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CG News: संघर्ष में निखरी प्रतिभा, अब वर्ल्ड स्कूल गेम्स में जाएगी कोंडागांव की हेमबती

सोच: मुश्किल हालात में जो हार नहीं मानता, वो हर परेशानी को हल कर लेता है। और सफलता उसके साथ चलती है।
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रायपुर

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Anupam Rajiv Rajvaidya

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दिनेश कुमार

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Oct 04, 2026

CG News

CG News: छत्तीसगढ़ के कोंडागांव के घने जंगलों से घिरे बडेकनेरा गांव की 17 साल की हेमबती नाग ने महज 7 साल के सफर में वर्ल्ड स्कूल जूडो गेम्स तक पहुंचकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। दिसंबर में होने वाले वर्ल्ड स्कूल गेम्स के लिए भोपाल के साईं सेंटर में तैयारी कर रही हेमबती कहती हैं कि खेल में बहुत दूर तक जाना है। देश का नाम रोशन करना है।

10 साल की उम्र में माता-पिता को खोने वाली हेमबती ने मुश्किल हालात को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। बालिका गृह में रहते हुए जूडो की थ्रीगिंग तकनीक से शुरुआत करने वाली हेमबती ने सात साल के सफर में वर्ल्ड स्कूल जूडो गेम्स तक पहुंच गई। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच अभ्यास जारी रखते हुए उसने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

बेहद सहज और शांत: छत्तीसगढ़ के पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी, प्रशिक्षक और जूडो एसोसिएशन के सचिव अरुण द्विवेदी के मुताबिक 40 किलो वजन वर्ग में खेलने वाली हेमबती बड़े मुकाबलों में भी बेहद सहज और शांत नजर आती हैं। मुकाबले के दौरान चयन का दबाव उन पर हावी नहीं होता। यही आत्मविश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। वर्ल्ड स्कूल प्रतियोगिता में हेमबती ने प्री-क्वार्टर फाइनल से लेकर सेमीफाइनल तक लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए कई मुकाबले जीते। जूडो जैसे खेल में जहां ताकत के साथ तकनीक, धैर्य और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है, वहां हेमबती ने अपने खेल से साबित किया कि परिस्थितियां प्रतिभा की राह नहीं रोक सकतीं।

पदकों का सफर: हेमबती ने वर्ष 2022 से 2026 तक लगातार छत्तीसगढ़ के लिए जूडो में पदक जीते हैं। अब वह पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलेंगी। अंडर-18 वर्ल्ड स्कूल जूडो चयन ट्रायल में हेमबती जूडो में स्वर्ण पदक जीता, वह दिसंबर में ब्राजील जाएंगी। भोपाल में भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में हेमबती के जूडो कोच घनश्याम ठाकुर मौजूद थे, लेकिन ट्रायल के नियमों के कारण वे मुकाबले के दौरान खिलाड़ी को मार्गदर्शन नहीं दे सके। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ की ओर से साई सेंटर के कोच शैलेन्द्र यादव ने कमान संभाली। हेमबती के सामने अगली चुनौती बड़ी है, ब्राजील की अंतरराष्ट्रीय मैट। जिस लड़की ने घरेलू मुकाबले में पिछली हार का हिसाब अपनी रणनीति बदलकर चुकाया है, वह देश की उम्मीद लेकर दुनिया के सामने उतरेगी।