
अजित पवार। (फोटो- ANI)
अजित पवार को राजनीति में आगे बढ़ाने वाले उनके चाचा शरद पवार हैं। खुद शरद पवार आज राजनीति में बहुत पीछे हो गए हैं। उन्हें इस हाल में पहुंचाने में बड़ी भूमिका अजित पवार की रही है।
2019 में अजित पवार ने सत्ता के लिए शरद पवार से बगावत की थी। उसके बाद से शरद पवार लगातार पिछड़ते ही गए और अजित पवार की तरक्की होती रही।
नवम्बर 2019 की बात है। महाराष्ट्र में कोई पार्टी या गठबंधन सरकार नहीं बना पाया तो 12 तारीख को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। लेकिन, दस दिन बाद खेल बदल गया।
मुंबई में एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के नेताओं की बैठक के बाद 22 नवम्बर की शाम साढ़े सात बजे शरद पवार ने ऐलान किया कि उनके बीच उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में सरकार बनाने पर सहमति हो गई है। लेकिन, दो घंटे बाद भाजपा के देवेंद्र फड़नवीस ने राज्यपाल को विधायकों का समर्थन होने का पत्र सौंप दिया।
राज्यपाल उस समय भगत सिंह कोश्यारी थी, जो पहले भाजपा के नेता रह चुके थे और जिन्हें इस गणतंत्र दिवस पर पद्म सम्मान दिया गया है।
आधी रात के बाद 12.30 बजे एनसीपी नेता अजित पवार ने 54 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी राज्यपाल को सौंपी। उसी समय राज्यपाल ने राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज दी।
23 नवम्बर को सुबह-सुबह 5.47 बजे राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश जारी कर दिया। 8 बजे राज्यपाल ने देवेंद्र फड़नवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप मुख्यमंत्री की शपथ दिला दी।
8.16 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'एक्स' पोस्ट के जरिये मुख्यमंत्री को बधाई दे दी। अजित पवार ने 8.35 बजे कहा कि उन्होंने बीजेपी को समर्थन इसलिए दिया क्योंकि महाराष्ट्र किसानों का मुद्दा सहित कई समस्याओं से जूझ रहा है।
उन्होंने कहा- तीन पार्टियों की बातचीत खत्म ही नहीं हो रही थी। एक महीने से चल रही थी। जो मांगें रखी जा रही थीं, वे जायज नहीं थीं। मुझे लगा जब अभी से ऐसी समस्या है तो हम टिकाऊ सरकार कैसे दे पाएंगे! जरूरत टिकाऊ सरकार की है। मैंने महाराष्ट्र को स्थाई सरकार देने के लिए यह फैसला लिया।
हालांकि, यह सरकार टिक नहीं पाई। मामला सुप्रीम कोर्ट गया। कोर्ट ने सदन में बहुमत परीक्षण के लिए कहा। परीक्षण से पहले अजित पवार ने इस्तीफा दे दिया।
Published on:
28 Jan 2026 11:19 am
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