
नाखून चबाने, बाल खींचने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Gemini)
Habit Reversal Training: हममें से बहुत से लोग अनजाने में कोई न कोई ऐसी आदत पाल बैठते हैं, जो धीरे-धीरे हमारे नियंत्रण से बाहर हो जाती है। तनाव या खाली समय में नाखून चबाना, सिर या भौहों के बाल खींचना, त्वचा को खरोंचना या उंगलियों की खाल छीलना जैसी हरकतें कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन जाती हैं। पहली नजर में यह साधारण सी बुरी आदतें लगती हैं, लेकिन समय के साथ यह त्वचा में घाव, बाल कम होने और मानसिक परेशानी का कारण बन सकती हैं। यदि आप या आपके घर का कोई सदस्य ऐसी आदतों से जूझ रहा है और बार-बार कोशिश करने के बाद भी इन्हें छोड़ नहीं पा रहा है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। डॉक्टरी भाषा में इसे बॉडी-फोोकस्ड रिपेटिटिव बिहेवियर (BFRBs) कहा जाता है। ऐसी आदतों से छुटकारा पाने में हैबिट रिवर्सल ट्रेनिंग (Habit Reversal Training - HRT) बेहद मददगार साबित होती है।
वेबएमडी (WebMD) के अनुसार, हैबिट रिवर्सल ट्रेनिंग एक तरह की व्यवहार संबंधी थेरेपी (Behavioral Therapy) है। आसान शब्दों में कहें तो यह दिमाग को पुरानी अनजानी आदत को भूलकर एक नई और सुरक्षित आदत अपनाने की ट्रेनिंग देती है। जब हम तनाव में होते हैं या बोर हो रहे होते हैं, तो हमारा दिमाग बिना सोचे-समझे हाथ को मुंह तक (नाखून चबाने के लिए) या बालों तक ले जाता है। हैबिट रिवर्सल ट्रेनिंग का मुख्य मकसद व्यक्ति को अपनी इन हरकतों के प्रति जागरूक बनाना और उस वक्त हाथ को किसी दूसरी सुरक्षित गतिविधि में व्यस्त करना है।
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, हैबिट रिवर्सल ट्रेनिंग मुख्य रूप से 3 से 4 आसान चरणों में काम करती है;
थेरेपी का सबसे पहला नियम है अपनी आदत को पहचानना। अक्सर लोग अनजाने में ही नाखून चबाने या बाल खींचने लगते हैं। इस चरण में व्यक्ति यह नोटिस करना सीखता है कि वह कब और किन परिस्थितियों में ऐसा कर रहा है। उदाहरण के लिए— क्या टीवी देखते समय, पढ़ाई करते समय या तनाव महसूस होने पर हाथ खुद-ब-खुद उठने लगता है?
जब आपको यह अहसास हो जाए कि आपकी उंगलियां बालों या नाखूनों की तरफ जा रही हैं, तो तुरंत अपने हाथों को किसी ऐसी हरकत में व्यस्त कर लें जो उस बुरी आदत को रोक दे। अगर आप नाखून चबाते हैं, तो मुट्ठी बंद करके हाथ नीचे कर लें या हाथों को आपस में बांध लें। अगर बाल खींचते हैं, तो हाथों में कोई बॉल या स्ट्रेस टॉय पकड़ लें। ऐसी नई गतिविधि कम से कम 1 मिनट तक करनी होती है ताकि वह अनजानी तलब शांत हो जाए।
ऐसी आदतें अक्सर तनाव, चिंता या घबराहट में ज्यादा बढ़ती हैं, इसलिए थेरेपिस्ट गहरी सांस लेने (Deep Breathing), ध्यान (Meditation) और मांसपेशियों को आराम देने की तकनीक सिखाते हैं। इससे मन शांत रहता है और आदत दोहराने की इच्छा कम होती है।
इस ट्रेनिंग में परिवार के लोगों या दोस्तों को भी शामिल किया जाता है। जब वे मरीज को पुरानी आदत दोहराते देखें, तो डांटने के बजाय प्यार से याद दिलाएं कि उन्हें अपनी नई सुरक्षित गतिविधि (जैसे मुट्ठी बंद करना) करनी है।
हैबिट रिवर्सल ट्रेनिंग केवल बड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों के लिए भी काफी असरदार है। यह निम्नलिखित समस्याओं में विशेष रूप से काम आती है;
हैबिट रिवर्सल ट्रेनिंग का असर रातों-रात नहीं दिखता। इसके लिए निरंतर अभ्यास और धैर्य की जरूरत होती है। कुछ लोगों को 2 से 3 हफ्तों में सुधार दिखने लगता है, जबकि कुछ मामलों में कुछ महीनों का समय लग सकता है। यदि यह समस्या आपके दैनिक जीवन या आत्मविश्वास को प्रभावित कर रही है, तो किसी मनोवैज्ञानिक या थेरेपिस्ट की सलाह लेकर हैबिट रिवर्सल ट्रेनिंग शुरू करना एक बेहद सुरक्षित और कारगर कदम हो सकता है।
Published on:
07 Oct 2026 09:30 am
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