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World Heart Day 2026: डिजिटल दौर में दिल की सेहत, हृदय रोग विशेषज्ञ से जानें कैसे मोबाइल से टेलीमेडिसिन तक बदल रही है हार्ट केयर की तस्वीर

World Heart Day 2026 पर वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत चतुर्वेदी और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन से जानिए कैसे डिजिटल हेल्थ, AI, एम-हेल्थ, वेयरेबल डिवाइस और टेलीमेडिसिन की मदद से दिल की बीमारियों की पहचान और इलाज आसान हो रहा है।
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भारत

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Nidhi Yadav

•

Sep 29, 2026

World Heart Day digital health tools for early detection and treatment of heart disease

डिजिटल हेल्थ, AI, एम-हेल्थ, वेयरेबल डिवाइस और टेलीमेडिसिन दिल की सेहत के लिए कैसे फायदेमंद हो सकते हैं- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- gemini)

World Heart Day 2026: हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे (World Heart Day) यानी विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे का मुख्य मकसद लोगों को दिल की बीमारियों के प्रति जागरूक करना है। वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मिलकर इस दिन कई तरह के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं। ये आंकड़े हमें डराने के लिए नहीं, बल्कि सतर्क करने के लिए हैं। आंकड़ों की मानें तो दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों में से 31% मौतें अकेले दिल की बीमारियों की वजह से होती हैं। वहीं, पूरी दुनिया में लगभग 1.4 बिलियन लोग हाई बीपी (हाइपरटेंशन) की समस्या से जूझ रहे हैं। यह स्थिति बताती है कि हृदय रोग आज महामारी से भी अधिक गंभीर रूप ले चुके हैं।

किसी भी बीमारी से बचाव का सबसे पहला कदम है उसे सही तरीके से समझना। जब तक लोगों को दिल की सेहत के बारे में नहीं समझाया जाएगा, तब तक जागरूकता फैलाना मुमकिन नहीं है। आज के डिजिटल दौर में, जहां हमारा लगभग हर काम तकनीक पर निर्भर हो चुका है, वहीं दिल की देखभाल और इलाज में भी डिजिटल हेल्थ (Digital Health) एक बहुत बड़ी ताकत बनकर उभरी है। मोबाइल, ई-हेल्थ, वेयरेबल डिवाइस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अब दिल का ख्याल रखना और समय पर इलाज पाना बहुत आसान हो गया है। आइए वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. हेमंत चतुर्वेदी से समझते हैं कि डिजिटल तकनीक किस तरह हमारे दिल को सुरक्षित रखने में मददगार साबित हो रही है।

1. एम-हेल्थ (m-Health): मोबाइल से तुरंत इलाज की सुविधा

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, आज स्मार्टफोन सिर्फ बात करने का जरिया नहीं, बल्कि सेहत की आपातकालीन सेवा बन चुका है। टेक्स्ट मैसेज और वॉट्सएप के जरिए इमरजेंसी के समय मरीज की जान बचाना आसान हो गया है। विशेषज्ञ का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति के सीने में अचानक दर्द उठता है, तो वह नजदीकी सेंटर से ईसीजी या एक्स-रे करवाकर उसकी फोटो सेकंडों में डॉक्टर को वॉट्सएप पर भेज सकता है। इसके अलावा, मरीज अपने ब्लड प्रेशर और पल्स का डेटा भी घर बैठे डॉक्टर के साथ शेयर कर सकता है। कोरोना काल और लॉकडाउन के दौरान भी एम-हेल्थ ने डॉक्टरों और मरीजों को जोड़े रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी। मोबाइल ऐप्स की मदद से लोग अब अपने खान-पान (न्यूट्रीशन) और कैलोरी पर भी नजर रख सकते हैं। वर्कआउट और एक्सरसाइज के लिए भी कई तरह के ऐप्स मौजूद हैं, जो दिल को मजबूत रखने के लिए सही वर्कआउट चुनने में मदद करते हैं।

2. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): पहले ही जान लें दिल का जोखिम

कार्डियोलॉजी यानी दिल के इलाज के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। यह तकनीक दिल की ऑटोमैटिक इमेजिंग करने, रिपोर्ट की सटीकता सुधारने और मरीज को भविष्य में हार्ट अटैक या दिल की बीमारी का कितना खतरा है, इसका पहले से आकलन करने में बेहद कारगर साबित हो रही है।

3. ई-हेल्थ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस: धड़कन को सामान्य रखने वाले उपकरण

