महाराष्ट्र: सोनिया गांधी ने शरद पवार को मिलाया फोन....और पलट गई सियासी बाजी!

  • महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों के बीच जारी सत्ता संघर्ष अब नाटकीय घटना में तब्दील
  • सरकार बनाने के करीब पहुंची शिवसेना के हाथ से अब बाजी फिसलती हुई आ रही नजर
  • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने सरकार गठन में हो रही देरी के लिए कांग्रेस को जिम्मेेदार ठहराया

By: Mohit sharma

Updated: 12 Nov 2019, 01:12 PM IST

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों के बीच जारी सत्ता संघर्ष अब नाटकीय घटना में तब्दील होता नजर आ रहा है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के न्यौते पर सरकार बनाने के बिल्कुल करीब पहुंची शिवसेना के हाथ से अब बाजी फिसलती हुई नजर आ रही है।

वहीं, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने सरकार गठन में हो रही देरी के लिए कांग्रेस को जिम्मेेदार ठहराया है।

इस बीच मीडिया के हवाले से खबर आई है कि कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की एक कॉल ने महाराष्ट्र में सारे सियासी समीकरण पलट दिए हैं।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में शिवसेना को समर्थन दिए जाने को लेकर दिल्ली स्थित सोनिया आवास 10 जनपथ पर मैराथन मीटिंग चल रही थी।

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खबर तो यहां तक है कि कांग्रेस में शिवसेना-एनसीपी को समर्थन देने पर आम सहमति बन गई थी और पार्टी नेताओं ने संभावित सरकार को बाहर से समर्थन देने प्रस्ताव पर लगभग मुहर लगा दी थी।

तभी सोनिया गांधी के एक फॉन ने पूरी सियासी बाजी को पलट दिया। दरअसल यह फोन सोनिया गांधी ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से बातचीत करने के लिए किया था।

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दरअसल, पार्टी नेताओं की राय जानने के बाद सोनिया गांधी ने शरद पवार को कॉल किया था। बताया जा रहा है कि जब सोनिया ने शरद पवार को फोन लगाया तो कांग्रेस कोर कमेटी के मेंबर अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल और मल्लिकार्जुन खड़गे वहां मौजूद थे।

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शरद पवार से बात करने के बाद सोनिया गांधी ने कहा कि शिवसेना के साथ सरकार बनाने पर अभी सबकुछ सुनिश्चित नहीं है।

सूत्रों के अनुसार एनसीपी प्रमुख ने सोनिया गांधी को बताया कि वह अभी सरकार गठन को लेकर खुद उद्धव ठाकरे से बातचीत करेंगे। सबकुछ स्पष्ट हो जाने के बाद ही वह फिर से उनको फोन करेंगे।

 

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सोनिया गांधी ने जब इस बात की जानकारी कांग्रेस आलाकमान को दी तो पूरा समीकरण बदल गया।

एक ओर जहां कांग्रेस महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी को समर्थन देने का मन बना चुकी थी, वहीं सरकार गठन को लेेकर पवार और ठाकरे की बात न होना कांग्रेस नेताओं को सकते में डाल गया।

 

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