
सोशल मीडिया पर वायरल हेल्थ टिप्स कितने सही होते हैं- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Chatgpt)
PMOS And Social Media Trends Hindi: आजकल सोशल मीडिया का दौर है। अगर आप इंस्टाग्राम या यूट्यूब खोलें, तो 15 से 30 सेकंड की रील्स में चेहरे के अनचाहे बालों को हटाने से लेकर, अनियमित पीरियड्स और प्रेगनेंसी से जुड़े दर्जनों नुस्खे चुटकियों में मिल जाते हैं। कभी जिन बातों पर लड़कियां और महिलाएं धीमी आवाज में बात करने से हिचकती थीं, आज वही मुद्दे जैसे PCOD (जिसे अब PMOS यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम भी कहा जाता है) खुलकर चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं।
इंटरनेट ने महिलाओं को अपनी सेहत के प्रति जागरूक तो बनाया है, लेकिन इसके साथ ही एक नया ट्रेंड शुरू हो गया है रील देखकर खुद का इलाज करना (Self-Treatment)। आइए स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों डॉ. सीमा गोयल, डॉ. शैलजा अग्रवाल और डॉ. सीमंतनी सरकार की पत्रिका के साथ खास बातचीत के अनुसार जानते हैं कि वायरल वीडियो देखकर नुस्खे आजमाने से पहले आपको किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिसर्च के अनुसार, सोशल मीडिया पर PMOS से जुड़े वीडियो और पोस्ट को लाखों लोग देख रहे हैं, जिनमें ज्यादातर चर्चा वजन कम करने और डाइट पर होती है। लोग डॉक्टरों के अलावा सोशल मीडिया से PMOS की बहुत जानकारी ले रहे हैं, इसलिए यह समझना जरूरी है कि वहां सही जानकारी मिल रही है या भ्रम फैलाया जा रहा है।
हर महिला की उम्र, उसके शरीर के हार्मोन, गर्भावस्था का समय और मेडिकल हिस्ट्री पूरी तरह अलग होती है। इसलिए जो नुस्खा या सप्लीमेंट रील में किसी एक महिला के लिए असरदार दिख रहा है, जरूरी नहीं कि वह दूसरी महिला के लिए भी सुरक्षित हो। बिना जांच के कोई भी दवा या डाइट शुरू करना नुकसानदेह साबित हो सकता है।
डॉ. सीमा गोयल के अनुसार, रील्स से महिलाओं की सेहत को लेकर जागरूकता तो बढ़ी है, जो कि एक अच्छी बात है।समस्या तब होती है जब लोग वीडियो देखकर बिना डॉक्टर की सलाह के खुद ही दवाइयां या नुस्खे आजमाने लगते हैं। आपकी उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और रिपोर्ट के हिसाब से इलाज तय होता है, इसलिए जो नुस्खा दूसरों के लिए सही है, वह आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।
डॉ. शैलजा अग्रवाल के अनुसार, सोशल मीडिया पर महिलाओं की सेहत को लेकर कई तरह के भ्रम (Myth) फैलाए जाते हैं। आइए उनकी सच्चाई समझें;
1. पीरियड टालने या लाने की दवा खुद ले लेना- बिना डॉक्टर से पूछे हार्मोनल दवाइयां लेना शरीर का संतुलन बिगाड़ सकता है।
2. PCOS सप्लीमेंट्स से बीमारी का जड़ से सफाया- कोई भी सप्लीमेंट चमत्कारिक इलाज नहीं होता। इलाज हमेशा महिला के वजन, इंसुलिन और हार्मोनल रिपोर्ट के हिसाब से तय होता है।
3. प्रेगनेंसी में यूट्यूब देखकर योगासन करना-हाई बीपी, ब्लीडिंग या हाई-रिस्क प्रेगनेंसी जैसी स्थितियों में बिना विशेषज्ञ की निगरानी के व्यायाम करना माँ और बच्चे दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
4. नॉर्मल डिलीवरी के लिए घरेलू नुस्खे या अरंडी का तेल (Castor Oil) पीना- ऐसे वायरल लेबर हैक्स समय से पहले प्रसव या डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
5. फाइब्रॉयड का मतलब सीधा ऑपरेशन- हर फाइब्रॉयड में सर्जरी की जरूरत नहीं होती, कई मामलों में केवल नियमित जांच ही काफी होती है।
डॉक्टरों का मानना है कि सोशल मीडिया को सिर्फ जानकारी और जागरूकता का जरिया मानें, इलाज का विकल्प नहीं। अगर आपको पीरियड्स से जुड़ी समस्या है, चेहरे पर बाल बढ़ रहे हैं या वजन तेजी से बदल रहा है, तो रील्स पर सप्लीमेंट्स ढूंढने के बजाय डॉक्टर से मिलें। अगर कोई लक्षण लंबे समय तक बना रहे या बार-बार परेशान करे, तो खुद से एंटीबायोटिक या हार्मोनल गोलियां कभी न लें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Updated on:
07 Aug 2026 12:54 pm
Published on:
07 Aug 2026 12:36 pm
