मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में दिल दहला देने वाले गैंगरेप के मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 23 दिसम्बर 2017 को अपना फैसला सुनाया। सिर्फ 36 दिनों की सुनवाई में ही कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए मामले के सभी चारों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामला 31 अक्टूबर 2017 का है, जब भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पास यूपीएससी की कोचिंग से घर वापस लौट रही 19 साल की छात्रा को चार आरोपियों ने अपनी हवस का शिकार बनाया था और फिर उसे मरा हुआ समझकर फेंक गए थे। मध्यप्रदेश सहित पूरे देश को हिला कर रख देने वाले इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू ये था कि पुलिस ने ही एफआईआर दर्ज करने में 11 घंटे से ज्यादा का वक्त ले लिया था। पीड़िता के परिजनों ने खुद एक आरोपी को सबसे पहले पकड़ा और पुलिस के हवाले किया था। हालांकि पुलिस की ये लापरवाही कुछ अधिकारियों पर भारी भी पड़ी और 10 पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई भी गई। कपड़ो मे लगी मिट्टी तक को सबूत मे किया पेशइस बहुचर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में अदालत ने चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जज सविता दुबे ने फैसला सुनाते हुए चारों को दुष्कर्म के मामले में दोषी बताया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई, इसके साथ अलग-अलग जुर्माना भी लगाया गया। कोर्ट ने इसे जघन्य अपराध माना है। मामले की सुनवाई 36 दिनों तक चली। इस दौरान 28 गवाहों के पूरे मामले में बयान हुए। 15 नवंबर को 200 पेश का चालान कोर्ट में पेश किया गया, जिसमें 60 दस्तावेजों को भी शामिल किया गया।कोर्ट में सबूत के तौर पर फॉरेंसिक रिपोर्ट, आरोपियों की डीएनए रिपोर्ट, पीड़ि‍ता के बयान, कपड़े और इसके साथ ही कपड़ों पर लगी मिट्टी और घटनास्थल पर लगी मिट्टी के सैंपल भी पेश किए गए। सबूत में पेश की गई डीएनए रिपोर्ट में चारों आरोपियों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म करने की बात सामने आई है। भोपाल में कोचिंग क्लास से लौटते वक्त 19 साल की छात्रा से गैंगरेप किया गया था। मामले में चारों आरोपियों ने उसे हबीबगंज रेलवे स्टेशन के पास उस वक्त पकड़ा था, जब वो यूपीएससी की कोचिंग के बाद वापस अपने घर लौट रही थी। छात्रा को अगवा करने के बाद आरोपी उसे पास की ही पुलिया के नीचे ले गए और बारी बारी उसके साथ बलात्कार किया। उन्होंने छात्रा के गहने और मोबाइल फोन लूट लिया था और उसे जान से मारने की कोशिश भी की। छात्रा को मरा हुआ समझकर वे उसे वहीं फेंक कर भाग गए थे।

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