
ब्रह्मोस मिसाइल(फोटो-ANI)
Indonesia to Buy Brahmos Missile: फिलीपींस के बाद इंडोनेशिया ने भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस पर भरोसा जताया है। इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए भारत से डील फाइनल कर ली है। यह डील 200-350 मिलियन डॉलर (करीब 1,843-3,225 करोड़ रुपए) की हो सकती है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिको रिकार्डो सिराइट ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को इस डील की जानकारी दी है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता देश की सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने आगे कहा कि इंडोनेशिया अपनी सेना, विशेष रूप से अपनी समुद्री रक्षा क्षमताओं के आधुनिक करने के प्रयासों के तहत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल हासिल करने के लिए भारत के साथ एक समझौते पर पहुंच गया है।
हालांकि, इंडोनेशिया ने इस डील की कुल कीमत के बारे में जानकारी नहीं दी है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने 2023 में कहा था कि वह इंडोनेशिया के साथ 200 मिलियन डॉलर से 350 मिलियन डॉलर के बीच अनुमानित अनुबंध पर उनकी बातचीत चल रही है। इसके पहले फिलीपींस ने अपने देश की तटीय रक्षा को मजबूत करने के लिए 2022 में ब्रह्मोस मिसाइलों को खरीदने के लिए भारत से डील की थी। फिलीपींस ने यह डील 375 मिलियन डॉलर में हुई थी।
भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल की फिलीपींस तारीफ कर चुका है। हाल ही में दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग-2026 में शामिल हुए फिलीपींस के सशस्त्र बलों के चीफ जनरल रोमियो एस. ब्रॉनर जूनियर ने ब्रह्मोस पर भरोसा जताया था। उन्होंने कहा था कि भारत से की गई ब्रह्मोस खरीद की डील से वह संतुष्ट हैं। उन्होंने आगे कहा- ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली खरीदने वाला पहला देश फिलीपींस था। अब इंडोनेशिया ने भी यही प्रणाली खरीद ली है। मैं कह सकता हूं कि हम अपनी खरीद से खुश हैं और उम्मीद है कि हम भारत के साथ और अधिक व्यापार कर सकेंगे। बता दें कि दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और चीन के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। वहां बीजिंग के तटरक्षक जहाजों ने फिलीपींस के जहाजों के खिलाफ पानी की तोपों और खतरनाक युद्धाभ्यासों का इस्तेमाल किया था।
दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग-2026 में फिलीपींस के सशस्त्र बलों के चीफ जनरल रोमियो एस. ब्रॉनर जूनियर ने ब्रह्मोस और भारत की जमकर तारीफ की थी। ब्रॉनर ने कहा था कि क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। पिछले साल जब मैं यहां आया था तो मैंने जनरल अनिल चौहान से बात की और उनसे फिलीपींस में जहाज भेजने का अनुरोध किया था। ताकि, हम साथ मिलकर शिपिंग की स्वतंत्रता से संबंधित अभियान चला सकें। इसके 4 महीने बाद उन्होंने फिलीपींस में 4 जहाज भेजे। यह क्षेत्र में सुरक्षा का एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू है। हम देख रहे हैं कि गैर-पारंपरिक साझेदार एक साथ आ रहे हैं और नियमों पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं।
वैश्विक हथियार बाजार में अपना जलवा दिखा रही भारत कि ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज गति की क्रूज मिसाइल है। यह मैक 2.8 की गति तक पहुच सकती है, जो ध्वनि की गति से लगभग 3 गुना अधिक है। ब्रह्मोस मिसाइल दुश्मन को चकमा देने में सक्षम है और कम ऊंचाई पर उड़ सकती है। जिसकी वजह से दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
इसकी मारक क्षमता 300 से 400 किलोमीटर के बीच है। यह प्रक्षेपण बिंदु से दूर स्थित लक्ष्यों को बेहद सटीकता के साथ भेद सकती है। इस मिसाइल को जमीन, समुद्र, और हवा(फाइटर जेट) से लॉन्च किया जा सकता है। सुपरसोनिक गति होने के कारण, ब्रह्मोस को मार गिराना लगभग असंभव है।
ब्रह्मोस भारत की सबसे उन्नत और महंगी मिसाइल में से एक है। एक मिसाइल की औसत लागत ₹25 करोड़ से ₹35 करोड़ के बीच हो सकती है। भारत ने अपनी और निर्यात की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मिसाइल के उत्पादन और सुविधाओं का विस्तार किया है। लखनऊ में लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित नई ब्रह्मोस निर्माण यूनिट प्रति वर्ष 80 से 100 मिसाइलों का उत्पादन कर सकती है। देश के अन्य कई स्थानों पर भी ब्रह्मोस का निर्माण हो रहा है।
भारत ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज को 800 किलोमीटर तक करने पर तेजी से काम चल रहा है। ब्रह्मोस का नया वैरिएंट साल 2030 से पहले एयरफोर्स और नेवी की फ्लीट में शामिल हो जाएगा। इस मिसाइल के नए वैरिएंट को ब्रह्मोस-ए (BrahMos-A 800 KM Variant) नाम दिया गया है। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के समय 290 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था। इसे Su-30MKI फाइटर जेट से लॉन्च किया गया था। अब 800 किलोमीटर रेंज वाली ब्रह्मोस मिसाइल आने से भारत की ताकक कई गुना बढ़ जाएगी।
Updated on:
09 Mar 2026 09:31 pm
Published on:
09 Mar 2026 09:25 pm
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