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Delhi Blast में 2 मौलवियों की क्या रही भूमिका? 19 अक्टूबर को कश्मीर में हुआ था कुछ ऐसा, जिससे मच गई थी खलबली!

दिल्ली लाल किला ब्लास्ट में दो मौलवियों की भूमिका सामने आई है। वह जम्मू-कश्मीर के शोपियां निवासी मौलवी इरफान अहमद वागे और हरियाणा के फरीदाबाद निवासी मौलवी हाफिज मोहम्मद इश्तियाक हैं।

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भारत

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Mukul Kumar

Nov 13, 2025

दिल्ली में ब्लास्ट का मामला। (फोटो- IANS)

दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में हुए विस्फोट की जांच चल रही है। इस बीच, यह भी खुलासा हुआ है कि कार ब्लास्ट में दो मौलवियों की भी अहम भूमिका रही।

एक मूल रूप से जम्मू-कश्मीर में शोपियां नादिगाम इलाके का रहने वाला है। उसकी पहचान मौलवी इरफान अहमद वागे के रूप में हुई है। दूसरा हरियाणा में फरीदाबाद का रहने वाला है। उसे मौलवी हाफिज मोहम्मद इश्तियाक के नाम से जाता है।

दोनों मौलवियों के तार आतंकी संगठन से जुड़े

दोनों मौलवियों को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लाल किला विस्फोट के मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि एक मौलवी ने कुछ लोगों को इस आतंकी मॉड्यूल में शामिल किया था, जबकि दूसरे ने अपना घर एक डॉक्टर को किराए पर दिया था जिसने वहां भारी मात्रा में विस्फोटक जमा किए थे।

ऐसा बताया जा रहा है कि शोपियां के रहने वाले मौलवी इरफान अहमद वागे के परिवार और सहकर्मियों को जरा भी अंदाजा नहीं था कि वह पुलिस की नजर में हैं। उसकी पत्नी फातिमा ने कहा- मैंने उन्हें कभी नमाज के अलावा कुछ करते नहीं देखा।

पत्नी और बहनों ने क्या कहा?

वागे को जम्मू-कश्मीर में आसपास के लोग 'मुफ्ती साहब' भी कहते थे। यह उन सात लोगों में से एक हैं जिन्हें लाल किला विस्फोट से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े आतंकी मॉड्यूल की जांच के तहत गिरफ्तार किया था।

द इंडियन एक्सप्रेस ने मौलवी की पत्नी और उसकी तीन बहनों के हवाले से बताया कि 18 अक्टूबर को नादिगाम स्थित उनके घर से मौलवी को उठा लिया गया था।

बड़ी बहन सबी जान ने बताया कि वह हमेशा की तरह 18 अक्टूबर को श्रीनगर से घर आया। घर आने के बाद चाय पी और नमाज के लिए निकल गया। रात को खाने के बाद, सभी अपने कमरों में चले गए। इस बीच, रात करीब 11 बजे पुलिस आई और उसे लेकर चली गई।

फरीदाबाद से हुई मौलवी की पढाई

वागे के परिवार ने बताया कि उसके दादा ने उसे धार्मिक शिक्षा दी थी। सबसे पहले श्रीनगर के लाल बाजार स्थित दारुल उलूम बिलालिया में उसका दाखिला कराया गया था।

इसके बाद, फरीदाबाद में अल फलाह परिसर में स्थित मस्जिद जहां इश्तियाक एक मौलवी था। वागे यहां भी पढ़ा। फरीदाबाद में धार्मिक शिक्षा पूरी करने के बाद, वागे 2017-18 में अपनी पढ़ाई जारी रखने और मुफ्ती बनने की ट्रेनिंग लेने देवबंद चले गया।

उसकी गर्भवती फातिमा ने बताया- हमारी शादी 2021 में हुई थी। दंपति का एक तीन साल का बच्चा भी है। उसने यह भी बताया कि वागे ने पिछले सात साल श्रीनगर के नौगाम के नाइक बाग इलाके की एक मस्जिद में नमाज अदा करते हुए बिताए।

पत्नी ने कहा- मैं अक्सर उनसे मिलने वहां जाती थी। हम दोनों सप्ताहांत में शोपियां घर आते थे। परिवार ने कहा कि वे मामले के किसी भी अन्य आरोपी के नाम से परिचित नहीं हैं।

19 अक्टूबर को क्या हुआ?

19 अक्टूबर को श्रीनगर के बनपोरा नौगाम में विभिन्न स्थानों पर जैश-ए-मोहम्मद के कई पोस्टर चिपके हुए पाए गए, जिनमें पुलिस और सुरक्षा बलों को धमकाया और डराया गया था।

उधर, लाल किला विस्फोट मामले में पुलिस का कहना है कि फरीदाबाद में जैश मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद लापता हुआ डॉक्टर ही हमलावर हो सकता है। क्योंकि पुलवामा अब जांच का केंद्र बना हुआ है।

पुलिस की जांच अब आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करने के लिए आगे बढ़ेगी, जिसमें वागे और छह अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई। इनमें आरिफ निसार डार, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार शामिल हैं। ये सभी नौगाम के निवासी हैं, जहां वागे नमाज पढ़ाता था।

वागे के परिवार ने क्या कहा?

वागे के परिवार ने दावा किया कि उसे पहले कभी पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया था, उनके घर की पहले कभी तलाशी नहीं ली गई।

नौगाम की मस्जिद में, जहां वह इमाम के तौर पर काम करता था, समिति के अध्यक्ष फारूक अहमद ने कहा- हर शनिवार, वह घर जाता था और सोमवार दोपहर को वापस आता था। नमाज पढ़ने वाले सभी लोगों के लिए यह बात बेहद चौंकाने वाली है।

#Delhiblastमें अब तक