। लेकिन इसमें दो प्रजातियां सबसे खास हैं एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) और एडीज एल्बोपिक्टस (Aedes albopictus)।एडीज एजिप्टी शहरी इलाकों में ज्यादा रहता है और यह डेंगू फैलाने में बहुत तेज़ होता है। वहीं, एडीज एल्बोपिक्टस जिसे हम एशियाई टाइगर मच्छर भी कहते हैं, थोड़ा सख्त मिजाज का होता है और ग्रामीण व ठंडे इलाकों में भी टिक जाता है। NCBI के एक शोध में पाया गया कि चिकनगुनिया के वायरस ने खुद में एक छोटा सा बदलाव (म्यूटेशन) किया, जिसके बाद यह एडीज एल्बोपिक्टस मच्छर के अंदर बहुत तेजी से (मात्र 2 से 6 दिन में) पनपने लगा। मच्छर के बदलते ही चिकनगुनिया के फैलने की रफ्तार काफी बढ़ गई, जबकि डेंगू का वायरस मच्छर के अंदर पनपने में 8 से 12 दिन का समय लेता है।
CDC की गाइडलाइंस के अनुसार, दोनों बीमारियों में शुरुआत तेज़ बुखार से ही होती है, लेकिन आगे चलकर शरीर पर इनका असर अलग होता है;
डेंगू (प्लेटलेट्स)- डेंगू से संक्रमित 25% (4 में से 1) लोगों में ही बीमारी के लक्षण उभरते हैं। लेकिन डेंगू में खतरा ज्यादा होता है। इसमें आँखों के पीछे दर्द, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन और त्वचा पर लाल चकत्ते (Rash) होते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि डेंगू में खून की प्लेटलेट्स तेजी से गिरती हैं, जिससे शरीर के अंदर ब्लीडिंग (रक्तस्राव) का खतरा बन जाता है।
क्या डेंगू या चिकनगुनिया दोबारा हो सकता है? इसका जवाब दोनों बीमारियों के लिए अलग है;
चिकनगुनिया- चिकनगुनिया का वायरस एक ही मुख्य टाइप का होता है। CDC के मुताबिक, अगर आपको एक बार चिकनगुनिया हो गया, तो आपका शरीर इसके खिलाफ जीवनभर के लिए इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) बना लेता है। यानी यह बीमारी दोबारा आमतौर पर नहीं होती।
डेंगू- डेंगू के 4 अलग-अलग स्ट्रेन (प्रकार) होते हैं। अगर आपको एक प्रकार का डेंगू हुआ है, तो आपको केवल उसी स्ट्रेन से जिंदगी भर के लिए सुरक्षा मिलेगी। बाकी 3 प्रकार के डेंगू वायरस से आपको फिर से संक्रमण हो सकता है। असल में, दूसरी बार डेंगू होना पहली बार से ज्यादा खतरनाक और गंभीर साबित हो सकता है।
दोनों ही बीमारियां वायरस (विषाणु) से होती हैं, इसलिए इनकी कोई सीधी एंटीबायोटिक दवा नहीं है। दोनों का इलाज लक्षणों के आधार पर ही किया जाता है, जैसे सही आराम करना और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) न होने देना। लेकिन CDC एक बहुत ज़रूरी चेतावनी देता है जब तक डॉक्टर यह तय न कर लें कि बीमारी डेंगू है या चिकनगुनिया, तब तक गलती से भी डिस्प्रिन, एस्पिरिन, आइबूप्रोफेन जैसी दर्द निवारक (NSAIDs) दवाएं न लें। डेंगू में ये दवाएं लेने से ब्लीडिंग का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। बुखार और दर्द कम करने के लिए केवल पैरासिटामोल का इस्तेमाल करना सुरक्षित माना जाता है।
Published on:
08 Oct 2026 09:00 am
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