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खुर्जा पॉटरी उद्योग के लिए तो काफी मशूहर है, लेकिन नगर को खुर्जा&nbsp;वाली मैया के नाम से भी जाना जाता है। जिला मुख्यालय से 25 किमी दूर&nbsp;खुर्जा&nbsp;में श्रीनवदुर्गा शक्ति&nbsp;मंदिर&nbsp;लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। बता दें कि इस मंदिर का निर्माण 1 जनवरी 1993 को हुआ था। जनवरी 2018 में मंदिर को बने हुए 25 साल हो जाएंगे। <strong>दो हजार वर्ग गज में फैला है&nbsp;मंदिर</strong> यह मंदिर करीब दो हजार वर्ग गज में बना हुआ है। इसकी ऊंचाई 30 फीट व इसके शिखर की ऊंचाई 60 फीट है। सड़क से ही माता रानी के मुख्य भवन के दर्शन किए जा सकते हैं। इसकी दीवारों व छत पर दिल्ली व जयपुर के कलाकारों द्वारा शीशे की महीन कारिगरी की गई है। <strong>चार टन वजन की है मूर्ति </strong> श्रीनवदुर्गा शक्ति&nbsp;मंदिर&nbsp;में अष्टधातु की चार टन वजन की 27 खंडों में बनी शक्ति स्वरूपा की मूर्ति है। इस अट्ठारहभुजी मूर्ति में सभी नौ रूपों के दर्शन होते हैं। मां की मूर्ति अष्टधातु से बनी है, जो 14 फुट ऊंची और 11 फुट चौड़ी है। मूर्ति का निर्माण एक पिलर पर टिका है।&nbsp;&nbsp; <strong>परिक्रमा का महत्व</strong> मंदिर&nbsp;के चारों ओर एक परिक्रमा मार्ग का भी निर्माण किया गया है। इसकी 108 परिक्रमाओं की कुल लंबाई श्री गोर्वधन परिक्रमा मार्ग के बराबर है। कहते हैं कि नवरात्र में मंदिर की 108 परिक्रमा करने से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं।&nbsp; <strong>सपने में दिए थे दर्शन</strong> मंदिर का निर्माण कराने वाले मोहन लाला की मानें तो देवी मां ने सपने में आकर उन्&zwj;हें दर्शन दिए थे, जिसके बाद मंदिर का निर्माण शुरू किया गया।&nbsp; <strong>इस तरह से पहुंच सकते हैं दर्शन करने</strong> दिल्ली से 70 किलोमीटर दूर बसे बुलंदशहर के खुर्जा में माता का मंदिर है। बुलंदशहर पहुंचने के बाद खुर्जा के लिए बस और टेंपो दोनों जाते हैं। खुर्जा के मंदिर तक पहुंचने का बस एक आसान तरीका है। वैसे दिल्&zwj;ली से सीधे खुर्जा के लिए लोकल ट्रेन भी चलती हैं लेकिन इनमें भीड़ काफी होती है, इसलिए लोग बस या टैक्&zwj;सी का सहारा लेते हैं।






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