
सामान्य इडियोवेंट्रिकुलर रिदम क्या होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Idioventricular Rhythm Symptoms: एक स्वस्थ इंसान का दिल एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कता है। यह धड़कन हमारे दिल के ऊपरी हिस्से में मौजूद एक प्राकृतिक पेसमेकर (SA Node) के जरिए नियंत्रित होती है। लेकिन जब किसी वजह से यह मुख्य पेसमेकर सिग्नल भेजना बंद कर दे या सिग्नल नीचे तक न पहुंच पाए, तो दिल का निचला हिस्सा (वेंट्रिकल) खुद ही धड़कन बनाने की जिम्मेदारी उठा लेता है। चिकित्सा विज्ञान में इसी स्थिति को इडियोवेंट्रिकुलर रिदम (Idioventricular Rhythm - IVR) कहा जाता है। जब यह स्थिति बनती है, तो दिल की धड़कन घटकर 50 या उससे भी कम (20 से 40 बीट प्रति मिनट) हो जाती है। आइए जानते हैं कि ऐसा किस कारण से होता है?
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के मुताबिक, हमारा दिल एक दो-मंजिला इमारत की तरह है। ऊपर की मंजिल (एट्रियम) मुख्य बिजलीघर है जो पूरे दिल को सिग्नल भेजती है। जब ऊपर का बिजलीघर काम करना बंद कर देता है, तो नीचे की मंजिल (वेंट्रिकल) अपना खुद का बैकअप जनरेटर चालू कर लेती है। इस बैकअप जनरेटर की क्षमता कम होती है, इसलिए दिल बहुत धीमी गति से धड़कता है। मेडिकल भाषा में इसके दो मुख्य रूप देखने को मिलते हैं;
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, यह स्थिति तब पैदा होती है जब दिल की मुख्य इलेक्ट्रिकल प्रणाली में कोई रुकावट या खराबी आ जाती है। इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं;
कई बार लोगों को यह रिदम होने पर कोई परेशानी महसूस ही नहीं होती और यह अपने आप ठीक भी हो जाती है। लेकिन अगर दिल की धड़कन बहुत ज्यादा धीमी हो जाए और शरीर के अंगों तक पर्याप्त खून न पहुंचे, तो ये लक्षण दिख सकते हैं;
अगर किसी व्यक्ति की धड़कन लगातार 50 से कम रहती है, तो डॉक्टर सबसे पहले ईसीजी (ECG) टेस्ट करते हैं। ईसीजी की रिपोर्ट में दिल की धड़कन की बनावट देखकर डॉक्टर तुरंत पहचान लेते हैं कि यह इडियोवेंट्रिकुलर रिदम है या नहीं। ज्यादातर मामलों में (विशेषकर AIVR में) यह स्थिति बिना किसी दवा के अपने आप ठीक हो जाती है, इसलिए डॉक्टर सिर्फ मरीज की निगरानी करते हैं। अगर यह किसी दवा की वजह से हुआ है तो डॉक्टर उस दवा को बदल देते हैं। पोटेशियम या इलेक्ट्रोलाइट्स की गड़बड़ी को सही किया जाता है। अगर धड़कन बहुत ज्यादा गिर गई है और मरीज को चक्कर या बेहोशी आ रही है, तो धड़कन बढ़ाने वाली दवाएं दी जाती हैं या फिर दिल में पेसमेकर (Pacemaker) लगाया जाता है ताकि धड़कन सामान्य बनी रहे।
अगर आपको या आपके परिवार में किसी को अचानक चक्कर आने की शिकायत हो, सांस लेने में दिक्कत हो, या धड़कन बहुत धीमी महसूस हो रही हो, तो बिना देर किए कार्डियोलॉजिस्ट (दिल के डॉक्टर) से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर जांच कराने से दिल की इस समस्या को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
Published on:
30 Sept 2026 07:00 am
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