
शर्मिला टैगोर और कंगना रनौत की फोटोज। (फोटो सोर्स: IANS and kanganaranaut/instagram)
Kangana Ranaut on Sharmila Tagore Vande Mataram Statement: दिग्गज एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और उसके अलग-अलग छंदों को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् के सिर्फ पहले दो छंद ही गाए जाने चाहिए। एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने अब दिग्गज एक्ट्रेस की इन बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'सीमित और बनावटी' बताया है।
गुरुवार शाम को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर कंगना रनौत ने शर्मिला टैगोर की वंदे मातरम् पर एक ईश्वर वाली टिप्पणी पर तंज कस्ते हुए उनका वीडियो शेयर करते हुए एक लंबा नोट लिखा। इसमें लिखा था, "मैं इस बात की सराहना करती हूं कि शर्मिला जी ने वंदे मातरम् को लेकर अपनी आपत्ति जताई है, लेकिन एक कलाकार के तौर पर मैं हैरान हूं कि कला और कविता पर उनकी सोच इतनी सीमित और बनावटी कैसे हो सकती है। किसी भी कविता या गाने में शब्द रूपक होते हैं, एक कवि मनचाहा असर पैदा करने के लिए हर तरह की कल्पनाओं का इस्तेमाल करता है और अविश्वसनीय समानताएं बनाता है।"
उन्होंने आगे कहा, "वंदे मातरम् आजादी की लड़ाई की भावना है। इसमें बंकिम चंद्र जी देश को अपने भीतर की शक्ति को जगाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, आप कला के इतने महान नमूने को सिर्फ धार्मिक रीति-रिवाज तक कैसे सीमित कर सकते हैं? विवेकानंद ने मशहूर बात कही थी कि मुझे ऐसे युवा चाहिए जिनका शरीर लोहे जैसा हो, हड्डियां स्टील जैसी हों और नसों में बिजली दौड़ती हो। वह मौसम का हाल नहीं बता रहे थे, वह बस शक्ति के उदय की मांग कर रहे थे। कृपया हिंदू-मुस्लिम वाली सोच से बाहर आएं। भले ही आप एक ईश्वर में विश्वास करते हों, डॉक्टर भी ताकत को 'शक्ति' ही कहते हैं। आइए एक-दूसरे को अपना समझकर अपनाएं। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं और मुझे उस जोरदार गले मिलने से कोई दिक्कत नहीं है जो आप हमेशा मुझे देती हैं।"
शर्मीला टैगोर ने गुरुवार को वंदे मातरम् विवाद पर IANS से बात करते हुए कहा कि हो सकता है कि पूरा राष्ट्रगीत गाना भारत के कई समुदायों की धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से सही न हो, क्योंकि वो एक ही ईश्वर को मानते हैं। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि बहुत से धार्मिक लोग ऐसे हैं जो एक ही ईश्वर में विश्वास करते हैं, कई देवताओं या कई धर्मों में नहीं। ‘वंदे मातरम्’ में एक पद ऐसा है जिसमें कई देवताओं का जिक्र है।"
उन्होंने आगे कहा, "जो लोग एक ही धर्म या ईश्वर को मानते हैं, उनके लिए ‘वंदे काली, वंदे दुर्गा’ कहना मुश्किल है। इसलिए, अगर हम भारत के सभी धार्मिक लोगों को साथ लेकर चलें, तो शुरुआती दो पद बहुत अच्छे हैं।"
शर्मिला टैगोर की ये बातें कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के उस फैसले के एक दिन बाद आईं जिसमें उसने 1937 के अपने प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया था, जिसके तहत कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो छंद ही गाए जाएंगे। 15 अगस्त को कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान भी एक विवाद खड़ा हो गया, जब बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी की संसदीय अध्यक्ष सोनिया गांधी पर 'वंदे मातरम्' गाए जाने के समय बातचीत करने का आरोप लगाया। बीजेपी ने माफी की मांग की, जबकि कांग्रेस ने इस घटना को महज एक संयोग बताया।
कांग्रेस ने 1937 में अपनी कार्य समिति द्वारा अपनाए गए प्रस्ताव का हवाला देते हुए अपने फैसले का बचाव किया है। CWC की बैठक के बाद, कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि 'वंदे मातरम्' के गायन पर पार्टी का रुख स्पष्ट है और वह 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा लिए गए फैसलों का पालन करेगी।
Updated on:
20 Aug 2026 10:48 pm
Published on:
20 Aug 2026 10:41 pm
