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रक्षा बजट में बढ़ोतरी! भारत सरकार के आदेश पर बढ़ेगा मिसाइल, अन्य हथियार का उत्पादन

Indo-Pak Tension: सरकार ने स्वदेशी मिसाइलों जैसे ब्रह्मोस, आकाश, और अन्य उन्नत हथियार प्रणालियों के उत्पादन में तेजी लाने के लिए रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों को निर्देश दिए हैं।

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भारत

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Devika Chatraj

May 14, 2025

India Pakistan Conflict: भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के तनावों ने भारत की रक्षा तैयारियों को नई गति दी है। सरकार ने स्वदेशी मिसाइलों जैसे ब्रह्मोस, आकाश, और अन्य उन्नत हथियार प्रणालियों के उत्पादन में तेजी लाने के लिए रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों को निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, मिसाइल भंडार को तत्काल बढ़ाने और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए आपातकालीन उपाय किए जा रहे हैं। इस दिशा में, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने मिसाइलों, ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, और अन्य हथियारों के उत्पादन को तेज करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

रक्षा बजट में बढ़ोतरी की संभावना

भारत सरकार की इन तैयारियों को देखते हुए रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने मिसाइलों और अन्य रक्षा उपकरणों की आपूर्ति के लिए कंपनियों को बड़े पैमाने पर आपातकालीन ऑर्डर जारी किए हैं। एक प्रमुख रक्षा कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने साप्ताहिक आधार पर मिसाइलों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं।

कुछ महीने में पूरे होंगे आर्डर

आमतौर पर, ऐसे बड़े ऑर्डर को पूरा करने में छह महीने से एक साल तक का समय लगता है, लेकिन सरकार ने कंपनियों से इन ऑर्डरों को कुछ महीनों के भीतर पूरा करने की मांग की है। इस त्वरित समयसीमा को पूरा करने के लिए कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करने पर जोर दे रही हैं। इसके लिए अतिरिक्त संसाधनों, श्रमशक्ति, और तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता पड़ रही है।

ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर विशेष ध्यान

आधुनिक युद्ध में ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रणालियों की भूमिका को देखते हुए, रक्षा मंत्रालय ने इन क्षेत्रों में भी अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। मंत्रालय ने ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम बनाने वाली कंपनियों के साथ गहन चर्चा शुरू की है और उनकी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए सहायता प्रदान करने की योजना बनाई है। सूत्रों के अनुसार, अगले कुछ महीनों में इन कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना है।

एंटी-ड्रोन सिस्टम की बढ़ी मांग

ड्रोन प्रौद्योगिकी में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और निजी क्षेत्र की भागीदारी ने इस क्षेत्र में नई संभावनाएं खोली हैं। इसके साथ ही, सीमा पर दुश्मन ड्रोनों को निष्क्रिय करने के लिए एंटी-ड्रोन सिस्टम की मांग भी बढ़ रही है। सरकार इन प्रणालियों को जल्द से जल्द तैनात करने के लिए स्वदेशी और विदेशी तकनीकों का उपयोग करने पर विचार कर रही है।

एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की अतिरिक्त मांग

हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर में रूस निर्मित एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की प्रभावशीलता ने भारत की रक्षा रणनीति को और मजबूत किया है। इस ऑपरेशन के दौरान, एस-400 ने पाकिस्तान के तुर्की निर्मित ड्रोनों और चीन की मिसाइलों को निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सफलता के बाद, भारत ने रूस से इस अत्याधुनिक हवाई रक्षा प्रणाली की अतिरिक्त यूनिट्स की मांग की है।

सूत्रों के अनुसार, भारत का यह आग्रह रूस द्वारा जल्द ही स्वीकार किए जाने की उम्मीद है। एस-400 की तैनाती ने भारत की हवाई रक्षा को अभेद्य बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, और अतिरिक्त यूनिट्स की आपूर्ति से यह क्षमता और बढ़ेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस सिस्टम की मौजूदगी ने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को भारत के पक्ष में झुका दिया है।

स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा

भारत सरकार की यह नीति न केवल रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रही है, बल्कि स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी प्रोत्साहन दे रही है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस, डीआरडीओ, और अन्य निजी कंपनियां जैसे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लार्सन एंड टुब्रो पहले ही वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। सरकार के नए ऑर्डर और उत्पादन में तेजी के निर्देश इन कंपनियों के लिए नई व्यावसायिक संभावनाएं लेकर आए हैं।

इसके अलावा, सरकार ने रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप्स और छोटी कंपनियों को भी प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम जैसे क्षेत्रों में इन स्टार्टअप्स की नवाचार क्षमता को देखते हुए, मंत्रालय ने उनके साथ दीर्घकालिक साझेदारी की योजना बनाई है।

क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव

भारत की इन रक्षा तैयारियों का प्रभाव केवल द्विपक्षीय तनावों तक सीमित नहीं है। क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और वैश्विक रक्षा परिदृश्य में भी भारत की स्थिति मजबूत हो रही है। एस-400 जैसे उन्नत सिस्टम और स्वदेशी मिसाइलों की बढ़ती ताकत ने भारत को एक विश्वसनीय रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित किया है। हालांकि, रक्षा बजट में संभावित वृद्धि और आपातकालीन खरीद के फैसले से कुछ आर्थिक चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को रक्षा और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। फिर भी, मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, रक्षा क्षेत्र में निवेश को प्राथमिकता देना अपरिहार्य है।

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