जब दिल की धड़कनें अचानक बंद हो जाती हैं या उनमें गंभीर गड़बड़ी आती है, तो उसे सडन कार्डियक अरेस्ट कहते हैं। ऐसी स्थिति में जान बचाने के लिए बैटरी से चलने वाले आईसीडी (ICD) डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है, जो दिल की धड़कन पर नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत इलेक्ट्रिक शॉक देकर धड़कन को सामान्य करते हैं। अगर दिल का इलेक्ट्रिकल सिस्टम खराब हो जाए और वह ठीक से पंप न कर पा रहा हो, तो पेसमेकर (Pacemaker) जैसी डिवाइस लगाई जाती है। वहीं, जिन मरीजों में दिल की पंपिंग क्षमता बहुत कमजोर हो जाती है (हार्ट फेलियर), उनके लिए सीआरटी (CRT) कंप्यूटराइज्ड डिवाइस काम आती है जो दिल की धड़कनों का तालमेल सही करके उसकी पंपिंग क्षमता बढ़ाती है। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड के जरिए मरीज का पूरा मेडिकल इतिहास डिजिटल तरीके से सुरक्षित रहता है, जिसे कहीं भी देखा जा सकता है।

4. वेयरेबल डिवाइस (Wearable Devices): पहनने वाले आधुनिक उपकरण

जिन मरीजों का दिल बेहद कमजोर हो जाता है और जिन्हें तुरंत हार्ट ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है, उन्हें नया दिल मिलने तक एक खास पोर्टेबल डिवाइस दी जाती है जिसे एलवीएडी (LVAD) कहते हैं। मरीज इसकी बैटरी को एक वेयरेबल डिवाइस की तरह पहनकर आसानी से अपनी दिनचर्या चला सकते हैं। इसके अलावा, ऐसे वेयरेबल ग्लव्स (दस्ताने) भी आ चुके हैं जिन्हें सीने पर लगाने से दिल की धड़कन का डेटा ब्लूटूथ के जरिए डॉक्टर के कंप्यूटर स्क्रीन पर दूर बैठे भी देखा जा सकता है।

5. टेलीमेडिसिन (Telemedicine): छोटे शहरों और गांवों के लिए वरदान

हमारे देश के कई ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में आज भी सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। ऐसे में टेलीमेडिसिन किसी वरदान से कम नहीं है। इसके जरिए दूरदराज के गांवों में रहने वाले मरीज भी बड़े शहरों के विशेषज्ञ डॉक्टरों से ऑनलाइन परामर्श ले पाते हैं और गंभीर बीमारियों की समय पर जांच और इलाज संभव हो पाता है।

6. इलेक्ट्रॉनिक सेंसर्स और स्मार्टवॉच: अनियमित धड़कनों की समय पर पहचान

हृदय रोग विशेषज्ञ के अनुसार, दिल की धड़कनों में होने वाली उतार-चढ़ाव को पकड़ने के लिए हॉल्टर मॉनिटरिंग (24 से 48 घंटे के लिए), ईएलआर (1 हफ्ते तक) और आईएलआर (6 महीने तक) जैसी सेंसर डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है। आजकल तो आम स्मार्टवॉच और मोबाइल में भी हार्ट रेट सेंसर आ चुके हैं, जो आपकी पल्स रेट और धड़कन की लय (नियमित है या अनियमित) बता देते हैं। धड़कन अनियमित होने पर दिल में खून के थक्के (ब्लड क्लॉट) बनने का खतरा रहता है, जो दिमाग में पहुंचकर ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं। अगर सेंसर के जरिए समय पर इस अनियमितता का पता चल जाए, तो खून पतला करने की दवा देकर स्ट्रोक के बड़े खतरे को टाला जा सकता है।

7. हार्ट हेल्थ कैलकुलेटर और रिस्क स्कोर: घर बैठे जानें अपने दिल का हाल

अब कोई भी व्यक्ति आसानी से अपने दिल की सेहत का अनुमान लगा सकता है। ऑनलाइन और स्मार्टफोन पर कई तरह के 'हार्ट हेल्थ कैलकुलेटर' उपलब्ध हैं। इसमें अपनी उम्र, वजन, लंबाई और कुछ सामान्य सवालों के जवाब देकर आप अपने दिल की सेहत का स्कोर जान सकते हैं। इससे आने वाले खतरों को पहचानकर समय रहते अपनी जीवनशैली और खान-पान में जरूरी सुधार किए जा सकते हैं।

8. ऑनलाइन आर्टिकल्स, इंटरव्यू और वीडियो से बढ़ती जागरूकता

अखबार और डिजिटल मीडिया कई सालों से सेहत से जुड़ी जानकारियां लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। आजकल प्रमुख अखबारों के ऑनलाइन पोर्टल, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञों के इंटरव्यू और एक्सपर्ट्स के वीडियो इंटरनेट पर आसानी से मिल जाते हैं। इनसे लोगों को दिल की बीमारियों के लक्षण पहचानने और उनसे बचाव के तरीके समझने में बहुत मदद मिल रही है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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