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बच्चे की कमर के पास गड्ढा दिखे तो कब चिंता की बात? मेयो क्लिनिक से जानें Sacral Dimple के संकेत

Sacral Dimple Cause: नवजात शिशु की निचली कमर पर गड्ढा (Sacral Dimple) क्या सामान्य है या खतरे की घंटी? मेयो क्लिनिक और चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ सर्विस (Child and Adolescent Health Service - CAHS) ऑस्ट्रेलिया से जानें मेयो क्लिनिक के अनुसार इसके लक्षण, असामान्य संकेत और जांच की पूरी जानकारी।
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भारत

•

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Nidhi Yadav

•

Sep 26, 2026

Medical illustration of a baby's lower spine and sacral dimple showing potential spinal cord connection

बच्चे की कमर के पास गड्ढा किस वजह से होता है- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)

Sacral Dimple Hindi: जन्म के बाद जब माता-पिता अपने नवजात शिशु को नहलाते हैं या डायपर बदलते हैं, तो वे उसके शरीर के हर हिस्से को बहुत बारीकी से देखते हैं। कई बार माता-पिता का ध्यान बच्चे की पीठ के निचले हिस्से यानी कमर के बिल्कुल नीचे, कूल्हों के जोड़ के पास एक छोटे से गड्ढे या निशान पर जाता है। इसे देखकर अक्सर परिवार के लोग घबरा जाते हैं कि कहीं यह कोई रीढ़ की हड्डी की बीमारी तो नहीं है। मेडिकल भाषा में इस गड्ढे को सैक्रल डिंपल (Sacral Dimple) कहा जाता है। मेयो क्लिनिक के अनुसार, ज्यादातर बच्चों में यह गड्ढा पूरी तरह से सामान्य और हानिरहित होता है। लेकिन कुछ मामलों में यह रीढ़ की हड्डी या नसों से जुड़ी अंदरूनी समस्या का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसलिए हर माता-पिता को इसके सामान्य और असामान्य लक्षणों का फर्क जरूर पता होना चाहिए।

सैक्रल डिंपल क्या होता है?

चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ सर्विस (Child and Adolescent Health Service - CAHS) ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, सैक्रल डिंपल एक छोटा सा गड्ढा या खड्डा होता है जो बच्चे के जन्म के समय ही पीठ के निचले हिस्से (सैक्रम क्षेत्र) की त्वचा पर मौजूद रहता है। यह कूल्हों की दरार (Gluteal Cleft) के ठीक ऊपर स्थित होता है। दुनिया भर में लगभग 2 से 4 प्रतिशत नवजात शिशुओं में यह स्थिति पाई जाती है। जब बच्चा मां के गर्भ में विकसित हो रहा होता है, तब त्वचा और रीढ़ की हड्डियों के बनने की शुरुआती प्रक्रिया के दौरान यह छोटा सा गड्ढा बन जाता है। अधिकांश बच्चों में यह केवल त्वचा की ऊपरी सतह तक ही सीमित रहता है और बच्चे के स्वास्थ्य पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ता।

सामान्य डिंपल और खतरनाक डिंपल में क्या अंतर है?

मेयो क्लिनिक और पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी गाइडलाइंस के अनुसार, सैक्रल डिंपल को दो श्रेणियों में बांटा जाता है;

  • सामान्य या साधारण डिंपल (Simple Sacral Dimple)- इसका आकार बहुत छोटा होता है, आमतौर पर 5 मिलीमीटर (आधे सेंटीमीटर) से भी कम। यह नितंबों की क्रीज (Gluteal Crease) से 2.5 सेंटीमीटर के भीतर बिल्कुल बीच में स्थित होता है। जब आप इसे ध्यान से देखते हैं, तो गड्ढे का निचला सिरा (बेस) साफ दिखाई देता है। इसके आसपास की त्वचा पूरी तरह सामान्य और साफ होती है। ऐसे डिंपल से डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती।
  • असामान्य या जोखिम भरा डिंपल (Atypical Sacral Dimple)- इसका आकार 5 मिलीमीटर से काफी बड़ा और गहरा होता है, जिसका निचला सिरा आंख से साफ नहीं दिखता। यह कमर पर बहुत ऊपर की तरफ स्थित होता है (कूल्हों की दरार से 2.5 सेंटीमीटर से अधिक ऊपर)। एक की जगह पीठ पर दो या उससे ज्यादा गड्ढे नजर आएं।

किन संकेतों को देखकर तुरंत सतर्क होना चाहिए?

अंदरूनी रीढ़ से क्या समस्याएं जुड़ी हो सकती हैं?

यदि डिंपल असामान्य श्रेणी का है, तो इसका संबंध रीढ़ की हड्डी के गंभीर विकारों से हो सकता है। स्पाइना बिफिडा ओकल्ट (Spina Bifida Occulta) स्थिति में गर्भ के दौरान रीढ़ की हड्डी का निचला हिस्सा पूरी तरह से बंद नहीं हो पाता। बाहर से केवल त्वचा पर गड्ढा या बालों का गुच्छा दिखता है, लेकिन अंदरूनी हड्डियां अधूरी रह जाती हैं। सामान्य रूप से रीढ़ की हड्डी रीढ़ की नली (स्पाइनल कैनाल) के भीतर स्वतंत्र रूप से तैरती है। लेकिन इस विकार में रीढ़ की हड्डी आसपास के ऊतकों या त्वचा से कसकर चिपक जाती है। जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, रीढ़ की हड्डी खिंचने लगती है, जिससे पैरों की नसों को नुकसान पहुंच सकता है और पेशाब या शौच पर नियंत्रण खोने का खतरा रहता है।

जांच और सही कदम क्या होने चाहिए?

जन्म के समय अस्पताल में डॉक्टर नवजात की जांच करते हैं। यदि डॉक्टर को डिंपल सामान्य लगता है, तो किसी जांच या इलाज की कोई जरूरत नहीं होती। यह उम्र के साथ यूं ही बना रहता है और कोई परेशानी पैदा नहीं करता। लेकिन यदि डिंपल असामान्य है या उसके साथ त्वचा पर बाल व गांठ मौजूद हैं, तो डॉक्टर बच्चे के स्पाइन का अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं। यदि बच्चा 3 से 6 महीने से छोटा है, तो अल्ट्रासाउंड से रीढ़ की स्थिति का सटीक पता चल जाता है। बड़े बच्चों में रीढ़ और नसों की स्थिति देखने के लिए एमआरआई (MRI) की जाती है। यदि जांच में टीथर्ड कॉर्ड जैसी समस्या निकलती है, तो पीडियाट्रिक न्यूरोसर्जन समय रहते एक छोटी सर्जरी के जरिए रीढ़ की हड्डी को चिपके हिस्से से मुक्त कर देते हैं, जिससे बच्चा भविष्य में चलने-फिरने की किसी भी स्थायी कमजोरी से पूरी तरह सुरक्षित रह सकता है।