
MHADA से लेकर Mantralay तक अधिकारियों में मची खलबली, 'पत्रिका' एक्सपोज़ खबर का असर ?
रोहित के. तिवारी
मुंबई. महाराष्ट्र आवास और क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (म्हाडा) के स्वामित्व वाले ओशिवारा में भूमि के दुरुपयोग के मामले में अब गृहनिर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय कुमार ने संज्ञान लिया है। बता दें कि 'पत्रिका' ने ओशिवारा स्थित 9500 चौ. मीटर के जमीन घोटाले के मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिस पर अब म्हाडा से लेकर मंत्रालय तक के अधिकारियों ने म्हाडा को आर्थिक रूप से 2 हजार करोड़ से भी ज्यादा होने वाले नुकसान को लेकर जोरशोर से पड़ताल शुरू करने का आदेश दिया है। वहीं म्हाडा उपाध्यक्षमिलिंद म्हैसकर पहले ही मामले से संबंधित बिल्डरों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे चुके हैं। मामले के मुख्य शिकायतकर्ता अभिजीत शेट्टी ने म्हाडा उपाध्यक्ष के आदेश के साथ शिकायत की एक प्रति गृह सचिव को भी भेजी थी। इसे देखते हुए म्हाडा मुंबई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को इस मामले पर तत्काल कार्रवाई को लेकर म्हाडा उपाध्यक्ष मिलिंद म्हैसकर को इस पर दखल देने का आदेश 26 नवंबर को गृहनिर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव की ओर से जारी किया गया है।
कार्रवाई के नाम पर अधिकारी कर रहे लीपापोती...
विदित हो कि 'पत्रिका' की ओर से एक्सपोज की गई खबर पर एक्शन लेते हुए पहले ही म्हाडा अध्यक्ष उदय सामंत भी अपनी भूमिका स्पष्ट कर चुके हैं कि फर्जी दस्तावेज के आधार पर म्हाडा को 2 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वहीं म्हाडा उपाध्यक्ष की ओर से मामले की गंभीरता को भांपते हुए संबंधित बिल्डरों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश 15 अक्टूबर को दिया गया था। वहीं अभी ताजे आदेश में मुख्य सचिव ने आवास सचिव से विस्तृत और स्पष्ट रिपोर्ट फीडबैक के साथ सभी दस्तावेज जमा करने को कहा है। ओशिवारा में 9500 चौ. मीटर जमीन पर डेवलपर्स ने म्हाडा अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी कागजात के आधार पर बोगस सदस्यों के सहारे मरक्यूरी और मिलेनियम कोर्ट को. ऑप. हाउसिंग सोसायटी ने पॉश इलाके में काफी महंगे फ्लैट तैयार किए हैं। इस तरह से डेवलपर्स और अधिकारियों की साठगांठ से म्हाडा प्राधिकरण को करोड़ों का चूना लगाने का काम किया गया है। वहीं मामले पर कार्रवाई के आदेश के बावजूद म्हाडा के आलाधिकारियों की ओर से सिर्फ मामले पर लीपापोती का काम किया जा रहा है।
मूल उत्तराधिकारी के हक में आ चुका है उच्च न्यायालय का फैसला...
उल्लेखनीय है कि डेवलपर शाहिद खान की ओर से ओशिवारा सर्वे नंबर 33 के साथ में क्रमांक 8 के बोगस कागजात और पावर ऑफ अटॉर्नी बनाते हुए सीटीएस क्रमांक 9, 33-10, सीटीएस नं. 13 और 15 समेत कुल 9500 चौ. मीटर जमीन हड़पने का काम किया गया है। वहीं मरक्यूरी और मिलेनियम जैसी गगनचुंबी इमारतों के इस भूखंड पर ए और बी विंग का निर्माण किया गया है। जबकि मामले में अपने मूल उत्तराधिकारी जुबेर इब्राहिम, हुमायूं अब्दुल रजाक, मसूद अब्दुल रजाक के साथ मालिकाना हक रखने वाले 21 लोगों ने उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की थी। इस पर अदालत ने आदेश दिया था कि फैसला मूल उत्तराधिकारियों के पक्ष में होना चाहिए और संबंधित लोगों पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया। जबकि मामले पर आवास मंत्री समेत म्हाडा के अध्यक्ष के संज्ञान लेने के बावजूद म्हाडा अधिकारियों की ओर से जांच और कार्रवाई का सिर्फ दिखावा ही किया जा रहा है, अभी तक मामले से संबंधित लोगों में से किसी पर भी म्हाडा प्रशासन को ओर से कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। विवादित जमीन के बाद भी म्हाडा अध्यक्ष के आदेश के बाद भी म्हाडा बांद्रा के निवासी कार्यकारी अभियंता, मुंबई के कार्यकारी अभियंता और म्हाडा विशेष प्राधिकरण के कार्यकारी अभियंता की ओर से मिलेनियम कौ. ऑप हाउसिंग सोसायटी के व्यवसाय प्रमाणपत्र को भी मंजूरी दी गई है।
संबंधित लोगों पर होगी कार्रवाई...
मामले में अधिकारियों को जांच करने और तुरंत कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए दस्तावेज का सत्यापन कर संबंधित डेवलपर्स और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। मामला गंभीर है और अदालत ने भी आदेश दिया है। इसलिए इस जमीन घोटाले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- मिलिंद म्हेस्कर, वाइज प्रेसिडेंट, म्हाडा मुख्यालय
दोषियों पर नहीं होगी कोई रियायत...
यह बहुत ही गंभीर मामला है। इसकी म्हाडा की ओर से जांच प्रक्रिया पूरी हो रही है और इस पेचीदे मामले में संलिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि वर्षों से दर-दर भटकने को मजबूर जमीन के मूल उत्तराधिकारियों के साथ हर तरह से न्याय किया जाएगा। दोषियों पर किसी भी तरह की कोई रियायत नहीं कि जाएगी।
- उदय सामंत, अध्यक्ष, म्हाडा
स्पष्ट रिपोर्ट और दस्तावेज जमा करने का आदेश...
अदालत के आदेशानुसार संबंधित लोगों पर मामला दर्ज किया जाना था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। वहीं मामले पर आवास मंत्री समेत म्हाडा के अध्यक्ष के संज्ञान लेने के बावजूद म्हाडा अधिकारियों की ओर से जांच और कार्रवाई पूरी नहीं हो रही है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए अविलंब इस मामले में विस्तृत और स्पष्ट रिपोर्ट फीडबैक के साथ सभी दस्तावेज जमा करने का आदेश दिया गया है।
- संजय कुमार, अपर मुख्य सचिव, गृहनिर्माण विभाग
Updated on:
09 Dec 2019 10:15 am
Published on:
08 Dec 2019 11:06 pm
बड़ी खबरें
View Allमुंबई
महाराष्ट्र न्यूज़
ट्रेंडिंग
