
FDA में कथित वसूली को लेकर सांसद संजय राऊत ने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे पर उठाए सवाल। (फोटो सोर्स-ANI)
FDA Maharashtra:महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर FDA की कार्रवाई लगातार चर्चा में है। मिलावटी खाद्य पदार्थ, गंदे होटल-रेस्टोरेंट और एक्सपायरी सामान के खिलाफ विभाग की कार्रवाई को लेकर राज्यसभा सांसद संजय राउत ने तारीफ की है। लेकिन इसी के साथ उन्होंने FDA के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं।
राऊत ने FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारी लाइसेंस रद्द या निलंबित करने का डर दिखाकर कारोबारियों से कथित तौर पर पैसे मांग रहे हैं। उन्होंने इन शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
सांसद संजय राउत ने अपने पत्र में दावा किया है कि पहले क्लोजिंग नोटिस के नाम पर 10 से 12 हजार रुपए तक लिए जाने की शिकायतें थीं। अब यह रकम कथित तौर पर 75 हजार से 2 लाख रुपए तक पहुंच गई है। उन्होंने बांद्रा स्थित FDA मुख्यालय और ठाणे कार्यालय को लेकर भी सवाल उठाए हैं। राउत का कहना है कि कई कारोबारी लाइसेंस बचाने या वापस लेने के लिए अधिकारियों के दबाव में आने की शिकायत कर रहे हैं।
पत्र में ठाणे के एक अधिकारी पर एक कॉमर्स कंपनी का निलंबित लाइसेंस वापस कराने के बदले 17 से 18 लाख रुपये की कथित वसूली का आरोप लगाया गया है। हालांकि, यह आरोप संजय राउत की ओर से लगाए गए हैं। इन्हें अभी जांच या अदालत से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
राउत ने सोशल मीडिया पर आने वाली शिकायतों को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि अगर किसी होटल या रेस्टोरेंट के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट आती है, तो उसकी सही तरीके से जांच होनी चाहिए। उनके मुताबिक, सिर्फ किसी की शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने के बजाय यह भी देखा जाना चाहिए कि शिकायत सही है या किसी कारोबारी को परेशान करने के लिए की गई है।
राउत ने बांद्रा, ठाणे और दूसरे इलाकों में क्लोजिंग नोटिस से जुड़े मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। साथ ही फर्जी शिकायतों पर कार्रवाई करने और नोटिस, सुनवाई और लाइसेंस निलंबन की तय प्रक्रिया का पालन करने को कहा है।
उन्होंने यह भी मांग की है कि किसी लाइसेंस को निलंबित करने और बाद में बहाल करने की वजह, तारीख और सुनवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए। यानी राउत का सवाल सिर्फ खाद्य सुरक्षा की कार्रवाई को लेकर नहीं है, बल्कि कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के कामकाज और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी है। अब इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।
Updated on:
28 Sept 2026 11:01 am
Published on:
28 Sept 2026 10:40 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
