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सट्टा किंग दिसावर (Satta King desawar) की शुरुआत न्‍यूयॉर्क कॉटन एक्‍सचेंज से बॉम्‍बे कॉटन एक्सचेंज से भेजी जाने वाली रुई के शुरुआती और अंतिम दामों पर सट्टा लगाने से हुई। 1961 में न्‍यूयॉर्क कॉटन एक्‍सचेंज ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद रतन खत्री ने काल्‍पनिक उत्‍पादों के शुरुआती और अंतिम दामों की सट्टेबाजी का एक नया तरीका निकाला। इसमें कागज के टुकड़ों पर नंबर लिखे जाते और फिर उन्‍हें एक मटके में रख दिया जाता। एक व्‍यक्ति चिट निकालता और विजेता नंबर की घोषणा करता। खत्री का मटका सोमवार से शुक्रवार चलता था जबकि कल्‍याणीजी भगत का मटका हफ्ते में सातों दिन चलता था। लोग जल्दी अमीर बनने के लिए मैचों पर सट्टा लगाते हैं। लेकिन, कई बार हार का सामना भी करना पड़ता हैं। भारत में सट्टा लगाना गैर कानूनी है।